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नाना पाटेकर की पूरी कहानी: ₹35 से शुरू हुआ सफर, National Award से Padma Shri तक

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 नाना पाटेकर: भूख से निकली वह आवाज, जिसने भारतीय सिनेमा को हमेशा के लिए बदल दिया “₹35 से स्टार बनने तक…” कुछ कलाकार पर्दे पर किरदार निभाते हैं, कुछ कलाकार किरदार में इस तरह उतर जाते हैं कि दर्शक उन्हें भूल ही नहीं पाता। नाना पाटेकर दूसरी श्रेणी के कलाकार थे। उनकी आंखों में गुस्सा दिखाई देता था, आवाज में एक अलग तरह की खुरदुराहट थी और संवाद बोलने का अंदाज ऐसा कि साधारण-सा वाक्य भी दिल के भीतर उतर जाता था। उन्होंने जब पुलिसवाले का किरदार निभाया तो वह पुलिसवाला सिर्फ पर्दे पर नहीं रहा, जब उन्होंने खलनायक का किरदार निभाया तो वह सिर्फ विलेन नहीं लगे और जब उन्होंने टूटे हुए इंसान की भूमिका की तो दर्शकों को उसमें अपना दर्द दिखाई दिया। लेकिन नाना पाटेकर की असली कहानी कैमरे के सामने शुरू नहीं हुई थी। वह कहानी बहुत पहले शुरू हो चुकी थी—उस समय, जब एक बच्चे को अपने परिवार की मदद करने के लिए स्कूल के बाद मुंबई की सड़कों पर फिल्म पोस्टर पेंट करने पड़ते थे। नाना ने खुद बताया था कि 13 साल की उम्र में वह पोस्टर पेंट करते थे, करीब आठ किलोमीटर पैदल जाते थे और बदले में उन्हें एक वक्त का खाना तथा महीन...

रामानंद सागर की रामायण से जुड़े 15 अनसुने तथ्य: जिनके बारे में आज भी कम लोग जानते हैं, कुछ किस्से तो आपको हैरान कर देंगे

 रामानंद सागर की रामायण से जुड़े 15 अनसुने तथ्य: जिनके बारे में आज भी कम लोग जानते हैं, कुछ किस्से तो आपको हैरान कर देंगे

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रामानंद सागर की रामायण के 15 अनसुने तथ्य 


क्या आप जानते हैं कि जिस रामायण को देखने के लिए कभी भारत की सड़कें खाली हो जाती थीं, उसके राम यानी अरुण गोविल को शुरुआत में भगवान राम के रोल के लिए रिजेक्ट कर दिया गया था?

क्या आप जानते हैं कि सीता का किरदार निभाने वाली दीपिका चिखलिया को कई स्क्रीन टेस्ट देने पड़े थे और रामायण की शूटिंग के दौरान कलाकारों को लोग सचमुच भगवान की तरह पूजने लगे थे?

रामानंद सागर की रामायण सिर्फ एक टीवी सीरियल नहीं थी, बल्कि एक ऐसा सांस्कृतिक अध्याय थी जिसने करोड़ों भारतीयों की भावनाओं को छुआ। 1987 में शुरू हुई यह सीरीज आज भी भारतीय टेलीविजन इतिहास की सबसे प्रभावशाली प्रस्तुतियों में गिनी जाती है।

आइए जानते हैं रामानंद सागर की रामायण से जुड़े 15 ऐसे अनसुने तथ्य, जिनके पीछे छिपी कहानियां आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं।


1. राम के रोल के लिए अरुण गोविल पहली पसंद नहीं थे

आज अरुण गोविल का नाम सुनते ही भगवान राम की छवि सामने आ जाती है। लेकिन कम लोग जानते हैं कि शुरुआत में वे इस किरदार के लिए चयनित नहीं हुए थे।

एक इंटरव्यू में अरुण गोविल ने बताया था कि ऑडिशन के दौरान उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया था। बाद में जब उनका लुक टेस्ट दोबारा हुआ और चेहरे पर मुस्कान के साथ कैमरे के सामने आए, तब रामानंद सागर को लगा कि यही उनके राम हैं।


2. दीपिका चिखलिया को कई स्क्रीन टेस्ट देने पड़े

सीता का किरदार निभाने वाली दीपिका चिखलिया को सीधे रोल नहीं मिला था।

रामानंद सागर चाहते थे कि दर्शक स्क्रीन पर आते ही उन्हें सीता के रूप में स्वीकार कर लें। इसके लिए दीपिका को कई स्क्रीन टेस्ट देने पड़े। आखिरकार उनकी सादगी और चेहरे की मासूमियत ने बाजी मार ली।


3. रामायण सिर्फ 52 एपिसोड की बनने वाली थी

बहुत कम लोग जानते हैं कि रामानंद सागर ने शुरुआत में रामायण को केवल 52 एपिसोड में खत्म करने की योजना बनाई थी।

लेकिन दर्शकों की जबरदस्त मांग के कारण इसे बार-बार बढ़ाया गया और आखिरकार यह 78 एपिसोड तक पहुंची।


4. शूटिंग गुजरात के उमरगांव में हुई थी

रामायण का पूरा संसार मुंबई में नहीं बल्कि गुजरात के उमरगांव में बसाया गया था।

वहीं विशाल सेट बनाए गए थे और कलाकार लंबे समय तक वहीं रहते थे। दीपिका चिखलिया ने एक इंटरव्यू में बताया था कि माहौल किसी बड़े परिवार जैसा था।


5. गांव-गांव से बुलाए जाते थे जूनियर आर्टिस्ट

आज की तरह तब VFX या बड़ी कास्टिंग एजेंसियां नहीं थीं।

जब भी युद्ध या बड़ी भीड़ वाले दृश्य शूट करने होते थे, आसपास के गांवों में ढोल-नगाड़े बजाकर लोगों को बुलाया जाता था। कई स्थानीय लोग रामायण का हिस्सा बने।


6. हर एपिसोड पर लाखों रुपये खर्च होते थे

1980 के दशक में जब टीवी इंडस्ट्री बेहद सीमित थी, तब रामायण अपने समय का सबसे महंगा टीवी शो माना जाता था।

रिपोर्ट्स के अनुसार एक एपिसोड पर लगभग 9 लाख रुपये तक खर्च किए जाते थे, जो उस दौर में बहुत बड़ी रकम थी।


7. रविवार को देश की रफ्तार थम जाती थी

रामायण का प्रसारण रविवार सुबह होता था।

उस समय लोग टीवी के सामने बैठ जाते थे। कई शहरों में सड़कें खाली हो जाती थीं। दुकानें देर से खुलती थीं और बस स्टैंड तक सुनसान नजर आते थे। यह लोकप्रियता भारतीय टीवी इतिहास में लगभग बेजोड़ मानी जाती है।


8. कलाकारों को लोग सचमुच भगवान मानने लगे थे

रामायण की सफलता का सबसे बड़ा असर इसके कलाकारों पर पड़ा।

अरुण गोविल, दीपिका चिखलिया और सुनील लहरी जहां भी जाते, लोग उनके पैर छूते थे। कई लोग उन्हें भगवान राम, सीता और लक्ष्मण का वास्तविक रूप मानने लगे थे।


9. रामायण के कलाकारों ने कई बड़े ऑफर ठुकराए

एक दिलचस्प खुलासा अरुण गोविल ने किया था।

उनके अनुसार रामायण की लोकप्रियता के बाद कई मैगजीन और प्रोडक्शन हाउस कलाकारों को ग्लैमरस फोटोशूट के लिए बड़ी रकम ऑफर कर रहे थे। लेकिन उन्होंने दर्शकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए ऐसे ऑफर स्वीकार नहीं किए।


10. एक सांप के नीचे बैठकर शूट हुआ था वनवास वाला सीन

Behind The Scenes की यह कहानी बेहद दिलचस्प है।

दीपिका चिखलिया ने बताया था कि वनवास के दौरान एक दृश्य की शूटिंग पेड़ के नीचे हो रही थी और उसी पेड़ पर एक बड़ा सांप लटका हुआ था। बाद में टीम को इसकी जानकारी मिली।


11. रामायण 55 से ज्यादा देशों में देखी गई

रामायण सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही।

इसे दुनिया के कई देशों में प्रसारित किया गया और करोड़ों दर्शकों ने देखा। यही वजह है कि इसे भारतीय टेलीविजन की सबसे प्रभावशाली प्रस्तुतियों में गिना जाता है।


12. अशोक कुमार बने थे शो के कथावाचक

बहुत से दर्शकों को यह बात याद भी नहीं होगी।

रामायण के शुरुआती एपिसोड में बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार कथावाचक के रूप में नजर आए थे। उनकी आवाज ने शो को अलग ही गरिमा दी।


13. रविंद्र जैन का संगीत बना शो की आत्मा

अगर रामायण के गीत और बैकग्राउंड स्कोर इतने प्रभावशाली न होते, तो शायद इसका असर भी अलग होता।

संगीतकार रविंद्र जैन ने अपने संगीत से हर दृश्य को भावनात्मक ऊंचाई दी। आज भी रामायण के कई भजन लोगों की जुबान पर हैं।


14. राम बनने के बाद अरुण गोविल का करियर प्रभावित हुआ

यह शायद रामायण से जुड़ा सबसे भावुक सच है।

अरुण गोविल ने खुद स्वीकार किया था कि राम का किरदार इतना लोकप्रिय हो गया कि फिल्म निर्माता उन्हें किसी दूसरे किरदार में स्वीकार करने से हिचकने लगे। इसका असर उनके फिल्मी करियर पर पड़ा।


15. कोविड लॉकडाउन में फिर बना विश्व रिकॉर्ड

2020 के लॉकडाउन के दौरान जब रामायण दोबारा प्रसारित हुई तो नई पीढ़ी ने भी इसे उतना ही प्यार दिया।

दशकों पुराना यह शो फिर चर्चा में आ गया और साबित कर दिया कि अच्छी कहानियां समय की सीमाओं से परे होती हैं।


आखिर रामानंद सागर की रामायण आज भी इतनी खास क्यों है?

तकनीक के लिहाज से देखें तो आज के शो रामायण से कहीं आगे हैं।

लेकिन भावनाओं, श्रद्धा, संगीत, अभिनय और कहानी कहने की कला के मामले में रामानंद सागर की रामायण आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में बसती है।

शायद यही वजह है कि जब भी रामायण की बात होती है, लोगों के मन में सबसे पहले अरुण गोविल, दीपिका चिखलिया, सुनील लहरी और रामानंद सागर की छवि उभर आती है।

यह सिर्फ एक टीवी सीरियल नहीं था, बल्कि एक ऐसा सांस्कृतिक अनुभव था जिसने एक पूरी पीढ़ी को जोड़ दिया।

आपकी राय क्या है?

रामानंद सागर की रामायण से जुड़ा कौन-सा तथ्य आपको सबसे ज्यादा चौंकाने वाला लगा? क्या आपने यह सीरियल पहली बार 1987 में देखा था या लॉकडाउन के दौरान? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।


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