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अनुराग कश्यप की फिल्मों से दर्शकों को हमेशा कुछ अलग और असहज सवालों की उम्मीद रहती है। इस बार वह लेकर आए हैं "Bandar", जिसमें बॉबी देओल मुख्य भूमिका में नजर आते हैं। रिलीज से पहले ही फिल्म अपने गंभीर विषय, दमदार ट्रेलर और अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में चर्चा की वजह से सुर्खियों में थी।
"Animal" और "Aashram" के बाद बॉबी देओल के लिए यह फिल्म एक बड़े टेस्ट की तरह है। वहीं, दर्शकों को उम्मीद थी कि अनुराग कश्यप एक बार फिर अपनी पुरानी धार दिखाएंगे। सवाल यही है कि क्या "Bandar" उम्मीदों पर खरी उतरती है?
फिल्म की कहानी समर मेहरा नाम के एक ऐसे कलाकार के इर्द-गिर्द घूमती है जिसकी लोकप्रियता धीरे-धीरे खत्म हो रही है। उसकी जिंदगी तब पूरी तरह बदल जाती है जब उसकी पूर्व प्रेमिका उस पर गंभीर आरोप लगाती है। इसके बाद समर खुद को एक ऐसे कानूनी और सामाजिक संघर्ष में फंसा पाता है, जहां सच, झूठ, प्रतिष्ठा और न्याय की रेखाएं धुंधली होने लगती हैं।
फिल्म सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह समाज, मीडिया ट्रायल और न्याय व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है। अच्छी बात यह है कि कहानी दर्शकों को लगातार सोचने पर मजबूर करती है और आसान जवाब देने की कोशिश नहीं करती।
अगर इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत का नाम लिया जाए तो वह बॉबी देओल हैं। उन्होंने समर के किरदार में दर्द, गुस्सा, असहायता और टूटन को बेहद प्रभावशाली तरीके से दिखाया है। कई समीक्षकों ने इसे उनके करियर की बेहतरीन परफॉर्मेंस में से एक बताया है।
सपना पब्बी, सान्या मल्होत्रा, सबा आजाद, जितेंद्र जोशी और इंद्रजीत सुकुमारन जैसे कलाकार अपनी भूमिकाओं में मजबूत नजर आते हैं। किसी भी किरदार को सिर्फ कहानी आगे बढ़ाने के लिए नहीं रखा गया है। हर कलाकार फिल्म की गंभीरता को बढ़ाने में योगदान देता है।
अनुराग कश्यप का निर्देशन फिल्म की सबसे खास बातों में से एक है। वह कहानी को मसालेदार बनाने के बजाय यथार्थवादी अंदाज में पेश करते हैं। यही वजह है कि फिल्म कई बार असहज महसूस कराती है, लेकिन यही उसका उद्देश्य भी है।
सिनेमैटोग्राफी कहानी के मूड को अच्छी तरह पकड़ती है। जेल, कोर्ट और निजी संघर्ष से जुड़े दृश्य प्रभाव छोड़ते हैं।
बैकग्राउंड स्कोर जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किया गया है और कई दृश्यों में तनाव को बढ़ाता है।
एडिटिंग कुछ जगह थोड़ी धीमी महसूस हो सकती है, लेकिन फिल्म की गंभीर प्रकृति को देखते हुए यह बहुत बड़ी कमी नहीं लगती।
डायलॉग्स प्रभावशाली हैं और कई जगह सोचने पर मजबूर करते हैं।
सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर मिश्रित लेकिन काफी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई दर्शकों ने बॉबी देओल की तारीफ की है और इसे अनुराग कश्यप की मजबूत वापसी बताया है। वहीं कुछ लोगों को फिल्म की गति और गंभीर टोन थोड़ी भारी लगी।
बुकिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी शुरुआती दर्शकों ने एक्टिंग और निर्देशन की जमकर सराहना की है।
"Bandar" कोई पारंपरिक मसाला एंटरटेनर नहीं है। इसलिए इसका प्रदर्शन मुख्य रूप से शहरी दर्शकों, मल्टीप्लेक्स ऑडियंस और कंटेंट पसंद करने वाले फिल्म प्रेमियों पर निर्भर करेगा।
शुरुआती प्रतिक्रिया को देखते हुए फिल्म को अच्छी वर्ड-ऑफ-माउथ मिल सकती है। यदि दर्शकों के बीच चर्चा बनी रहती है तो सप्ताहांत में इसके कलेक्शन में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि सामाजिक और कानूनी सवाल भी उठाती हैं, तो "Bandar" आपके लिए है।
यह फिल्म हर दर्शक के लिए नहीं है। जो लोग हल्की-फुल्की मनोरंजक फिल्में ढूंढ रहे हैं, उन्हें यह थोड़ी भारी लग सकती है। लेकिन गंभीर सिनेमा पसंद करने वालों के लिए यह एक दिलचस्प अनुभव साबित हो सकती है।
"Bandar" एक साहसी और चर्चा पैदा करने वाली फिल्म है। कुछ कमियों के बावजूद यह अपने विषय, अभिनय और निर्देशन की वजह से प्रभाव छोड़ती है। बॉबी देओल का अभिनय फिल्म को एक अलग स्तर पर ले जाता है।
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