बॉलीवुड के 10 सबसे अंडररेटेड अभिनेता, जिनकी एक्टिंग सुपरस्टार्स पर भारी पड़ती है
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| ACTING KE ASLI SULTAN |
क्या आपने कभी कोई फिल्म देखकर सोचा है कि हीरो तो ठीक था, लेकिन असली जान तो किसी दूसरे अभिनेता ने डाल दी?
बॉलीवुड में ऐसे कई कलाकार हैं जो हर बार स्क्रीन पर आते ही कहानी का स्तर ऊपर उठा देते हैं। उनकी एक्टिंग दर्शकों को याद रहती है, लेकिन जब स्टारडम, बड़े बैनर और करोड़ों की फीस की बात आती है तो अक्सर ये नाम पीछे छूट जाते हैं।
कम लोग जानते हैं कि हिंदी सिनेमा के कुछ सबसे बेहतरीन कलाकार आज भी "कैरेक्टर आर्टिस्ट", "सपोर्टिंग एक्टर" या "वेब सीरीज स्टार" जैसे टैग्स में सीमित हैं। जबकि उनकी प्रतिभा कई बड़े सितारों से कम नहीं है।
आइए जानते हैं बॉलीवुड के उन अंडररेटेड अभिनेताओं के बारे में, जिनकी एक्टिंग ने बार-बार साबित किया कि असली स्टारडम सिर्फ बॉक्स ऑफिस से नहीं, बल्कि कला से भी तय होता है।
आखिर बॉलीवुड में अंडररेटेड अभिनेता किसे कहा जाता है?
अंडररेटेड का मतलब सिर्फ कम लोकप्रिय होना नहीं है।
कई बार कोई अभिनेता आलोचकों से तारीफ पाता है, दर्शकों का प्यार भी मिलता है, लेकिन उसे वह मुख्यधारा की पहचान नहीं मिलती जिसका वह हकदार होता है।
यही वजह है कि आज भी कई शानदार कलाकार बड़े सुपरस्टार्स की छाया में दबे हुए दिखाई देते हैं।
1. जयदीप अहलावत – देर से मिली पहचान, लेकिन हर बार छोड़ी गहरी छाप
अगर पिछले कुछ वर्षों में किसी अभिनेता ने अपने अभिनय से सबसे ज्यादा प्रभावित किया है तो वह जयदीप अहलावत हैं।
फिल्म "गैंग्स ऑफ वासेपुर" में छोटी भूमिका से लेकर "पाताल लोक" तक उनका सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने कई फिल्मों में शानदार काम किया, लेकिन लंबे समय तक उन्हें वह पहचान नहीं मिली जिसके वे हकदार थे। बाद में उनकी गंभीर और सधी हुई एक्टिंग ने दर्शकों को मजबूर कर दिया कि वे उन्हें नोटिस करें।
उनकी खासियत यह है कि वे बिना ज्यादा संवाद बोले भी भावनाएं पहुंचा देते हैं।
आज भले ही उनका नाम ज्यादा चर्चा में रहने लगा हो, लेकिन बॉलीवुड के सबसे अंडररेटेड कलाकारों की सूची में उनका नाम अभी भी शामिल किया जाता है।
2. कुमुद मिश्रा – हर किरदार में घुल जाने वाला कलाकार
कुमुद मिश्रा उन अभिनेताओं में हैं जिनका चेहरा देखते ही दर्शक पहचान लेते हैं, लेकिन नाम बहुत कम लोगों को याद रहता है।
"रॉकस्टार", "सुल्तान", "मुल्क", "एयरलिफ्ट" और कई फिल्मों में उन्होंने ऐसे किरदार निभाए जो कहानी को मजबूत बनाते हैं। फिल्म इंडस्ट्री में वर्षों से सक्रिय रहने के बावजूद उन्हें कभी वह स्टारडम नहीं मिला जो उनकी प्रतिभा के अनुरूप हो।
उनकी सबसे बड़ी ताकत है उनका सहज अभिनय।
वे स्क्रीन पर अभिनय करते नहीं दिखते, बल्कि किरदार बन जाते हैं।
3. संजय मिश्रा – कॉमेडी के पीछे छिपा एक असाधारण अभिनेता
अधिकतर लोग संजय मिश्रा को कॉमेडी रोल्स के लिए जानते हैं।
लेकिन अगर आपने "आंखों देखी", "कड़वी हवा" या "वध" जैसी फिल्में देखी हैं तो आप जानते होंगे कि उनके भीतर कितनी गहराई है।
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) से निकले संजय मिश्रा ने कई बार साबित किया कि वे सिर्फ हास्य कलाकार नहीं बल्कि गंभीर अभिनय के भी उस्ताद हैं। उन्हें "आंखों देखी" और "वध" के लिए फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड भी मिल चुका है।
फिर भी मुख्यधारा की फिल्मों में उन्हें अक्सर सीमित भूमिकाओं तक ही रखा गया।
यही वजह है कि कई फिल्म प्रेमी उन्हें बॉलीवुड का सबसे अंडररेटेड अभिनेता मानते हैं।
4. विजय राज – जिनकी टाइमिंग का जवाब नहीं
"कौवा बिरयानी" वाला सीन आज भी लोगों को याद है।
लेकिन विजय राज सिर्फ कॉमेडी तक सीमित नहीं हैं।
"मॉनसून वेडिंग", "गली बॉय", "लूटकेस" और कई फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय की अलग-अलग परतें दिखाईं। आलोचक अक्सर उनकी संवाद अदायगी और स्क्रीन प्रेजेंस की तारीफ करते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि कई बार वे कुछ मिनटों के रोल में भी पूरी फिल्म का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं।
फिर भी उन्हें शायद ही कभी मुख्य नायक के रूप में बड़े अवसर मिले।
5. पंकज त्रिपाठी – लोकप्रिय होने के बावजूद पूरी तरह सम्मान नहीं मिला?
यह नाम सुनकर कुछ लोग चौंक सकते हैं।
पंकज त्रिपाठी आज देश के सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में गिने जाते हैं। लेकिन कई समीक्षकों और दर्शकों का मानना है कि उनकी प्रतिभा के मुकाबले उन्हें अभी भी मुख्यधारा के बड़े बजट वाले नायक-केंद्रित प्रोजेक्ट्स में उतनी जगह नहीं मिली है।
"गैंग्स ऑफ वासेपुर" से लेकर "मिर्जापुर", "न्यूटन" और "स्त्री" तक उन्होंने हर भूमिका में अलग रंग दिखाया।
उनकी सबसे बड़ी ताकत है सादगी।
वे बिना ओवरएक्टिंग के दर्शकों को अपने किरदार से जोड़ देते हैं।
6. विनीत कुमार सिंह – संघर्ष की मिसाल
विनीत कुमार सिंह का नाम आते ही कई लोगों को "मुक्काबाज़" याद आती है।
कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म के लिए उन्होंने वर्षों तक मेहनत की थी। उन्होंने अभिनय के साथ-साथ लेखन में भी योगदान दिया।
उनके अभिनय की तारीफ हुई, लेकिन वह व्यावसायिक पहचान नहीं मिली जो कई अन्य कलाकारों को मिल जाती है।
आज भी उन्हें बॉलीवुड के सबसे कम आंके गए प्रतिभाशाली अभिनेताओं में गिना जाता है।
7. राजपाल यादव – सिर्फ कॉमेडियन नहीं, उससे कहीं ज्यादा
जब भी राजपाल यादव का नाम आता है, लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।
लेकिन यही उनकी सबसे बड़ी विडंबना भी है।
कॉमेडी में इतनी सफलता मिली कि लोग उनके बाकी अभिनय को भूल गए।
कई फिल्म प्रेमियों का मानना है कि "जंगल", "मैन माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं" और कुछ गंभीर भूमिकाओं में उन्होंने साबित किया कि वे सिर्फ हास्य अभिनेता नहीं हैं।
अगर उन्हें लगातार गंभीर किरदार मिलते, तो शायद उनकी पहचान आज अलग होती।
8. अभय देओल – अलग रास्ता चुनने की कीमत
जब बॉलीवुड में मसाला फिल्मों का दौर चल रहा था, तब अभय देओल अलग तरह की फिल्मों पर दांव लगा रहे थे।
"देव डी", "ओए लकी लकी ओए", "मनोरमा सिक्स फीट अंडर" और "ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा" जैसी फिल्मों ने उन्हें एक अलग पहचान दी।
लेकिन उन्होंने कभी पारंपरिक स्टार सिस्टम का हिस्सा बनने की कोशिश नहीं की।
यही कारण है कि उनकी प्रतिभा की चर्चा तो होती है, लेकिन उन्हें अक्सर उतना बड़ा स्टार नहीं माना जाता जितना उनकी फिल्मोग्राफी डिजर्व करती है।
9. गुलशन देवैया – हर किरदार में नया चेहरा
गुलशन देवैया उन कलाकारों में हैं जो एक ही तरह के रोल करने से बचते हैं।
"हंटरrr", "मर्द को दर्द नहीं होता", "दहाड़" और कई प्रोजेक्ट्स में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए।
उनकी अभिनय क्षमता की इंडस्ट्री में खूब तारीफ होती है, लेकिन बड़े स्तर पर उनकी लोकप्रियता अभी भी सीमित है।
यही उन्हें अंडररेटेड बनाता है।
10. के के मेनन – एक्टिंग स्कूल की तरह हैं उनके किरदार
अगर अभिनय की क्लास लगानी हो तो के के मेनन की फिल्में दिखाई जा सकती हैं।
"ब्लैक फ्राइडे", "हैदर", "स्पेशल ऑप्स" और कई अन्य प्रोजेक्ट्स में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया।
फिर भी उन्हें वह जनप्रिय स्टारडम नहीं मिला जो अक्सर कम प्रतिभाशाली लेकिन ज्यादा लोकप्रिय चेहरों को मिल जाता है।
उनके प्रशंसकों की संख्या बहुत बड़ी है, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में उनका नाम कम सुनाई देता है।
असल सच: स्टारडम और अभिनय हमेशा एक चीज नहीं होते
बॉलीवुड का इतिहास बताता है कि कई बार सबसे बेहतरीन कलाकार सबसे बड़े सितारे नहीं बन पाते।
इसके पीछे मार्केटिंग, बड़े बैनर, बॉक्स ऑफिस राजनीति, दर्शकों की पसंद और समय जैसी कई वजहें होती हैं।
लेकिन अच्छी बात यह है कि OTT प्लेटफॉर्म्स के दौर में अब प्रतिभाशाली कलाकारों को पहले से ज्यादा मौके मिल रहे हैं।
जयदीप अहलावत, पंकज त्रिपाठी, विजय वर्मा, गुलशन देवैया और कई अन्य कलाकार इसका उदाहरण हैं।
निष्कर्ष
बॉलीवुड की चमक-दमक के बीच कुछ चेहरे ऐसे भी हैं जिन्होंने बिना बड़े स्टारडम के सिर्फ अपने अभिनय के दम पर पहचान बनाई।
इन कलाकारों की खास बात यह है कि ये फिल्म में आते ही कहानी को असली बना देते हैं।
शायद यही वजह है कि सालों बाद भी दर्शक इनके किरदारों को याद रखते हैं।
अब सवाल आपसे...
आपके हिसाब से बॉलीवुड का सबसे अंडररेटेड अभिनेता कौन है? क्या आपके पास भी कोई ऐसा नाम है जिसे इस सूची में होना चाहिए था? अपनी राय जरूर बताइए।
