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भारतीय टेलीविजन की दुनिया में एक समय ऐसा था जब तीखे सवाल, बेबाक बातचीत और शब्दों की शालीनता का दूसरा नाम Shekhar Suman हुआ करते थे। अब करीब 14 साल बाद वह एक बार फिर अपने चर्चित टॉक शो के नए अवतार के साथ लौट रहे हैं। शो के लॉन्च इवेंट में शेखर सुमन ने जो बातें कहीं, उन्होंने साफ कर दिया कि यह सिर्फ एक कमबैक नहीं, बल्कि उनकी “आवाज़” की वापसी है।
इवेंट के दौरान मौजूद लोगों ने इस पल को “ऐतिहासिक” बताया। मंच पर भावुक माहौल था, तालियों की गूंज थी और शेखर सुमन की आंखों में लंबे इंतजार के बाद लौटने की चमक साफ दिखाई दे रही थी।
अपने कमबैक को लेकर शेखर सुमन ने बेहद भावुक शब्दों में कहा:
“14 साल का वनवास काफी लंबा था… और अब मेरे अंदर का राम मुझे अपनी अयोध्या वापस ले आया।”
उनके इस बयान पर पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। उन्होंने कहा कि कुछ चीजें तय समय पर ही होती हैं और अब वक्त आ गया था कि उनकी आवाज फिर लोगों तक पहुंचे।
उन्होंने यह भी कहा कि यह शो उनके लिए सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि जनता से जुड़ने का माध्यम है।
“मैंने हमेशा जनता की आवाज उठाई है। यह शो जनता की आवाज है।”
इवेंट में सबसे ज्यादा चर्चा Adhyayan Suman की भावुक बातों की रही। उन्होंने कहा कि बचपन से अपने पिता का शो देखते आए हैं और आज उसी शो का हिस्सा बनना उनके लिए सपने जैसा है।
अध्ययन ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार सेट पर अपने पिता को काम करते देखा तो वह “फ्रोजन” हो गए थे।
“मैं सिर्फ 20 मिनट उन्हें देखता रहा… और समझ गया कि ये इंसान क्या कर सकता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि शेखर सुमन सिर्फ एक होस्ट नहीं, बल्कि “एक लेगेसी” हैं।
शेखर सुमन ने मंच पर खुलासा किया कि कई लोगों ने इस शो को लेकर उनके लिए दरवाजे बंद कर दिए थे, लेकिन निर्माता Dharmesh Sangani ने उन पर भरोसा जताया।
“एक इंसान था जिसने दरवाजा खोला… उसका नाम है धर्मेश संगानी।”
धर्मेश संगानी ने भी कहा कि शेखर सुमन के पास लोगों से सच्चाई निकलवाने की अनोखी कला है।
उन्होंने कहा:
“अगर आप किसी से प्यार से बात करें, तो वो सच बोलता है… और वो खूबी शेखर जी में है।”
आज के दौर में जहां कई टॉक शो मनोरंजन और गेम्स पर आधारित होते हैं, वहीं शेखर सुमन ने साफ किया कि उनका शो अलग होगा।
“ये हंसने-हंसाने का शो नहीं है… ये जगने-जगाने का शो है।”
उन्होंने कहा कि शो में दिल से निकली बातचीत होगी, सिस्टम की कमियों पर सवाल होंगे और समाज की बुराइयों पर चर्चा होगी।
हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि उनका मकसद किसी सरकार या राजनीतिक पार्टी पर हमला करना नहीं, बल्कि “सही दिशा दिखाना” है।
शेखर सुमन ने खुलासा किया कि शो के शुरुआती मेहमानों में केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि वह ऐसे लोगों को बुलाना चाहते हैं जिन्होंने संघर्ष करके जिंदगी में मुकाम हासिल किया है।
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि शो में सिर्फ बड़े सितारे ही नहीं, बल्कि आम लोग भी नजर आएंगे।
“एक ऑटो रिक्शा वाला भी मेरे लिए उतना ही बड़ा सेलिब्रिटी है जितना कोई सुपरस्टार।”
शेखर सुमन ने बताया कि उन्होंने टीवी या OTT के बजाय YouTube को इसलिए चुना क्योंकि वह किसी के दबाव में काम नहीं करना चाहते।
“मुझे अच्छा नहीं लगता कि कोई मुझे बताए कि क्या बोलना है और क्या नहीं।”
उन्होंने कहा कि आवाज उठाने के लिए स्वतंत्रता जरूरी है और वही इस शो की सबसे बड़ी ताकत होगी।
इवेंट में आज के डिजिटल कंटेंट और वेब शोज में बढ़ती गालियों पर भी सवाल पूछा गया।
इस पर शेखर सुमन ने कहा:
“अच्छा कंटेंट गालियों के बिना भी बन सकता है।”
उन्होंने युवा क्रिएटर्स से अपील की कि वे भाषा की मर्यादा बनाए रखें और “सभ्यता” के दायरे में रहकर भी दमदार कंटेंट बनाया जा सकता है।
कमबैक के साथ-साथ शेखर सुमन ने अपने दूसरे प्रोजेक्ट्स पर भी बात की। उन्होंने बताया कि हाल ही में उन्होंने Sanjay Leela Bhansali की चर्चित सीरीज़ Heeramandi में काम किया है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस साल उनकी चार फिल्में रिलीज होने वाली हैं और वह थिएटर में भी लगातार सक्रिय हैं।
इवेंट में शेखर सुमन ने बताया कि वह एक नाटक में Sahir Ludhianvi का किरदार निभा रहे हैं और जल्द ही Mirza Ghalib पर आधारित नया स्टेज प्रोजेक्ट भी करेंगे।
उन्होंने कहा कि अभिनेता की जिंदगी में मंजिल कभी खत्म नहीं होती।
“लगता है अभी तो शुरुआत हुई है।”
इवेंट के दौरान उनसे मई 2024 में बीजेपी जॉइन करने को लेकर भी सवाल पूछा गया।
इस पर शेखर सुमन ने कहा:
“मैं सिर्फ 24 घंटे के लिए वहां था… मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ और मैं बाहर निकल आया।”
उन्होंने साफ कहा कि वह किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़कर ऐसा शो नहीं कर सकते।
शेखर सुमन ने भरोसा दिलाया कि उनके नए शो में वही पुरानी बेबाकी नजर आएगी जिसके लिए उन्हें जाना जाता है।
“अगर बदलाव लाना है, तो आवाज उठानी होगी।”
उन्होंने कहा कि डर के कारण लोग सवाल पूछना छोड़ देते हैं, लेकिन लोकतंत्र में सवाल सबसे जरूरी चीज है।
90s और 2000s में भारतीय टेलीविजन पर शेखर सुमन का अंदाज़ बिल्कुल अलग था। उनकी भाषा, व्यंग्य, प्रेजेंस ऑफ माइंड और बेबाक सवालों ने उन्हें बाकी होस्ट्स से अलग पहचान दी।
अब जब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट तेजी से बदल रहा है, ऐसे समय में उनका यह कमबैक पुराने दौर की गंभीर बातचीत और शालीन प्रस्तुति की याद दिलाता है।
अगर शो उसी ईमानदारी और तीखेपन के साथ आता है जिसकी झलक लॉन्च इवेंट में दिखी, तो यह भारतीय डिजिटल स्पेस में एक अलग पहचान बना सकता है।
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