खतरों के खिलाड़ी सीजन 1 से 15 तक कौन-कौन रहे विनर? देखें पूरी Winners List और हर सीजन की कहानी
![]() |
| Ohh My Dog Movie Review में पंकज त्रिपाठी और माही राय |
कुछ फिल्में सिनेमाघर से बाहर निकलने के बाद याद नहीं रहतीं, लेकिन कुछ फिल्में दिल में एक छोटा-सा कोना बना लेती हैं। Ohh My Dog इसी दूसरी श्रेणी की फिल्म है।
अमित राय के निर्देशन में बनी यह फिल्म इंसान और कुत्ते के बीच उस रिश्ते को सामने लाती है, जिसमें भाषा की जरूरत नहीं होती। बस भरोसा, प्यार और वफादारी काफी होती है।
फिल्म में पंकज त्रिपाठी के साथ माही राय, पवन मल्होत्रा, राजेश कुमार, गीता अग्रवाल शर्मा, विजय मिश्रा और कई कलाकार नजर आते हैं। लेकिन इस कहानी के असली सितारे इंसान नहीं, बल्कि फिल्म के कुत्ते हैं।
और यही इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबसूरती भी है।
कहानी दो अलग-अलग जगहों और दो बेहद खास रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है।
असम में एक बच्चा अपने प्यारे कुत्ते मोमो से बेहद जुड़ा हुआ है। लेकिन अचानक मोमो गायब हो जाता है। परिवार पुलिस से मदद मांगता है, मगर हालात उम्मीद के मुताबिक नहीं बदलते।
दूसरी तरफ बिहार में ऑस्कर नाम का कुत्ता अपने मालिक के गायब होने के बाद उसकी तलाश में जुट जाता है।
यहीं से फिल्म की कहानी सिर्फ एक बच्चे और उसके पालतू जानवर की कहानी नहीं रह जाती। यह वफादारी, हिम्मत, इंसानियत और अपने किसी खास को खो देने के डर की कहानी बन जाती है।
फिल्म की दोनों समानांतर कहानियां धीरे-धीरे एक-दूसरे से जुड़ती हैं और दर्शक को एक भावनात्मक सफर पर ले जाती हैं।
कहानी का विचार दिलचस्प है और बच्चों के साथ-साथ परिवार के लिए भी इसे आसानी से समझा जा सकता है।
हालांकि कुछ जगहों पर पटकथा जरूरत से ज्यादा खिंचती महसूस होती है। करीब ढाई घंटे की लंबाई फिल्म की सबसे बड़ी कमियों में से एक है। शुरुआती प्रतिक्रियाओं में भी कुछ दर्शकों ने महसूस किया कि कुछ दृश्यों को छोटा किया जा सकता था।
माही राय के लिए यह फिल्म खास है और उन्होंने अपने किरदार को काफी आत्मविश्वास के साथ निभाया है।
उनके किरदार में मासूमियत भी है और अपने कुत्ते को खोजने की जिद भी। यही भाव फिल्म को भावनात्मक आधार देता है।
पंकज त्रिपाठी फिल्म में बहुत बड़ी भूमिका में नहीं हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी कहानी को मजबूती देती है।
उनका अंदाज यहां भी सहज और अपनापन लिए हुए है। वह जब स्क्रीन पर आते हैं तो फिल्म का भावनात्मक पक्ष और मजबूत हो जाता है।
खास बात यह है कि पंकज त्रिपाठी ने फिल्म के विषय पर भरोसा करते हुए यह भूमिका स्वीकार की। निर्देशक अमित राय के मुताबिक अभिनेता ने इस फिल्म के लिए फीस भी नहीं ली थी।
पवन मल्होत्रा अपनी स्क्रीन मौजूदगी से प्रभावित करते हैं। राजेश कुमार और विजय मिश्रा भी कहानी में अपना असर छोड़ते हैं।
गीता अग्रवाल शर्मा सहित सहायक कलाकारों ने कहानी को जमीन से जोड़े रखा है। शुरुआती समीक्षाओं में भी कलाकारों के अभिनय को फिल्म की खूबियों में गिना गया है।
लेकिन एक बात साफ है—ऑस्कर का किरदार निभाने वाला ब्रूनो इंसानी कलाकारों पर भारी पड़ता है।
उसकी मासूमियत और बहादुरी फिल्म का सबसे प्यारा हिस्सा है।
अमित राय ने एक ऐसी कहानी को पर्दे पर उतारने की कोशिश की है जिसमें कुत्ते सिर्फ पृष्ठभूमि में नहीं हैं, बल्कि कहानी के प्रमुख किरदार हैं।
यह आसान काम नहीं था।
खासकर कुत्तों से भावनात्मक और एक्शन वाले दृश्यों को विश्वसनीय तरीके से करवाना फिल्म की बड़ी उपलब्धि है। कुछ दृश्यों में दर्शक सचमुच ऑस्कर के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं।
फिर भी पटकथा थोड़ी और चुस्त होती तो फिल्म का प्रभाव कहीं ज्यादा मजबूत हो सकता था।
अमन पंत का संगीत फिल्म की सबसे बड़ी खासियत नहीं बन पाता।
इसके मुकाबले मंगेश धाकड़े का पृष्ठभूमि संगीत कहानी के तनाव और भावनात्मक दृश्यों को बेहतर तरीके से संभालता है।
मेटे हर्बाई की सिनेमैटोग्राफी फिल्म का मजबूत पक्ष है।
असम और बिहार के लोकेशन को खूबसूरती से कैमरे में कैद किया गया है। कुछ दृश्यों में कुत्ते के दृष्टिकोण से शूटिंग कहानी में तनाव पैदा करती है।
यहीं फिल्म थोड़ी कमजोर पड़ती है।
कहानी के कुछ हिस्से और छोटे किए जा सकते थे। समानांतर कहानियों के कारण कुछ जगह गति धीमी महसूस होती है।
यानी फिल्म खराब तरीके से संपादित नहीं है, लेकिन थोड़ी और कसावट इसे बेहतर बना सकती थी।
रिलीज के दिन सामने आई शुरुआती सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं का रुझान फिल्म के पक्ष में दिखाई दे रहा है।
दर्शकों ने इसे बच्चों और परिवार के साथ देखने लायक भावुक फिल्म बताया है। खासतौर पर कुत्तों से प्यार करने वाले दर्शकों को फिल्म का भावनात्मक पक्ष पसंद आ रहा है।
पंकज त्रिपाठी और माही राय के अभिनय की तारीफ के साथ-साथ ब्रूनो यानी ऑस्कर को सबसे ज्यादा प्यार मिल रहा है।
दर्शकों ने इस बात को भी पसंद किया है कि फिल्म में असली कुत्तों की मौजूदगी कहानी को ज्यादा स्वाभाविक बनाती है। हालांकि कुछ शुरुआती प्रतिक्रियाओं में ढाई घंटे की लंबाई और कुछ धीमे हिस्सों पर सवाल भी उठे हैं।
यानी शुरुआती प्रतिक्रिया सकारात्मक है, लेकिन पूरी तरह एकतरफा नहीं।
यहां फिल्म के लिए सबसे बड़ी चुनौती कहानी नहीं, बल्कि स्क्रीन और प्रतिस्पर्धा है।
फिल्म की रिलीज पहले 31 जुलाई के लिए तय थी, लेकिन स्क्रीन की कमी और बड़े रिलीज से टकराव को देखते हुए इसे 7 अगस्त तक आगे बढ़ाया गया।
यही वजह है कि फिल्म के शुरुआती कारोबार को लेकर बहुत बड़े आंकड़ों की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।
फिल्म का मुख्य दर्शक वर्ग परिवार, बच्चे और पालतू जानवरों से प्यार करने वाले लोग हैं। अगर शनिवार और रविवार को दर्शकों की संख्या बढ़ती है और अच्छी मौखिक प्रतिक्रिया मिलती है, तो फिल्म अपनी शुरुआती स्थिति से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।
लेकिन बड़े सितारों वाली व्यावसायिक फिल्मों की तरह इसका कारोबार सिर्फ स्टार पावर पर निर्भर नहीं है।
Ohh My Dog की असली ताकत दर्शकों की भावनात्मक प्रतिक्रिया होगी।
अभी रिलीज का पहला दिन ही है, इसलिए बॉक्स ऑफिस के अंतिम रुझान पर फैसला देना जल्दबाजी होगी।
अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जिनमें भावनाएं, परिवार, बच्चे और जानवरों के साथ जुड़ाव हो, तो Ohh My Dog को मौका दिया जा सकता है।
यह कोई परफेक्ट फिल्म नहीं है।
कहानी कुछ जगहों पर खिंचती है, संगीत बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ता और कुछ घटनाक्रम पूरी तरह विश्वसनीय नहीं लगते।
लेकिन फिल्म का दिल सही जगह पर है।
सबसे अच्छी बात यह है कि फिल्म बच्चों को सिर्फ मनोरंजन नहीं देती, बल्कि जानवरों के प्रति संवेदनशीलता और वफादारी का भाव भी पैदा करती है।
और जब ऑस्कर स्क्रीन पर आता है, तो कई बार इंसानी कलाकार भी पीछे छूट जाते हैं।
Ohh My Dog एक प्यारी, भावुक और परिवार के साथ देखी जा सकने वाली फिल्म है।
अगर आप तेज-तर्रार एक्शन या लगातार रोमांच की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो फिल्म की धीमी गति आपको परेशान कर सकती है।
लेकिन अगर आप दिल को छू लेने वाली कहानी और इंसान-कुत्ते के रिश्ते पर बनी एक साफ-सुथरी फिल्म देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी।
⭐ Rating: 3/5
किसके लिए: परिवार, बच्चे और डॉग लवर्स
सबसे बड़ा प्लस: ऑस्कर/ब्रूनो और भावनात्मक कहानी
सबसे बड़ी कमी: लंबी अवधि और कुछ खिंचे हुए हिस्से
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें