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| Lata Mangeshkar का 60 साल पुराना गीत, जो हर युवती की जुबान पर था |
क्या आपको पता है कि करीब 60 साल पहले एक ऐसा गीत आया था, जिसे सुनकर उस दौर की युवतियां खुद को उससे जोड़ने लगी थीं?
यह गाना सिर्फ एक फिल्मी गीत नहीं था, बल्कि उस समय की लड़कियों की भावनाओं, सपनों और आजादी की चाह का प्रतीक बन गया था।
आज भी जब यह गीत रेडियो, टीवी या सोशल मीडिया पर सुनाई देता है तो लोगों की यादें ताजा हो जाती हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस गीत को आवाज दी थी भारत की स्वर कोकिला, Lata Mangeshkar ने।
लेकिन आखिर कौन सा था वह गीत, जो 1960 के दशक में युवतियों के होठों पर बस गया था? आइए जानते हैं इसकी पूरी untold story।
साल 1965 में रिलीज हुई फिल्म Guide का एक गीत आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे प्रेरणादायक और लोकप्रिय गीतों में गिना जाता है।
यह गीत था — "आज फिर जीने की तमन्ना है, आज फिर मरने का इरादा है"।
इस गाने को संगीतकार S. D. Burman ने संगीतबद्ध किया था और इसके बोल लिखे थे Shailendra ने। इसे अपनी जादुई आवाज से अमर बनाया लता मंगेशकर ने। यह गीत 1965 की सबसे चर्चित धुनों में शामिल हुआ था।
कम लोग जानते हैं कि "आज फिर जीने की तमन्ना है" सिर्फ एक रोमांटिक गीत नहीं था।
फिल्म में यह गाना उस पल आता है जब रोज़ी नाम की महिला अपने बंधनों से बाहर निकलकर अपनी नई जिंदगी शुरू करने का फैसला करती है।
1960 के दशक का भारत तेजी से बदल रहा था। समाज में महिलाओं की भूमिका को लेकर नई सोच जन्म ले रही थी। ऐसे समय में यह गीत युवतियों के लिए उम्मीद, आत्मविश्वास और स्वतंत्रता का संदेश लेकर आया।
यही वजह थी कि कॉलेजों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और महिला समारोहों में यह गीत अक्सर सुनाई देता था। कई पुराने फिल्म इतिहासकारों और संगीत प्रेमियों ने भी इसे उस दौर की महिलाओं की भावनाओं का प्रतिनिधि गीत माना है।
1960 का दशक लता मंगेशकर के करियर का स्वर्णिम दौर माना जाता है।
उसी दौर में उन्होंने "प्यार किया तो डरना क्या", "अजीब दास्तां है ये", "अल्लाह तेरो नाम" और "आज फिर जीने की तमन्ना है" जैसे कई अमर गीत गाए, जो आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसे हुए हैं।
लेकिन "आज फिर जीने की तमन्ना है" में उनकी आवाज का अलग ही असर था।
गीत में खुशी है, आत्मविश्वास है, आजादी है और जीवन को नए सिरे से जीने का जुनून भी। शायद यही वजह है कि यह गीत पीढ़ियों तक लोगों के दिलों में बना रहा।
फिल्म "Guide" अपने समय से काफी आगे मानी जाती है।
जहां अधिकांश फिल्मों में महिलाओं को पारंपरिक भूमिकाओं में दिखाया जाता था, वहीं "Guide" की नायिका रोज़ी अपने फैसले खुद लेती है।
ऐसे में "आज फिर जीने की तमन्ना है" सिर्फ फिल्म का एक गीत नहीं रहा, बल्कि महिला स्वतंत्रता का एक सांस्कृतिक प्रतीक बन गया।
यही कारण है कि कई संगीत समीक्षक इसे हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली महिला-केंद्रित गीतों में शामिल करते हैं।
सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं कि कौन सा गीत "सबसे ज्यादा" गुनगुनाया गया था, लेकिन यह सच है कि 1960 के दशक के सबसे लोकप्रिय महिला गीतों में "आज फिर जीने की तमन्ना है" का नाम हमेशा लिया जाता है।
संगीत इतिहास में इसे उन गीतों में गिना जाता है जिन्होंने महिलाओं की सोच और भावनाओं को नई अभिव्यक्ति दी।
समय बदल गया।
संगीत बदल गया।
फिल्मों की शैली बदल गई।
लेकिन "आज फिर जीने की तमन्ना है" का जादू आज भी बरकरार है।
सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो, रील्स और क्लासिक बॉलीवुड कंटेंट में यह गीत लगातार वायरल होता रहता है। नई पीढ़ी भी इसे उतना ही पसंद करती है जितना 60 साल पहले की पीढ़ी करती थी।
शायद इसलिए क्योंकि यह गीत सिर्फ एक धुन नहीं, बल्कि जिंदगी को दोबारा जीने का हौसला देता है।
जब भी लता मंगेशकर के सबसे प्रेरणादायक गीतों की बात होती है, "आज फिर जीने की तमन्ना है" का नाम सबसे ऊपर दिखाई देता है।
यह वह गीत है जिसने 1960 के दशक की हजारों युवतियों को अपनी भावनाओं की आवाज दी और आज भी लाखों लोगों को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
आपने यह गीत पहली बार कब सुना था? क्या आपको भी लगता है कि आज की पीढ़ी को ऐसे सदाबहार गीतों से जरूर जुड़ना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।
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