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| Sonu Sood Birthday Special 2026 |
बॉलीवुड में कई सितारे पर्दे पर हीरो बनते हैं, लेकिन कुछ ही ऐसे होते हैं जो असल जिंदगी में भी लोगों के दिलों पर राज करते हैं। सोनू सूद उन्हीं चुनिंदा कलाकारों में शामिल हैं।
30 जुलाई को जन्मे सोनू सूद आज सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए उम्मीद का दूसरा नाम हैं। कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने जिस तरह हजारों प्रवासी मजदूरों, छात्रों, मरीजों और जरूरतमंदों की मदद की, उसने उन्हें "रियल लाइफ हीरो" बना दिया। उनकी सामाजिक पहलें आज भी जारी हैं।
आज सोनू सूद अपना 53वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनका जन्म 30 जुलाई 1973 को पंजाब के मोगा में हुआ था। अभिनय में आने से पहले उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और फिर अपने सपनों को पूरा करने मुंबई का रुख किया।
सोनू सूद का जन्म पंजाब के मोगा में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ।
उनकी मां प्रोफेसर थीं जबकि पिता कपड़े के व्यवसाय से जुड़े थे। परिवार चाहता था कि बेटा पढ़-लिखकर एक सफल इंजीनियर बने।
सोनू ने नागपुर के यशवंतराव चव्हाण कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही उनके मन में मॉडलिंग और अभिनय का सपना जन्म ले चुका था।
इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद सोनू सूद बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के मुंबई पहुंचे।
शुरुआत आसान नहीं थी।
लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
उनकी लंबी कद-काठी, दमदार व्यक्तित्व और मेहनत ने धीरे-धीरे इंडस्ट्री का ध्यान खींचना शुरू किया।
सोनू सूद ने अपने करियर की शुरुआत तमिल फिल्मों से की।
इसके बाद उन्होंने तेलुगु फिल्मों में भी काम किया और वहां मजबूत पहचान बनाई। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और प्रभावशाली अभिनय ने उन्हें बड़े निर्देशकों की पसंद बना दिया।
हिंदी फिल्मों में आने के बाद सोनू सूद ने कई यादगार भूमिकाएं निभाईं।
उनकी प्रमुख फिल्मों में शामिल हैं—
इन फिल्मों में उन्होंने ज्यादातर निगेटिव या दमदार सपोर्टिंग किरदार निभाए और दर्शकों का दिल जीत लिया।
तेलुगु फिल्म अरुंधति में निभाए गए उनके किरदार को आज भी याद किया जाता है। इसके बाद दबंग में छेदी सिंह के रोल ने उन्हें पूरे देश में नई पहचान दिलाई। इस फिल्म के लिए उन्हें कई पुरस्कार भी मिले।
साल 2020 ने सोनू सूद की जिंदगी बदल दी।
जब देशभर में लॉकडाउन लगा और लाखों प्रवासी मजदूर अपने घर नहीं जा पा रहे थे, तब सोनू सूद मदद के लिए आगे आए।
उन्होंने—
उनके इस काम ने उन्हें सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में सम्मान दिलाया।
सोनू सूद ने अपनी आत्मकथा I Am No Messiah में लिखा कि उन्होंने जो किया, वह केवल इंसानियत के नाते किया।
उनका मानना है कि यदि किसी के पास मदद करने की क्षमता है, तो उसे आगे बढ़कर ऐसा करना चाहिए।
अभिनेता के रूप में सफलता के बाद सोनू सूद ने निर्देशन की दुनिया में भी कदम रखा।
उन्होंने एक्शन फिल्म Fateh का निर्देशन किया और इसमें मुख्य भूमिका भी निभाई। फिल्म साइबर अपराध जैसे समकालीन विषय पर आधारित थी और उनके करियर का नया अध्याय बनी।
कोरोना काल खत्म होने के बाद भी सोनू सूद ने अपने सामाजिक कार्य नहीं रोके।
वे लगातार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और जरूरतमंद लोगों की सहायता से जुड़े अभियानों में सक्रिय हैं। हाल ही में राजनीति में आने की चर्चाओं पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि लोगों की सेवा ही उनके लिए सबसे बड़ा काम है।
सोनू सूद कई बार सामाजिक और सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखते हैं।
हाल के दिनों में उन्होंने युवाओं के बारे में की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों का विरोध करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में बोलते समय शब्दों का चयन बेहद सोच-समझकर करना चाहिए।
सोनू सूद ने सोनाली सूद से विवाह किया। दोनों के दो बेटे हैं और अभिनेता हमेशा अपने परिवार को निजी जीवन से दूर रखना पसंद करते हैं।
सोनू सूद की कहानी सिर्फ एक अभिनेता की सफलता की कहानी नहीं है। यह उस इंसान की कहानी है जिसने संघर्ष से स्टारडम हासिल किया और फिर अपनी लोकप्रियता को समाज की सेवा में लगा दिया।
आज उनके जन्मदिन पर यही कहा जा सकता है कि पर्दे पर चाहे उन्होंने कई बार विलेन का किरदार निभाया हो, लेकिन असल जिंदगी में वे करोड़ों लोगों के लिए हमेशा हीरो रहेंगे।
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