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| कंगना रनौत की पूरी कहानी! संघर्ष से संसद तक |
हिमाचल प्रदेश की शांत वादियों से निकलकर मुंबई की चकाचौंध तक का सफर आसान नहीं था। लेकिन अगर नाम कंगना रनौत हो, तो मुश्किल रास्ते भी इतिहास बन जाते हैं।
कंगना रनौत सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं हैं, बल्कि हिंदी सिनेमा की उन चुनिंदा हस्तियों में शामिल हैं जिन्होंने अपनी मेहनत, बेबाकी और दमदार अभिनय के दम पर खुद की अलग पहचान बनाई। जहां एक ओर उन्होंने कई यादगार फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया, वहीं दूसरी ओर अपने बेबाक बयानों और विवादों के कारण भी लगातार सुर्खियों में रहीं।
बॉलीवुड में अक्सर यह कहा जाता है कि बिना किसी फिल्मी परिवार के सफल होना बेहद मुश्किल है। लेकिन कंगना रनौत की कहानी इस धारणा को चुनौती देती है। उन्होंने न केवल अपने दम पर जगह बनाई, बल्कि कई बार पूरे फिल्म उद्योग की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाए।
चार बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने वाली कंगना रनौत आज अभिनय के साथ-साथ फिल्म निर्माण, निर्देशन और सार्वजनिक जीवन में भी सक्रिय हैं। उनका सफर सफलता, संघर्ष, आलोचनाओं, उपलब्धियों और लगातार खुद को साबित करने की कहानी है।
आखिर कैसे एक डॉक्टर बनाने का सपना देखने वाले परिवार की बेटी बॉलीवुड की "क्वीन" बन गई? इस सवाल का जवाब उनकी जिंदगी के हर पड़ाव में छिपा है।
कंगना रनौत का जन्म 23 मार्च 1987 को हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के पास स्थित भांबला (अब सुरजपुर), तहसील जोगिंदरनगर में हुआ। उनका परिवार आर्थिक रूप से स्थिर और शिक्षित माना जाता है।
उनके पिता अमर्दीप रनौत एक व्यवसायी हैं, जबकि उनकी मां आशा रनौत पेशे से शिक्षिका रही हैं। परिवार चाहता था कि कंगना पढ़-लिखकर डॉक्टर बनें। यही वजह थी कि बचपन से उनकी पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया गया।
कंगना की एक बड़ी बहन रंगोली चंदेल हैं, जो बाद में उनकी सबसे करीबी सहयोगी और मैनेजर बनीं। उनका एक छोटा भाई अक्षत रनौत भी है। परिवार में अनुशासन और पारंपरिक सोच का प्रभाव था, लेकिन कंगना का स्वभाव शुरू से ही स्वतंत्र विचारों वाला माना जाता था।
हिमाचल प्रदेश के प्राकृतिक वातावरण में पली-बढ़ीं कंगना बचपन से ही सामान्य बच्चों से कुछ अलग थीं। उन्हें किताबें पढ़ना, लोगों को ध्यान से देखना और अपने आसपास की दुनिया को समझना पसंद था।
स्कूल के दिनों में वे पढ़ाई में ठीक-ठाक थीं, लेकिन उनका मन पारंपरिक करियर की बजाय कुछ रचनात्मक करने में अधिक लगता था। हालांकि परिवार की इच्छा थी कि वे विज्ञान की पढ़ाई करें और आगे चलकर चिकित्सा के क्षेत्र में जाएं।
बताया जाता है कि जब उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी शुरू की, तब उन्हें महसूस हुआ कि उनका मन उस दिशा में नहीं है। यही वह समय था जब उन्होंने अपने जीवन का सबसे बड़ा फैसला लेने का साहस दिखाया।
किशोरावस्था में ही कंगना ने तय कर लिया था कि वे अपने लिए अलग रास्ता चुनेंगी। उन्होंने पारंपरिक करियर छोड़कर मॉडलिंग और अभिनय की दुनिया में जाने का निर्णय लिया।
यह फैसला आसान नहीं था। परिवार शुरुआत में इस निर्णय के पक्ष में नहीं था। सुरक्षित भविष्य छोड़कर मनोरंजन उद्योग में करियर बनाना उस समय एक बड़ा जोखिम माना जाता था।
लेकिन कंगना ने अपने सपनों से समझौता नहीं किया। उन्होंने घर छोड़कर पहले दिल्ली का रुख किया, जहां उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे अभिनय की ओर बढ़ना शुरू किया।
यहीं से शुरू हुआ वह सफर जिसने आगे चलकर हिंदी सिनेमा को एक ऐसी अभिनेत्री दी, जिसे उसकी निडर सोच, दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और यादगार किरदारों के लिए हमेशा याद किया जाएगा।
दिल्ली पहुंचने के बाद कंगना ने मॉडलिंग असाइनमेंट्स किए और अपने व्यक्तित्व को निखारने पर काम किया। इसी दौरान उनकी रुचि थिएटर की ओर बढ़ी।
उन्होंने थिएटर निर्देशक अरविंद गौड़ के साथ काम करने वाली संस्था अस्मिता थिएटर ग्रुप में अभिनय का प्रशिक्षण लिया। मंच पर अभिनय करते हुए उन्होंने संवाद अदायगी, भाव-भंगिमा और किरदार में उतरने की कला सीखी।
यही थिएटर उनके लिए वह स्कूल साबित हुआ, जिसने आगे चलकर कैमरे के सामने उनके आत्मविश्वास की मजबूत नींव रखी।
लेकिन दिल्ली उनके सपनों की अंतिम मंजिल नहीं थी। उन्हें पता था कि अगर फिल्मों में पहचान बनानी है, तो अगला कदम मुंबई ही होगा—एक ऐसा शहर जो हर साल हजारों सपने देखता है, लेकिन उनमें से बहुत कम को मंजिल तक पहुंचा पाता है।
दिल्ली में थिएटर और मॉडलिंग के अनुभव ने कंगना रनौत को यह भरोसा जरूर दे दिया था कि उनके अंदर अभिनय की क्षमता है, लेकिन बॉलीवुड तक पहुंचना अब भी एक लंबा और कठिन सफर था।
करीब 16–17 वर्ष की उम्र में उन्होंने मुंबई का रुख किया। यह वही शहर था जहां हर दिन हजारों लोग अभिनेता बनने का सपना लेकर आते हैं, लेकिन बहुत कम लोग अपनी पहचान बना पाते हैं।
कंगना के लिए भी शुरुआती दिन आसान नहीं थे। न कोई फिल्मी गॉडफादर था, न बड़ा प्रोडक्शन हाउस और न ही इंडस्ट्री में कोई मजबूत पहचान। उनके पास सिर्फ आत्मविश्वास, अभिनय सीखने की इच्छा और कुछ कर दिखाने का जुनून था।
मुंबई में उन्होंने अपने अभिनय को और बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षण लिया। इसी दौरान उनकी मुलाकात कई कास्टिंग डायरेक्टर्स और फिल्म निर्माताओं से हुई। लगातार ऑडिशन देने के बावजूद सफलता तुरंत नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
साल 2006 कंगना रनौत के जीवन का सबसे अहम मोड़ साबित हुआ।
निर्देशक अनुराग बसु की फिल्म Gangster में उन्हें मुख्य अभिनेत्री का अवसर मिला। इस फिल्म का निर्माण महेश भट्ट और मुकेश भट्ट के बैनर विशेष फिल्म्स ने किया था।
फिल्म में कंगना ने सिमरन का किरदार निभाया। उनके साथ इमरान हाशमी और शाइनी आहूजा मुख्य भूमिकाओं में थे।
यह किरदार भावनात्मक रूप से बेहद जटिल था। एक ऐसी युवती, जो प्यार, अपराध और मानसिक संघर्ष के बीच उलझी हुई है। पहली ही फिल्म में इतने चुनौतीपूर्ण किरदार को निभाना किसी नए कलाकार के लिए आसान नहीं माना जाता।
लेकिन कंगना ने अपने शांत चेहरे, गहरी आंखों के भाव और संवादों से दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और समीक्षकों ने भी उनके अभिनय की खुलकर सराहना की।
'Gangster' के लिए कंगना रनौत को Filmfare Award for Best Female Debut से सम्मानित किया गया।
इतना ही नहीं, कई फिल्म समीक्षकों ने उन्हें उस दौर की सबसे प्रभावशाली नई अभिनेत्री बताया।
एक नई कलाकार के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास थी क्योंकि उन्होंने अपनी पहली ही फिल्म से यह साबित कर दिया था कि वे सिर्फ खूबसूरती के दम पर नहीं, बल्कि अभिनय के दम पर आगे बढ़ना चाहती हैं।
'Gangster' की सफलता के बाद कंगना के पास फिल्मों के प्रस्ताव आने लगे।
उन्होंने पारंपरिक ग्लैमरस भूमिकाओं की बजाय ऐसे किरदार चुने जिनमें अभिनय की गुंजाइश ज्यादा थी।
Woh Lamhe (2006) में उन्होंने एक मानसिक और भावनात्मक संघर्ष से गुजर रही अभिनेत्री का किरदार निभाया। इस फिल्म में उनके अभिनय को काफी सराहा गया।
इसके बाद Life in a... Metro (2007) में उन्होंने महानगरों के बदलते रिश्तों और अकेलेपन को बेहद संवेदनशील तरीके से पर्दे पर उतारा।
लगातार अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर उन्होंने यह संदेश दिया कि वे खुद को किसी एक छवि तक सीमित नहीं रखना चाहतीं।
पहली फिल्म सफल होने के बावजूद कंगना का सफर आसान नहीं हुआ।
उनकी कुछ शुरुआती फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकीं। कई बार उन्हें सीमित तरह की भूमिकाएं भी ऑफर हुईं।
उस समय बॉलीवुड में स्थापित अभिनेत्रियों के बीच अपनी अलग जगह बनाना किसी चुनौती से कम नहीं था।
लेकिन कंगना ने हर असफलता को सीख की तरह लिया। वे लगातार अपने अभिनय, भाषा और स्क्रीन प्रेजेंस पर काम करती रहीं।
धीरे-धीरे उन्होंने यह साबित कर दिया कि वे सिर्फ एक फिल्म की सफलता नहीं, बल्कि लंबी रेस की खिलाड़ी हैं।
कंगना रनौत की सबसे बड़ी ताकत उनकी स्वाभाविक अभिनय शैली मानी जाती है।
वे अपने किरदारों में भावनाओं को बेहद नियंत्रित तरीके से पेश करती हैं। जरूरत पड़ने पर उनकी आंखें संवादों से ज्यादा असर छोड़ती हैं।
उनकी आवाज, बॉडी लैंग्वेज और किरदार के अनुसार खुद को बदलने की क्षमता ने उन्हें समकालीन अभिनेत्रियों से अलग पहचान दिलाई।
इसी वजह से फिल्म निर्माता उन्हें चुनौतीपूर्ण और महिला-केंद्रित फिल्मों के लिए उपयुक्त मानने लगे।
2008 से 2013 के बीच कंगना रनौत ने लगातार कई फिल्मों में काम किया।
इस दौरान उन्होंने Fashion, Raaz: The Mystery Continues, Once Upon a Time in Mumbaai, Tanu Weds Manu, Game, Shootout at Wadala और Krrish 3 जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए।
इन फिल्मों ने उनके अनुभव को और मजबूत किया, लेकिन असली बदलाव अभी आना बाकी था।
साल 2014 में रिलीज हुई एक फिल्म ने न सिर्फ उनके करियर की दिशा बदल दी, बल्कि उन्हें हिंदी सिनेमा की सबसे प्रभावशाली अभिनेत्रियों की कतार में खड़ा कर दिया।
वह फिल्म थी—Queen।
यहीं से शुरू हुआ कंगना रनौत के करियर का स्वर्णिम दौर, जिसमें राष्ट्रीय पुरस्कार, महिला-केंद्रित सुपरहिट फिल्में और लगातार नई उपलब्धियां उनका इंतजार कर रही थीं।
साल 2014 कंगना रनौत के करियर का सबसे अहम अध्याय साबित हुआ। इस वर्ष रिलीज हुई निर्देशक विकास बहल की फिल्म Queen ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की, बल्कि कंगना को हिंदी सिनेमा की सबसे दमदार अभिनेत्रियों की पहली कतार में ला खड़ा किया।
फिल्म में उन्होंने रानी मेहरा नाम की एक साधारण दिल्ली की लड़की का किरदार निभाया, जिसकी शादी टूटने के बाद वह अकेले ही अपने हनीमून पर यूरोप निकल जाती है।
यह कहानी सिर्फ एक लड़की की यात्रा नहीं थी, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की कहानी बन गई। दर्शकों ने रानी के किरदार में खुद को महसूस किया और कंगना के अभिनय की जमकर सराहना की।
'Queen' ने यह साबित कर दिया कि किसी बड़े पुरुष सुपरस्टार के बिना भी एक महिला-केंद्रित फिल्म दर्शकों का दिल जीत सकती है।
इस फिल्म के लिए कंगना रनौत को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। यही वह उपलब्धि थी जिसने उन्हें एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री से एक स्थापित कलाकार के रूप में नई पहचान दिलाई।
अगर 'Queen' ने कंगना के अभिनय की गहराई दिखाई, तो 2015 में आई Tanu Weds Manu Returns ने उनकी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया।
इस फिल्म में उन्होंने एक साथ दो बिल्कुल अलग किरदार निभाए—तनुजा (तनु) और कुसुम (दत्तो)।
दोनों पात्रों की भाषा, हाव-भाव, चाल-ढाल और व्यक्तित्व पूरी तरह अलग थे। कंगना ने दोनों किरदारों को इतने प्रभावशाली ढंग से निभाया कि कई दर्शक भूल गए कि दोनों भूमिकाएं एक ही अभिनेत्री ने निभाई हैं।
फिल्म बड़ी व्यावसायिक सफलता साबित हुई और उस समय महिला-केंद्रित फिल्मों में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हुई।
इस प्रदर्शन के लिए कंगना को लगातार दूसरा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री) मिला। लगातार दो वर्षों में राष्ट्रीय पुरस्कार जीतना उनकी अभिनय क्षमता का बड़ा प्रमाण माना गया।
साल 2019 में रिलीज हुई Manikarnika: The Queen of Jhansi कंगना के करियर की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में गिनी जाती है।
इस फिल्म में उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई का किरदार निभाया। तलवारबाजी, घुड़सवारी और युद्ध वाले दृश्यों के लिए उन्होंने विशेष प्रशिक्षण लिया।
फिल्म के निर्माण के दौरान निर्देशन को लेकर भी काफी चर्चा हुई। अंततः फिल्म के निर्देशन का श्रेय राधाकृष्ण जगर्लामुडी (क्रिश) और कंगना रनौत दोनों को दिया गया।
फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया और कंगना के अभिनय को व्यापक सराहना मिली। ऐतिहासिक किरदार को निभाने के उनके प्रयास की विशेष रूप से प्रशंसा की गई।
साल 2020 में आई फिल्म Panga में कंगना ने एक पूर्व राष्ट्रीय स्तर की कबड्डी खिलाड़ी का किरदार निभाया, जो शादी और मातृत्व के बाद दोबारा अपने खेल करियर को शुरू करने का फैसला करती है।
यह फिल्म व्यावसायिक रूप से बहुत बड़ी हिट नहीं रही, लेकिन समीक्षकों ने कंगना के संतुलित और संवेदनशील अभिनय की जमकर तारीफ की।
इस भूमिका के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री) से एक बार फिर सम्मानित किया गया।
साल 2021 में रिलीज हुई Thalaivii में कंगना ने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री और अभिनेत्री जे. जयललिता का किरदार निभाया।
इस भूमिका के लिए उन्होंने अपने शारीरिक रूप में बदलाव किया और लंबे समय तक तैयारी की।
फिल्म को समीक्षकों से मिश्रित प्रतिक्रियाएं मिलीं, लेकिन कंगना के अभिनय की काफी सराहना हुई। कई समीक्षकों ने माना कि उन्होंने जयललिता के व्यक्तित्व के अलग-अलग चरणों को प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारा।
कंगना रनौत ने अभिनय के साथ-साथ निर्देशन और निर्माण में भी कदम रखा।
उनकी फिल्म Emergency में उन्होंने भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की भूमिका निभाई। इस फिल्म का निर्देशन भी उन्होंने किया।
फिल्म की रिलीज से पहले सेंसर प्रक्रिया और अन्य कारणों से इसमें देरी हुई, जिसके चलते यह लंबे समय तक चर्चा में रही। रिलीज के बाद फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से मिश्रित प्रतिक्रियाएं मिलीं, लेकिन कंगना के अभिनय और निर्देशन की गंभीरता पर व्यापक चर्चा हुई।
कंगना रनौत हिंदी सिनेमा की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में शामिल हैं जिन्हें कई बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
उनकी प्रमुख राष्ट्रीय सम्मान उपलब्धियां इस प्रकार हैं—
इन पुरस्कारों ने यह स्थापित किया कि कंगना सिर्फ लोकप्रिय स्टार ही नहीं, बल्कि गंभीर अभिनय क्षमता वाली कलाकार भी हैं।
कंगना रनौत की अभिनय शैली पारंपरिक बॉलीवुड प्रस्तुति से अलग मानी जाती है।
वे अपने किरदारों को बाहरी ग्लैमर से ज्यादा भावनात्मक गहराई देने की कोशिश करती हैं। संवाद बोलने का उनका तरीका, चेहरे के सूक्ष्म भाव और किरदार के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता उन्हें अलग पहचान देती है।
यही कारण है कि वे रोमांटिक, ऐतिहासिक, कॉमेडी, बायोपिक और महिला-केंद्रित फिल्मों जैसे अलग-अलग शैलियों में सहज दिखाई देती हैं।
अभिनय के अलावा कंगना सार्वजनिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी खुलकर अपनी राय रखती रही हैं।
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने हिमाचल प्रदेश की मंडी संसदीय सीट से चुनाव लड़ा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार के रूप में उन्होंने चुनाव जीता और पहली बार लोकसभा सदस्य बनीं।
फिल्मों से संसद तक का यह सफर उनके सार्वजनिक जीवन का एक नया अध्याय माना जाता है। अभिनय के साथ-साथ अब वे राजनीतिक जिम्मेदारियां भी निभा रही हैं।
कंगना रनौत की निजी जिंदगी हमेशा मीडिया और दर्शकों की दिलचस्पी का विषय रही है। हालांकि उन्होंने अपने निजी जीवन के कई पहलुओं पर सार्वजनिक रूप से बात की है, लेकिन वे अपनी व्यक्तिगत सीमाओं को लेकर भी स्पष्ट रही हैं।
अब तक कंगना रनौत ने शादी नहीं की है। विभिन्न समय पर उनका नाम फिल्म इंडस्ट्री के कुछ अभिनेताओं और कलाकारों के साथ जोड़ा गया, लेकिन इनमें से कई बातें मीडिया रिपोर्ट्स और सार्वजनिक चर्चाओं का हिस्सा रहीं। कंगना ने भी समय-समय पर अपने कुछ रिश्तों के बारे में इंटरव्यू में खुलकर बात की, जबकि कई मामलों पर उन्होंने कानूनी और सार्वजनिक स्तर पर अपनी बात रखी।
वर्तमान में उनका मुख्य फोकस अभिनय, फिल्म निर्माण, राजनीति और सार्वजनिक जीवन पर है।
कंगना रनौत का नाम बॉलीवुड की सबसे बेबाक हस्तियों में लिया जाता है। उन्होंने कई मौकों पर फिल्म इंडस्ट्री, भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म), फिल्म माफिया, कार्य संस्कृति और अन्य सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी है।
उनके कई बयान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने। कुछ मामलों में उन्हें समर्थन मिला, तो कुछ पर तीखी आलोचना भी हुई।
अभिनेता ऋतिक रोशन के साथ सार्वजनिक विवाद, सोशल मीडिया पर उनके बयान, तथा महाराष्ट्र सरकार और कुछ राजनीतिक नेताओं के साथ मतभेद जैसे मुद्दे लंबे समय तक सुर्खियों में रहे। इन मामलों पर संबंधित पक्षों ने समय-समय पर अपनी-अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखी और कई मामलों में कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई गई।
इन विवादों के बावजूद कंगना लगातार फिल्मों और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय बनी रहीं।
कंगना रनौत हिंदी फिल्म उद्योग की सफल अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। विभिन्न विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति का अनुमान कई दर्जन करोड़ रुपये के स्तर पर लगाया जाता है। हालांकि उनकी वास्तविक संपत्ति समय के साथ बदल सकती है और इसकी आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
फिल्मों के अलावा उनकी आय के प्रमुख स्रोत हैं—
कंगना मुंबई के अलावा हिमाचल प्रदेश में भी संपत्ति रखती हैं। वे अक्सर अपने पैतृक राज्य हिमाचल प्रदेश में समय बिताती हैं और वहां की संस्कृति व प्रकृति से अपने जुड़ाव का उल्लेख करती रही हैं।
आज कंगना रनौत अभिनय, राजनीति और फिल्म निर्माण—तीनों क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
लोकसभा सदस्य के रूप में वे अपने संसदीय दायित्व निभा रही हैं। साथ ही फिल्मी परियोजनाओं और रचनात्मक कार्यों पर भी काम कर रही हैं।
लगभग दो दशकों के करियर में उन्होंने यह साबित किया है कि सफलता केवल बड़े फिल्मी परिवार से आने वालों तक सीमित नहीं है। प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर भी बॉलीवुड में मजबूत पहचान बनाई जा सकती है।
कंगना रनौत की कहानी सिर्फ एक अभिनेत्री की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि अपने फैसलों पर अडिग रहने की कहानी भी है।
हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से कस्बे से निकलकर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री, फिल्म निर्माता, निर्देशक और फिर लोकसभा सांसद बनने तक का उनका सफर कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा।
उनकी यात्रा में संघर्ष भी हैं, सफलता भी है, विवाद भी हैं और उपलब्धियां भी। यही कारण है कि कंगना रनौत भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित और प्रभावशाली हस्तियों में गिनी जाती हैं।
आने वाले वर्षों में वे फिल्मों और सार्वजनिक जीवन में किस तरह की नई भूमिका निभाती हैं, इस पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी।
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