ईशा कोप्पिकर की पूरी कहानी: ‘खल्लास गर्ल’ का संघर्ष, करियर, शादी, तलाक और नई शुरुआत
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| ₹4 से शुरू हुआ था रिश्ता, फिर बना इतिहास! |
कभी किसी फिल्म की शुरुआत सिर्फ एक कहानी से होती है, कभी किसी स्टार के भरोसे से और कभी महज कुछ रुपयों से। लेकिन ‘घायल’ की कहानी इन तीनों से कहीं ज्यादा दिलचस्प है।
एक तरफ नए निर्देशक राजकुमार संतोषी थे, जिन्हें इंडस्ट्री में बहुत कम लोग जानते थे। दूसरी तरफ उस दौर के बड़े स्टार सनी देओल थे, जिनके बारे में मशहूर था कि वह चुनिंदा और स्थापित निर्देशकों के साथ ही काम करते हैं।
फिर भी सनी ने एक अनजान निर्देशक की कहानी सुनी और तुरंत हामी भर दी।
और दिलचस्प बात ये है कि जब फिल्म के लिए सनी देओल को साइन किया गया, तब उनकी साइनिंग अमाउंट सिर्फ ₹4 थी।
आज वही घायल, दामिनी और घातक हिंदी सिनेमा में सनी देओल और राजकुमार संतोषी की सबसे यादगार साझेदारियों में गिनी जाती हैं। हाल ही में दोनों ने इन फिल्मों से जुड़े कई ऐसे किस्से साझा किए, जो शायद पर्दे के पीछे ही रह जाते अगर वे खुद न बताते।
राजकुमार संतोषी के मुताबिक, घायल की कहानी लिखने के बाद फिल्म के निर्माता पी. सुब्बाराव इसे बनाने की तैयारी कर रहे थे। फिल्म में उस समय मिथुन चक्रवर्ती, संजय दत्त और गोविंदा में से किसी एक को लेने की बात हुई थी।
लेकिन संतोषी को लगा कि उनकी कहानी के लिए ये कास्टिंग सही नहीं होगी।
उन्होंने सनी देओल का नाम लिया।
उस समय सनी देओल के बारे में इंडस्ट्री में यह धारणा थी कि वह नए निर्देशकों के साथ आसानी से काम नहीं करते। उनके साथ काम करने वाले निर्देशकों में शेखर कपूर, राहुल रवैल और रमेश सिप्पी जैसे नाम शामिल थे।
लेकिन संतोषी ने सनी को कहानी सुनाई और सनी को कहानी पसंद आ गई।
सबसे बड़ी बात यह थी कि दोनों एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से जानते तक नहीं थे।
संतोषी ने बताया कि सनी ने एक अनजान निर्देशक पर भरोसा किया और यही भरोसा आगे चलकर उनकी लंबी दोस्ती और सफल फिल्मी साझेदारी की नींव बना।
कहानी पसंद आने के बाद भी फिल्म का सफर आसान नहीं था।
निर्माता आर्थिक मुश्किलों में फंस गया और प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया। इसी दौरान संतोषी सनी से मिलने पहुंचे। उस समय सनी पाप की दुनिया की शूटिंग कर रहे थे।
मसला फीस का था।
निर्माता सनी की मांग के मुताबिक पूरी रकम देने की स्थिति में नहीं था। वह कम पैसे देने और फिल्म हिट होने के बाद बाकी रकम देने की बात कर रहा था।
संतोषी के लिए यह बेहद मुश्किल स्थिति थी, क्योंकि वह सनी के दोस्त नहीं थे। वह उनके सामने सिर्फ एक नए निर्देशक के तौर पर खड़े थे।
लेकिन सनी ने संतोषी की बात पर भरोसा किया।
राजकुमार संतोषी के मुताबिक, सनी ने कहा कि अगर फिल्म चलती है तो बाद में बाकी रकम दी जा सकती है।
इसके बाद मामला फिर अटक गया।
और यहीं से कहानी में सबसे बड़ा मोड़ आया।
जब कोई निर्माता आगे नहीं आया तो सनी देओल ने संतोषी से कहा कि अगर कोई समस्या है तो वह खुद फिल्म प्रोड्यूस कर सकते हैं।
संतोषी ने उनसे पूछा कि उन्हें साइनिंग अमाउंट कितना मिला है।
जवाब था—₹4।
यह सुनकर सनी हंस पड़े, लेकिन बात मजाक तक सीमित नहीं रही। उन्होंने फिल्म को आगे बढ़ाने का फैसला किया।
बाद में संतोषी और सनी, धर्मेंद्र से मिलने पहुंचे।
उस समय धर्मेंद्र राजस्थान में बंटवारा की शूटिंग कर रहे थे। संतोषी के लिए यह मुलाकात बेहद नर्वस करने वाली थी। सामने बॉलीवुड के बड़े सितारे धर्मेंद्र थे और वह पहली बार उनसे आमने-सामने बात करने जा रहे थे।
लेकिन धर्मेंद्र ने कहानी ध्यान से सुनी।
कहानी पसंद आई और उन्होंने फैसला किया कि फिल्म को वह प्रोड्यूस करेंगे।
इस तरह घायल का रास्ता साफ हुआ।
एक दिलचस्प बात यह भी सामने आई कि घायल के शुरुआती कास्टिंग प्लान में सनी देओल के साथ श्रीदेवी को लेने का विचार था।
राजकुमार संतोषी ने बताया कि उन्होंने श्रीदेवी से मुलाकात भी की थी, लेकिन उनके व्यस्त शेड्यूल की वजह से डेट्स मैच नहीं हो पाईं।
इसके बाद मीनाक्षी शेषाद्रि फिल्म का हिस्सा बनीं।
और यही जोड़ी आगे चलकर दामिनी और घातक जैसी फिल्मों से भी जुड़ी।
घायल में सनी देओल ने एक बॉक्सर का किरदार निभाया था।
सनी ने बताया कि वह पहले से ही शारीरिक रूप से फिट रहने के आदी थे और स्पोर्ट्स उनकी जिंदगी का हिस्सा रहा था। लेकिन इस किरदार के लिए उन्हें अपने शरीर को बॉक्सर के हिसाब से तैयार करना था।
उन्होंने बताया कि वह सुबह करीब 4 बजे ट्रेनर को मुंबई से बुलाते थे और करीब 5 बजे ट्रेनिंग शुरू कर देते थे।
आज के दौर में जहां फिल्मों के लिए बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन की खूब चर्चा होती है, सनी के मुताबिक उस समय वह इसे अलग से प्रचारित करने वाली चीज नहीं मानते थे।
उनके लिए यह किरदार की जरूरत थी और वह जरूरत पूरी करनी थी।
घायल के सबसे यादगार एक्शन सीन्स में से एक वह था जिसमें सनी देओल तेज रफ्तार ट्रक के सामने दौड़ते दिखाई देते हैं।
राजकुमार संतोषी ने बताया कि इस सीन की शूटिंग बेहद जोखिम भरी थी।
सड़क पर पानी डाला गया था। ट्रक तेज रफ्तार से आ रहा था और सनी उसके बेहद करीब दौड़ रहे थे। आखिरी पल में उन्हें एक पाइप जैसे पोल को पकड़कर साइड में हटना था।
संतोषी आज पीछे मुड़कर उस सीन को देखते हैं तो उन्हें खुद डर लगता है कि आखिर उस वक्त उन्होंने ऐसा जोखिम लिया कैसे।
उन्होंने माना कि अगर सनी का पैर फिसल जाता तो हादसा बेहद गंभीर हो सकता था।
लेकिन उस दौर के जोश और जुनून में उन्होंने खतरे के बारे में उतना नहीं सोचा।
घायल का एक बेहद मशहूर पोस्टर और सीन वह है जिसमें कई पुलिसकर्मी सनी देओल को पकड़ने की कोशिश करते नजर आते हैं।
राजकुमार संतोषी ने बताया कि उन्होंने लगभग 15-20 पुलिसवालों को निर्देश दिया था कि सनी को सिर्फ अभिनेता समझकर पकड़ना नहीं है, बल्कि पूरी ताकत लगानी है।
दूसरी तरफ सनी भी पूरी ताकत से खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रहे थे।
कई बार पुलिसकर्मी सनी की ताकत रोक नहीं पाते थे और उन्हें छोड़ना पड़ जाता था।
यही वजह थी कि स्क्रीन पर वह सीन इतना वास्तविक दिखाई दिया।
संतोषी के मुताबिक, सनी किसी परिस्थिति को पकड़ लेते थे और फिर उसी के भीतर से अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकालते थे।
जब दामिनी की बात आती है तो सबसे पहले दिमाग में एक आवाज गूंजती है—
“तारीख पर तारीख…”
लेकिन इस डायलॉग के पीछे भी एक असली जिंदगी का दर्द छिपा था।
राजकुमार संतोषी ने बताया कि उनके परिवार का एक प्रॉपर्टी विवाद अदालत में चल रहा था। उनकी मां और दादी को कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते थे।
वह खुद उस वक्त काम में व्यस्त रहते थे और परिवार के संघर्ष को करीब से देखते थे।
अदालत में तारीख पर तारीख मिलना, इंसाफ का इंतजार करना और उस इंतजार की तकलीफ उनके दिमाग में कहीं न कहीं दर्ज थी।
इसी अनुभव का दर्द दामिनी के डायलॉग में उतर गया।
उन्होंने कहा कि लाखों लोग अदालतों के चक्कर लगाते हैं और उनके इसी दर्द को उन्होंने कहानी में जगह दी।
यह भी दामिनी से जुड़ा एक बड़ा खुलासा है।
राजकुमार संतोषी ने बताया कि शुरुआती योजना में वकील का किरदार ओम पुरी को ध्यान में रखकर लिखा गया था।
लेकिन बाद में जब बात नहीं बनी तो उन्होंने सनी देओल से संपर्क करने का फैसला किया।
यहां भी सनी ने कहानी सुनते ही हामी भर दी।
खास बात यह थी कि संतोषी जानते थे कि दामिनी मूल रूप से मीनाक्षी शेषाद्रि के किरदार के इर्द-गिर्द लिखी गई फिल्म थी। इसके बावजूद सनी ने अपने रोल की ताकत को पहचाना और उसका हिस्सा बनने के लिए तैयार हो गए।
उस समय ‘तारीख पर तारीख’ या ‘ढाई किलो का हाथ’ जैसी कोई लोकप्रिय छवि उनके दिमाग में नहीं थी।
सिर्फ किरदार था।
और इसी किरदार ने इतिहास रच दिया।
दामिनी में सनी देओल का रोल लंबाई के हिसाब से मुख्य भूमिका नहीं था, लेकिन उसका प्रभाव इतना बड़ा रहा कि फिल्म की सबसे यादगार पहचान उन्हीं के किरदार से जुड़ गई।
इस फिल्म में सनी ने वकील गोविंद का किरदार निभाया था।
उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें 1993 का National Film Award for Best Supporting Actor मिला। Filmfare Awards के आधिकारिक विजेताओं की सूची में भी दामिनी के लिए सनी देओल को Best Actor in a Supporting Role का विजेता दर्ज किया गया है।
यानी यह कहना अधिक सही होगा कि घायल ने सनी को 1991 में National Film Award का Special Jury Award दिलाया था, जबकि दामिनी ने उन्हें Best Supporting Actor का National Award दिलाया।
90 के दशक में फिल्मों में गानों की भरमार आम बात थी।
लेकिन दामिनी के निर्माताओं और निर्देशक ने कहानी के साथ ईमानदारी बरतने का फैसला किया।
राजकुमार संतोषी ने बताया कि फिल्म के दूसरे हिस्से में गाने की ज्यादा गुंजाइश नहीं थी। उस दौर में एक फिल्म में कई गाने डालना लगभग सामान्य नियम था, लेकिन टीम ने तय किया कि सिर्फ इसलिए गाना नहीं डाला जाएगा कि फिल्म में गाने होने चाहिए।
उनके मुताबिक, अगर कहानी अपने चरम पर पहुंच रही है और अचानक गाना आ जाता है तो दर्शक का इमोशनल कनेक्शन टूट सकता है।
इसलिए दामिनी के दूसरे हिस्से को पूरी तरह कहानी और भावनाओं पर रखा गया।
यही फैसला फिल्म की पकड़ मजबूत करने में अहम साबित हुआ।
घातक की कहानी में भी शुरुआत से सनी देओल का नाम तय नहीं था।
राजकुमार संतोषी ने बताया कि वह कमल हासन के बहुत बड़े प्रशंसक थे और उन्होंने इस प्रोजेक्ट को लेकर कमल हासन से बातचीत भी की थी।
लेकिन प्रोजेक्ट की परिस्थितियां और दूसरी समस्याओं के कारण वह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
उस समय सनी देओल के साथ दो अलग फिल्मों पर भी विचार चल रहा था।
आखिरकार संतोषी ने सनी को घातक की कहानी सुनाई और उन्होंने तुरंत हां कर दी।
1996 में रिलीज हुई घातक: Lethal में सनी देओल ने काशी का किरदार निभाया। फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया था और इसमें मीनाक्षी शेषाद्रि, डैनी डेन्जोंगपा और अमरीश पुरी भी अहम भूमिकाओं में थे।
घातक सिर्फ मारधाड़ वाली फिल्म नहीं थी।
इसकी सबसे बड़ी ताकत काशी और उसके पिता शंभूनाथ के रिश्ते में थी।
राजकुमार संतोषी ने उस अस्पताल वाले सीन का किस्सा बताया जिसमें सनी देओल को अपने पिता की गंभीर बीमारी का पता चलता है।
संतोषी ने सनी को लंबी एक्टिंग ब्रीफिंग नहीं दी।
उन्होंने सिर्फ परिस्थिति समझाई—पिता संतरा खा रहे हैं, वह अभी भी जिंदगी से प्यार करते हैं, उनके पास कई जिम्मेदारियां हैं और सनी के किरदार को पता है कि उनके पास ज्यादा समय नहीं बचा है।
इसके बाद कैमरा चला।
संतोषी के मुताबिक सनी ने सिर्फ एक टेक में वह सीन कर दिया।
अमरीश पुरी भी उस पल में इतने भावुक हो गए कि एक क्षण के लिए अभिनय भूलकर वह सनी को संभालने लगे।
यही वह पल था जब एक एक्शन स्टार पर्दे पर एक टूटे हुए बेटे में बदल गया।
घातक के क्लाइमेक्स में सनी का गुस्सा किसी सामान्य एक्शन हीरो का गुस्सा नहीं था।
राजकुमार संतोषी ने बताया कि उन्होंने इस दृश्य को नरसिंह अवतार और प्रह्लाद की कथा से जोड़कर सोचा था।
एक ऐसा गुस्सा जिसे कोई रोक नहीं पा रहा है और फिर एक बच्चा आकर उसे शांत करता है।
संतोषी के मुताबिक अच्छे कलाकार ऐसे क्षणों को पर्दे पर जीवित कर देते हैं।
यही वजह है कि घातक के कई दृश्य आज भी दर्शकों की याद में मौजूद हैं। फिल्म को उसके एक्शन के साथ-साथ पिता-पुत्र के भावनात्मक रिश्ते के लिए भी याद किया जाता है।
घातक का सफर भी आसान नहीं था।
फिल्म को बनने में लगभग पांच साल लगे। इसी दौरान राजकुमार संतोषी ने बरसात भी बनाई।
इस लंबी देरी के बावजूद संतोषी और सनी का भरोसा नहीं टूटा।
यह वही रिश्ता था जिसकी शुरुआत घायल के समय एक अनजान निर्देशक और एक बड़े स्टार के बीच भरोसे से हुई थी।
इंटरव्यू में दोनों ने अपनी नई फिल्म बंटवारा का भी जिक्र किया।
राजकुमार संतोषी के मुताबिक, उन्होंने इस प्रोजेक्ट के अधिकार काफी पहले ले लिए थे और सनी देओल ने भी फिल्म करने के लिए हां कह दी थी।
लेकिन प्रोजेक्ट के लिए निर्माता और दूसरी परिस्थितियां अनुकूल नहीं थीं।
साल गुजरते गए।
संतोषी ने कहा कि लगभग 15 साल तक वह भी अपने फैसले से पीछे नहीं हटे और सनी भी नहीं हटे।
फिर गदर की सफलता के बाद परिस्थितियां बदलने लगीं और इस प्रोजेक्ट को लेकर नई संभावनाएं बनीं।
संतोषी ने यह भी बताया कि इस फिल्म को लेकर आमिर खान से बातचीत हुई और आखिरकार फिल्म आगे बढ़ सकी।
इंटरव्यू के दौरान राजकुमार संतोषी ने सनी देओल की एक खास खूबी की चर्चा की।
उनके मुताबिक सनी अपने काम से कभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते।
चाहे दर्शक तारीफ करें, अवॉर्ड मिलें या लोग कहें कि परफॉर्मेंस शानदार थी—सनी फिर भी अपने काम को दोबारा देखते हैं और सोचते हैं कि क्या इसे और बेहतर किया जा सकता था।
संतोषी ने कहा कि यही एक कलाकार की अच्छी खूबी है।
सीखने और खुद को बेहतर करने की इच्छा।
उन्होंने बंटवारा में सनी के प्रदर्शन को भी लेकर बेहद ऊंची राय जाहिर की और कहा कि वह इस फिल्म में उनके काम से बेहद संतुष्ट हैं।
घायल, दामिनी और घातक सिर्फ तीन फिल्में नहीं हैं।
इन तीनों फिल्मों में सनी देओल और राजकुमार संतोषी की रचनात्मक समझ दिखाई देती है।
घायल में एक्शन और बदले की आग थी।
दामिनी में न्याय की लड़ाई और सामाजिक सवाल थे।
और घातक में एक बेटे का अपने पिता के लिए प्यार, गुस्सा और संघर्ष था।
इन फिल्मों की खासियत यह थी कि एक्शन कभी कहानी से अलग नहीं हुआ।
सनी देओल की ताकत सिर्फ उनकी आवाज, शरीर या गुस्सा नहीं था। उनके किरदारों के पीछे भावनात्मक वजह थी।
यही वजह है कि दशकों बाद भी उनके डायलॉग और सीन दर्शकों को याद हैं।
सनी देओल और राजकुमार संतोषी की कहानी को सिर्फ तीन हिट फिल्मों की कहानी कहना अधूरा होगा।
यह कहानी उस भरोसे की है जो एक नए निर्देशक ने एक बड़े स्टार से मांगा और उस स्टार ने बिना ज्यादा सवाल किए दे दिया।
घायल के समय सिर्फ ₹4 की साइनिंग अमाउंट से शुरू हुआ यह सफर आगे चलकर National Film Awards, Filmfare Awards और यादगार किरदारों तक पहुंचा।
घायल ने सनी देओल और राजकुमार संतोषी की जोड़ी को पहचान दी। दामिनी ने साबित किया कि एक सीमित स्क्रीन टाइम वाला किरदार भी पूरी फिल्म पर छा सकता है। वहीं घातक ने दिखाया कि सनी देओल का गुस्सा जितना ताकतवर है, उनके पर्दे का दर्द उतना ही असरदार हो सकता है।
शायद यही वजह है कि आज भी जब “तारीख पर तारीख” या सनी देओल के दमदार संवादों की बात होती है, तो लोग सिर्फ डायलॉग याद नहीं करते—उन्हें उन फिल्मों की पूरी दुनिया याद आ जाती है।
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