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खतरों के खिलाड़ी सीजन 1 से 15 तक कौन-कौन रहे विनर? देखें पूरी Winners List और हर सीजन की कहानी

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  खतरों के खिलाड़ी सीजन 1 से 15 तक कौन-कौन रहे विनर? देखें पूरी Winners List KKK के सभी विनर्स! एक तरफ आसमान में उड़ता हेलिकॉप्टर, दूसरी तरफ गहराई में गिरता पानी… और बीच में एक सेलिब्रिटी, जिसके सामने सिर्फ दो रास्ते हैं—डर के आगे झुक जाना या फिर डर को पीछे छोड़ देना। यही वह फार्मूला है जिसने ‘खतरों के खिलाड़ी’ को भारतीय टेलीविजन के सबसे चर्चित स्टंट रियलिटी शोज में शामिल किया। लेकिन इस शो की असली कहानी सिर्फ खतरनाक स्टंट की नहीं है। इसके पीछे 15 सीजन की ऐसी यात्रा है, जिसमें कभी एक मॉडल ने बाजी मारी, कभी अभिनेता ने, कभी डांसर ने तो कभी ऐसा नाम ट्रॉफी लेकर गया जिसकी पहचान स्टंट से ज्यादा किसी और क्षेत्र में थी। और सबसे दिलचस्प सवाल आज भी वही है— पहले सीजन की ट्रॉफी किसने जीती थी? अक्षय कुमार के दौर से रोहित शेट्टी के दौर तक कितने चेहरे विनर बने? और सीजन 15 में आखिर किसके नाम होगी ट्रॉफी? यहीं से शुरू होती है ‘खतरों के खिलाड़ी’ की वह कहानी, जिसमें हर सीजन के साथ डर का स्तर बढ़ता गया और विनर का नाम आखिरी स्टंट तक छिपा रहा। आखिर ‘खतरों के खिलाड़ी’ की कहानी शुरू कहां से हुई? स...

कल्याणजी वीरजी शाह: ‘नागिन’ की बीन से ‘डॉन’ तक, ऐसे बनी एक संगीतकार की अमर कहानी

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  कल्याणजी वीरजी शाह: ‘नागिन’ की बीन से ‘डॉन’ तक, ऐसे बनी एक संगीतकार की अमर कहानी ‘नागिन’ से ‘डॉन’ तक! कुछ धुनें सिर्फ कानों तक नहीं पहुंचतीं, वे सीधे यादों में उतर जाती हैं। कल्याणजी वीरजी शाह की बनाई और अपने भाई आनंदजी के साथ रची ऐसी ही धुनें आज भी हिंदी सिनेमा के संगीत प्रेमियों के बीच जिंदा हैं। एक दौर था जब बड़े-बड़े संगीतकारों का बॉलीवुड पर दबदबा था। नौशाद, एस.डी. बर्मन, मदन मोहन, शंकर-जयकिशन और हेमंत कुमार जैसे दिग्गजों के बीच अपनी जगह बनाना किसी नए संगीतकार के लिए आसान नहीं था। लेकिन गुजरात के कच्छ से मुंबई पहुंचे एक परिवार के दो भाइयों ने अपनी अलग पहचान बनाई। इन भाइयों के नाम थे— कल्याणजी वीरजी शाह और आनंदजी वीरजी शाह । कल्याणजी की कहानी खास इसलिए भी है क्योंकि उनका फिल्मी सफर सीधे किसी बड़े स्टूडियो या फिल्मी परिवार से शुरू नहीं हुआ था। उन्होंने पहले संगीतकार के रूप में अपनी पहचान बनाई, एक विदेशी इलेक्ट्रॉनिक वाद्ययंत्र क्लावियोलिन बजाया और फिर उसी प्रयोग ने उन्हें फिल्मी दुनिया में पहचान दिलाई। इसके बाद ‘छलिया’, ‘हिमालय की गोद में’, ‘जब जब फूल खिले’, ‘सरस्वतीचंद्र...