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| ₹700 की नौकरी से बॉलीवुड के सबसे बड़े डायरेक्टर बनने तक | David Dhawan Untold Story |
हिंदी सिनेमा के सबसे सफल कॉमेडी डायरेक्टर्स में गिने जाने वाले David Dhawan ने हाल ही में अपने संघर्ष, करियर और सुपरहिट फिल्मों के पीछे की सोच को लेकर कई बड़े खुलासे किए।
एक इवेंट के दौरान बेटे Varun Dhawan के साथ बातचीत में डेविड धवन ने अपनी जिंदगी के ऐसे किस्से सुनाए, जो शायद ही पहले कभी सामने आए हों।
₹700 की नौकरी से लेकर मुंबई में स्ट्रगल, Govinda और Salman Khan के साथ दोस्ती, और फ्लॉप फिल्मों के बाद टूटने तक… इस बातचीत में डेविड धवन ने अपनी पूरी फिल्मी यात्रा को खुलकर बयान किया।
बहुत कम लोग जानते हैं कि डेविड धवन का असली नाम राजेंद्र धवन है। उन्होंने बताया कि उनका बचपन अगरतला, कोलकाता, लखनऊ और कानपुर जैसे शहरों में बीता।
उन्होंने कहा,
“मेरा एक्चुअल नाम राजेंद्र धवन है। FTII में जाने के बाद मेरे पिता ने कहा कि डेविड नाम ही रखो।”
डेविड नाम पड़ने के पीछे भी दिलचस्प कहानी है। बचपन में वे अपने चाचा-चाची के साथ रहते थे और पड़ोस में एक यहूदी परिवार था। वहीं से उन्हें “डेविड” बुलाया जाने लगा और बाद में यही नाम उनकी पहचान बन गया।
डेविड धवन ने भावुक अंदाज में बताया कि उन्होंने अपनी चाची को ही बचपन में मां समझा था। वे करीब तीन साल की उम्र तक चाचा-चाची के साथ रहे और बाद में अपने असली माता-पिता के पास लौटे।
उन्होंने कहा कि जिंदगी के आखिरी समय तक वे अपनी चाची से मिलने जाते रहे। यही वजह है कि उनके अंदर परिवार को लेकर हमेशा एक अलग भावनात्मक जुड़ाव रहा।
डेविड धवन ने खुलासा किया कि वे स्टेट लेवल क्रिकेट और टेबल टेनिस खेल चुके हैं। उन्हें खुद भी नहीं पता था कि आगे क्या करना है।
उनके बड़े भाई Anil Dhawan जब FTII पहुंचे, तब पहली बार उनके मन में फिल्मों का ख्याल आया। बाद में वे भी FTII पहुंचे, जहां उनके सीनियर्स में Mithun Chakraborty और Shakti Kapoor जैसे कलाकार शामिल थे।
आज करोड़ों की फिल्में बनाने वाले डेविड धवन कभी मुंबई में छोटे से PG में पांच लोगों के साथ रहते थे।
उन्होंने बताया कि वे बॉम्बे टेलीविजन में एडिटर की नौकरी करते थे, जहां 28 दिन के कॉन्ट्रैक्ट पर लगभग ₹700 मिलते थे।
उनके साथ उस समय Rakesh Bedi, Alok Nath और Ravi Baswani जैसे संघर्षरत कलाकार भी आसपास रहते थे।
डेविड धवन ने कहा,
“मैं लोकल ट्रेन पकड़कर काम पर जाता था। स्ट्रगल बहुत था, लेकिन वही असली मजा था।”
डेविड धवन ने माना कि Sunil Dutt ने उनके करियर में सबसे बड़ा रोल निभाया।
फिल्म Naam की एडिटिंग के दौरान दत्त साहब ने उनका काम देखा और कहा,
“तू डायरेक्टर क्यों नहीं बनता?”
इसके बाद संजय दत्त की फिल्म Taaqatwar के लिए उन्हें निर्देशक के रूप में मौका मिला। यहीं से उनकी डायरेक्टर वाली यात्रा शुरू हुई।
Taaqatwar में पहली बार Govinda के साथ काम करते हुए डेविड धवन समझ गए थे कि यह अभिनेता कुछ अलग है।
उन्होंने कहा,
“100% लगा था कि ये लड़का कुछ भी कर सकता है।”
बाद में दोनों ने मिलकर हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार कॉमेडी फिल्मों की लंबी लिस्ट दी।
Coolie No.1, Hero No.1, Saajan Chale Sasural, Deewana Mastana और Aankhen जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड बनाए।
डेविड धवन ने अपनी सुपरहिट फिल्म Shola Aur Shabnam का फॉर्मूला भी पहली बार बताया।
उन्होंने कहा,
“पहला हाफ ‘दिल’ था और सेकंड हाफ ‘घायल’।”
यानि फिल्म का पहला हिस्सा हल्का-फुल्का रोमांटिक और मनोरंजक रखा गया, जबकि इंटरवल के बाद कहानी पूरी तरह एक्शन और इमोशनल मोड में चली जाती थी।
डेविड धवन ने स्वीकार किया कि कुछ फ्लॉप फिल्मों के बाद वे दोबारा एडिटिंग में लौटने का सोच रहे थे।
उन्होंने कहा कि उस दौर में उन्होंने Dil और Ghayal देखी और फिर फैसला किया कि अब ऐसी फिल्म बनानी है जिसमें एंटरटेनमेंट और इमोशन दोनों हों।
यहीं से Shola Aur Shabnam जैसी फिल्म बनी और उनका करियर फिर से पटरी पर लौट आया।
डेविड धवन ने Salman Khan के साथ अपने रिश्ते को “फैमिली बॉन्ड” बताया।
उन्होंने कहा कि Judwaa के दौरान शुरुआत में उन्हें लगा था कि सलमान थोड़ा डिसइंटरेस्टेड हैं, लेकिन धीरे-धीरे दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई।
डेविड ने मजाकिया अंदाज में कहा,
“कई बार मैं खुद जाकर सलमान को उठाता था और शूट पर लेकर आता था।”
दोनों ने साथ में Judwaa, Partner, Maine Pyaar Kyun Kiya जैसी सुपरहिट फिल्में दीं।
आज के फिल्म इंडस्ट्री माहौल पर भी डेविड धवन ने खुलकर बात की।
उन्होंने कहा,
“जिसके हाथ में फोन है, वो भी जर्नलिस्ट बन गया है।”
उनका मानना है कि आज फिल्ममेकर्स खुलकर काम नहीं कर पा रहे क्योंकि हर चीज पर ट्रोलिंग और तुरंत जजमेंट शुरू हो जाता है।
वरुण धवन ने बातचीत के दौरान पूछा कि क्या कभी सफलता के बाद उनमें घमंड आया?
इस पर डेविड धवन ने साफ कहा,
“कभी नहीं।”
हालांकि उनकी पत्नी ने मजाक में कहा कि कामयाबी के दौर में वे इतने बिजी हो गए थे कि परिवार को समय नहीं दे पाते थे।
डेविड धवन ने माना कि Aankhen उनके करियर की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर रही।
उन्होंने निर्माता Pahlaj Nihalani को अपना मेंटर बताया और कहा कि उन्होंने प्रोडक्शन और फिल्ममेकिंग की बहुत बारीकियां उन्हीं से सीखी हैं।
डेविड धवन की यह बातचीत सिर्फ एक सफल निर्देशक की कहानी नहीं थी, बल्कि उस इंसान की कहानी थी जिसने संघर्ष, असफलता, दोस्ती और मेहनत के दम पर बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई।
मुंबई के छोटे PG से लेकर हिंदी सिनेमा के सबसे सफल कॉमेडी डायरेक्टर्स में शामिल होने तक का उनका सफर आज भी नए फिल्ममेकर्स और स्ट्रगलर्स के लिए प्रेरणा है।
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