पहलाज निहलानी का निधन: गोविंदा को स्टार बनाने वाले निर्माता की आखिरी कहानी, विवादों से घिरे रहे लेकिन बॉलीवुड पर छोड़ी अमिट छाप
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| अलविदा पहलाज जी |
क्या आपने कभी सोचा है कि 90 के दशक में गोविंदा की लगातार सुपरहिट फिल्मों के पीछे खड़ा वह शख्स कौन था, जिसने सिर्फ फिल्में नहीं बनाईं बल्कि पूरे दौर की कमर्शियल बॉलीवुड की दिशा तय कर दी?
वही शख्स, जिसने सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष रहते हुए देशभर में बहस छेड़ दी। वही निर्माता, जिनके फैसलों की आलोचना भी हुई और तारीफ भी।
अब वह आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई है।
बॉलीवुड के वरिष्ठ निर्माता और पूर्व CBFC (सेंसर बोर्ड) अध्यक्ष पहलाज निहलानी का 4 जून 2026 को 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। पिछले कुछ महीनों से वह लिवर से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई।
एक ऐसा नाम जिसने 80 और 90 के दशक का बॉलीवुड बदल दिया
आज की युवा पीढ़ी शायद पहलाज निहलानी को सेंसर बोर्ड विवादों की वजह से ज्यादा जानती हो, लेकिन कम लोग जानते हैं कि एक समय ऐसा था जब उनका नाम बॉक्स ऑफिस सफलता की गारंटी माना जाता था।
उन्होंने 1980 के दशक की शुरुआत में फिल्म निर्माण में कदम रखा और जल्द ही बॉलीवुड के बड़े निर्माताओं में शामिल हो गए। उनकी शुरुआती फिल्मों में "हाथकड़ी", "आंधी-तूफान" जैसी फिल्में शामिल रहीं।
लेकिन असली सफलता अभी बाकी थी।
गोविंदा के करियर के पीछे खड़ा वह निर्माता
अगर गोविंदा के सुनहरे दौर की बात होती है तो पहलाज निहलानी का नाम अपने आप सामने आ जाता है।
उन्होंने गोविंदा के साथ कई बड़ी फिल्में बनाईं और उनके करियर को नई ऊंचाई देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। "इल्जाम", "शोला और शबनम", "आंखें", "अंदाज" जैसी फिल्मों ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर कमाल किया बल्कि गोविंदा को सुपरस्टार बना दिया।
फिल्म इंडस्ट्री में कई लोग मानते हैं कि गोविंदा और डेविड धवन की सुपरहिट जोड़ी को मजबूत करने में भी निहलानी की बड़ी भूमिका थी।
'आंखें' जिसने इतिहास बना दिया
1993 में रिलीज हुई "आंखें" सिर्फ एक फिल्म नहीं थी।
वह एक ऐसा सिनेमाई तूफान थी जिसने टिकट खिड़की पर रिकॉर्ड तोड़ दिए थे।
उस दौर में जब बॉलीवुड कई तरह के प्रयोग कर रहा था, तब पहलाज निहलानी ने आम दर्शकों की नब्ज को समझा। उन्होंने मनोरंजन को केंद्र में रखकर ऐसी फिल्म बनाई जो पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई।
आज भी "आंखें" को 90 के दशक की सबसे सफल कमर्शियल फिल्मों में गिना जाता है।
सेंसर बोर्ड का सबसे चर्चित चेहरा
फिल्म निर्माता के रूप में सफलता हासिल करने के बाद पहलाज निहलानी को 2015 में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) का अध्यक्ष बनाया गया।
यहीं से उनकी जिंदगी का दूसरा और सबसे विवादित अध्याय शुरू हुआ।
उनके कार्यकाल में कई फिल्मों को लेकर बड़े विवाद सामने आए। कुछ लोगों ने उन्हें भारतीय संस्कृति का रक्षक बताया तो कुछ ने उन्हें अत्यधिक सेंसरशिप लागू करने वाला अधिकारी कहा।
उनके कई फैसले राष्ट्रीय बहस का विषय बने। सोशल मीडिया पर मीम्स बने, टीवी डिबेट हुईं और फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नाम उनके समर्थन और विरोध में खड़े नजर आए।
विवादों के बावजूद क्यों अलग थे पहलाज निहलानी?
बॉलीवुड में ऐसे बहुत कम लोग होते हैं जो दर्शकों को भी प्रभावित करें और सिस्टम को भी।
पहलाज निहलानी उन्हीं चुनिंदा लोगों में से एक थे।
उनकी छवि भले ही विवादित रही हो, लेकिन यह भी सच है कि उन्होंने अपने विचारों को लेकर कभी समझौता नहीं किया। यही वजह थी कि उनके समर्थक और आलोचक दोनों हमेशा मौजूद रहे।
गोविंदा से दूरी की अनकही कहानी
कम लोग जानते हैं कि एक समय गोविंदा और पहलाज निहलानी की दोस्ती बॉलीवुड में मिसाल मानी जाती थी।
लेकिन बाद के वर्षों में दोनों के रिश्तों में दूरी आ गई।
एक पुराने इंटरव्यू में निहलानी ने इस दूरी के लिए निर्देशक डेविड धवन को जिम्मेदार ठहराया था। यह बयान उस समय काफी वायरल हुआ था और लंबे समय तक चर्चा में रहा।
यही वह behind the scenes कहानी है जिसके बारे में आम दर्शक बहुत कम जानते हैं।
'वह अवतार मेरी फिल्म थी...'
पहलाज निहलानी अपने बेबाक अंदाज के लिए भी मशहूर थे।
एक इंटरव्यू में जब गोविंदा के "अवतार" वाले दावे पर चर्चा हुई तो निहलानी ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि जिस "अवतार" की बात हो रही है वह उनकी फिल्म थी, जेम्स कैमरून वाली नहीं।
यह बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था और लोगों ने इसे लंबे समय तक याद रखा।
आखिरी दिनों में कैसी थी तबीयत?
रिपोर्ट्स के अनुसार पहलाज निहलानी पिछले लगभग चार महीनों से लिवर सिरोसिस और अन्य लिवर संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे।
उनका मुंबई के नानावटी अस्पताल में इलाज चल रहा था। स्वास्थ्य लगातार कमजोर होता गया और 4 जून 2026 को उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनके निधन की खबर सामने आते ही बॉलीवुड के कई कलाकारों और फिल्मी संगठनों ने शोक व्यक्त किया।
सुनील शेट्टी और पूनम ढिल्लों समेत कई सितारों ने दी श्रद्धांजलि
अभिनेता सुनील शेट्टी ने उन्हें याद करते हुए कहा कि वह उन शुरुआती लोगों में से थे जिन्होंने उनके करियर पर भरोसा किया था।
वहीं पूनम ढिल्लों ने उनके निधन को "चौंकाने वाला और बेहद दुखद" बताया। उन्होंने कहा कि उनकी और निहलानी की दोस्ती कई दशकों पुरानी थी।
परिवार और विरासत
पहलाज निहलानी अपने पीछे पत्नी और परिवार को छोड़ गए हैं।
लेकिन उनकी सबसे बड़ी विरासत वे फिल्में हैं जिन्हें आज भी टीवी पर दर्शक पसंद से देखते हैं।
वह दौर बदल गया, सितारे बदल गए, फिल्में बदल गईं, लेकिन "शोला और शबनम", "आंखें", "इल्जाम" और "अंदाज" जैसी फिल्मों की यादें आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं।
असल सच यही है...
पहलाज निहलानी को सिर्फ विवादों से जोड़कर देखना उनकी पूरी कहानी नहीं है।
असल सच यह है कि वह उन निर्माताओं में थे जिन्होंने बॉलीवुड के कमर्शियल सिनेमा को नई पहचान दी। उन्होंने नए कलाकारों को मौका दिया, बड़े सितारों के करियर को दिशा दी और सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में देशभर में बहस छेड़ दी।
हर किसी की राय उनसे अलग हो सकती है, लेकिन भारतीय सिनेमा के इतिहास में उनका नाम हमेशा दर्ज रहेगा।
आखिर आप क्या सोचते हैं?
क्या पहलाज निहलानी को सिर्फ उनके विवादित CBFC कार्यकाल के लिए याद किया जाना चाहिए, या फिर उन फिल्मों और कलाकारों के लिए भी जिन्होंने बॉलीवुड को नई पहचान दी?
अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।
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