ईशा कोप्पिकर की पूरी कहानी: ‘खल्लास गर्ल’ का संघर्ष, करियर, शादी, तलाक और नई शुरुआत
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| “खिलाड़ी कुमार की पूरी कहानी!” |
बॉलीवुड में सितारे बहुत आए और बहुत चले गए। कुछ ने रोमांस से पहचान बनाई, कुछ ने एक्शन से, कुछ ने कॉमेडी से तो कुछ ने अपनी अदाकारी से इतिहास रचा।
लेकिन अक्षय कुमार की कहानी थोड़ी अलग है।
एक ऐसा लड़का, जिसने दिल्ली के चांदनी चौक से जिंदगी शुरू की, मार्शल आर्ट्स सीखी, फिल्मों में आने का सपना देखा और फिर एक समय ऐसा भी आया जब वही लड़का हिंदी सिनेमा के सबसे व्यस्त और भरोसेमंद सितारों में गिना जाने लगा।
राजीव हरि ओम भाटिया के नाम से जन्मे इस अभिनेता ने 1991 में ‘सौगंध’ से बॉलीवुड में कदम रखा। मगर सिर्फ डेब्यू कर लेना स्टार बनने की गारंटी नहीं था। उनकी असली पहचान 1992 की ‘खिलाड़ी’ से बनी और यहीं से शुरू हुआ वह सफर, जिसने उन्हें ‘खिलाड़ी कुमार’ बना दिया।
दिलचस्प बात यह है कि अक्षय की कहानी सिर्फ एक्शन और बॉक्स ऑफिस की कहानी नहीं है।
उन्होंने रोमांस किया, कॉमेडी की, देशभक्ति से जुड़ी कहानियां कीं, सामाजिक मुद्दों पर फिल्में कीं और कई बार असफलताओं के बाद फिर वापसी की।
यही वजह है कि अक्षय कुमार की जिंदगी को सिर्फ एक फिल्म स्टार की बायोग्राफी के रूप में देखना उनके सफर को छोटा कर देना होगा।
यह कहानी है अनुशासन, असफलता, जोखिम, बदलाव और लगातार आगे बढ़ते रहने की।
अक्षय कुमार का जन्म 9 सितंबर 1967 को हुआ। उनका असली नाम राजीव हरि ओम भाटिया है।
उनका बचपन दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में बीता। बचपन से ही उन्हें खेल और शारीरिक गतिविधियों में रुचि थी। आगे चलकर मार्शल आर्ट्स उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।
अक्षय ने मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग ली और यही प्रशिक्षण बाद में उनके फिल्मी करियर की सबसे बड़ी पहचान में बदल गया।
बॉलीवुड में उस दौर में जब कई अभिनेता एक्शन दृश्यों के लिए बॉडी डबल का सहारा लेते थे, अक्षय की फिटनेस और स्टंट करने की क्षमता ने उन्हें अलग पहचान दी।
उनका परिवार फिल्म इंडस्ट्री से नहीं था।
इसलिए उनके लिए बॉलीवुड में प्रवेश किसी फिल्मी परिवार के बच्चे जैसा आसान रास्ता नहीं था।
उन्हें खुद अपना रास्ता बनाना पड़ा।
और शायद यही कारण है कि अक्षय की जिंदगी में मेहनत और अनुशासन की बात बार-बार सामने आती है।
अक्षय कुमार की जिंदगी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यह है कि उनका फिल्मी सफर सीधे मुंबई के किसी बड़े प्रोडक्शन हाउस से शुरू नहीं हुआ था।
उन्होंने मार्शल आर्ट्स में प्रशिक्षण लिया और मॉडलिंग के जरिए भी काम किया।
फिर फिल्मों में आने का मौका मिला।
1991 में राज एन. सिप्पी के निर्देशन में बनी ‘सौगंध’ रिलीज हुई। फिल्म में अक्षय कुमार के साथ शांतिप्रिया नजर आई थीं। अक्षय ने बाद में बताया था कि उनका पहला शॉट ही एक एक्शन सीक्वेंस था, जिसे ऊटी में शूट किया गया था।
लेकिन ‘सौगंध’ वह फिल्म नहीं थी जिसने उन्हें सुपरस्टार बना दिया।
उन्हें अभी लंबा रास्ता तय करना था।
1992 में अब्बास-मस्तान की फिल्म ‘खिलाड़ी’ आई।
यही वह फिल्म थी जिसने अक्षय कुमार के करियर की दिशा बदल दी।
फिल्म एक मर्डर मिस्ट्री थी, जिसमें अक्षय के साथ आयशा जुल्का, दीपक तिजोरी, सबीहा, अनंत महादेवन और जॉनी लीवर जैसे कलाकार थे। फिल्म में रोमांस, कॉलेज लाइफ, सस्पेंस और मर्डर मिस्ट्री को मिलाकर कहानी बनाई गई थी।
अब्बास-मस्तान को अक्षय में एक ऐसा अभिनेता नजर आया जो एक्शन के साथ-साथ कॉमेडी, डांस और अभिनय भी कर सकता था।
यही ‘ऑलराउंडर’ वाली क्षमता आगे चलकर अक्षय कुमार की सबसे बड़ी ताकत बनी।
‘खिलाड़ी’ की सफलता के बाद अक्षय के नाम के साथ एक शब्द हमेशा के लिए जुड़ गया—
खिलाड़ी।
बाद में ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’, ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’, ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’, ‘मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी’, ‘इंटरनेशनल खिलाड़ी’, ‘खिलाड़ी 420’ और ‘खिलाड़ी 786’ जैसी फिल्मों ने इस पहचान को और मजबूत किया।
आज अक्षय कुमार को सुपरस्टार के तौर पर देखना आसान है।
लेकिन उनके करियर का रास्ता हमेशा सीधा नहीं रहा।
90 के दशक में उन्होंने लगातार कई फिल्मों में काम किया। एक समय वह मुख्य रूप से एक्शन हीरो के रूप में पहचाने जाते थे।
‘मोहरा’, ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’, ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’ और दूसरी एक्शन फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता बढ़ाई।
लेकिन लगातार एक ही तरह की भूमिकाएं करना उनके लिए पर्याप्त नहीं था।
उन्हें खुद को बदलना था।
और यहीं अक्षय कुमार ने अपने करियर का सबसे बड़ा जोखिम लिया।
उन्होंने कॉमेडी की तरफ कदम बढ़ाया।
साल 2000 में आई ‘हेरा फेरी’ अक्षय कुमार के करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक साबित हुई।
प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अक्षय के साथ सुनील शेट्टी और परेश रावल थे।
राजू का किरदार अक्षय के एक्शन स्टार वाले व्यक्तित्व से बिल्कुल अलग था।
और यही प्रयोग सफल रहा।
अक्षय ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ मुक्के और स्टंट करने वाले अभिनेता नहीं हैं।
उनके अंदर कॉमेडी की टाइमिंग भी है।
आगे चलकर ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘गरम मसाला’, ‘भूल भुलैया’, ‘वेलकम’, ‘भागम भाग’, ‘हाउसफुल’ जैसी फिल्मों ने कॉमेडी स्टार के रूप में उनकी पहचान मजबूत कर दी।
अक्षय ने बाद में बताया कि कॉमेडी में उनकी क्षमता को पहचानने वालों में प्रियदर्शन, राजकुमार संतोषी और लेखक नीरज वोरा का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
यह बदलाव उनके करियर का टर्निंग पॉइंट था।
अक्षय कुमार की सबसे बड़ी खूबी शायद यही है कि उन्होंने किसी एक इमेज को हमेशा के लिए पकड़कर नहीं रखा।
पहले वह एक्शन हीरो बने।
फिर रोमांटिक हीरो।
फिर कॉमेडी स्टार।
और इसके बाद सामाजिक मुद्दों से जुड़ी फिल्मों की तरफ भी उन्होंने कदम बढ़ाया।
‘बेबी’, ‘एयरलिफ्ट’, ‘रुस्तम’, ‘जॉली एलएलबी 2’, ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ और ‘पैडमैन’ जैसी फिल्मों ने उनके करियर का एक नया अध्याय लिखा।
इन फिल्मों में उनका लक्ष्य सिर्फ मनोरंजन नहीं था।
कई फिल्मों ने सामाजिक मुद्दों को मुख्यधारा के मनोरंजन के साथ जोड़ने की कोशिश की।
2016 अक्षय कुमार के लिए विशेष साल रहा।
‘एयरलिफ्ट’ में उन्होंने एक ऐसे किरदार को निभाया जो युद्ध के बीच फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने की कहानी का केंद्र था।
इसके बाद ‘रुस्तम’ आई।
इसी फिल्म में उनके अभिनय के लिए उन्हें 64वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दिया गया। यह सम्मान भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो की आधिकारिक घोषणा में दर्ज है।
‘रुस्तम’ ने अक्षय को यह साबित करने का अवसर दिया कि उनका अभिनय सिर्फ कॉमेडी या एक्शन तक सीमित नहीं है।
अक्षय कुमार के करियर में एक समय ऐसा आया जब उन्होंने सामाजिक विषयों वाली कहानियों को प्राथमिकता देना शुरू किया।
‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ ने स्वच्छता और खुले में शौच जैसे मुद्दे को कहानी के केंद्र में रखा।
इसके बाद ‘पैडमैन’ में महिलाओं की मासिक स्वच्छता और सैनिटरी पैड से जुड़े सामाजिक संकोच को विषय बनाया गया।
इन फिल्मों की खासियत यह थी कि गंभीर विषयों को मनोरंजन की भाषा में पेश किया गया।
अक्षय ने एक स्टार के रूप में अपनी लोकप्रियता का इस्तेमाल ऐसी कहानियों को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने के लिए किया।
अक्षय कुमार के करियर में कई ऐसी फिल्में हैं जिन्हें उनकी पहचान से अलग करना मुश्किल है।
कुछ महत्वपूर्ण फिल्में हैं—
उनकी फिल्मोग्राफी में एक्शन, कॉमेडी, रोमांस, ड्रामा और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी अलग-अलग शैलियां दिखाई देती हैं।
अक्षय कुमार ने हिंदी सिनेमा के कई दिग्गज कलाकारों के साथ स्क्रीन साझा की है।
उनकी फिल्मी यात्राओं में शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान, अजय देवगन, सुनील शेट्टी, परेश रावल, गोविंदा, अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर, नसीरुद्दीन शाह, इरफान खान, मनोज बाजपेयी, रणवीर सिंह और टाइगर श्रॉफ जैसे कलाकारों के साथ काम या स्क्रीन शेयरिंग शामिल रही है।
अक्षय की जोड़ी अलग-अलग दौर की अभिनेत्रियों के साथ भी लोकप्रिय रही।
उन्होंने रवीना टंडन, शिल्पा शेट्टी, करिश्मा कपूर, रवीना टंडन, कैटरीना कैफ, करीना कपूर खान, प्रियंका चोपड़ा, बिपाशा बसु, विद्या बालन, भूमि पेडनेकर, तापसी पन्नू और कृति सेनन सहित कई अभिनेत्रियों के साथ काम किया है।
यही विविधता उनकी लंबी फिल्मी यात्रा की पहचान है।
अक्षय कुमार ने 17 जनवरी 2001 को अभिनेत्री और लेखिका ट्विंकल खन्ना से शादी की।
यह शादी निजी समारोह में हुई थी।
दोनों के दो बच्चे हैं—बेटा आरव और बेटी नितारा।
ट्विंकल खन्ना खुद भी फिल्म परिवार से आती हैं। वह अभिनेता राजेश खन्ना और अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया की बेटी हैं।
दिलचस्प बात यह है कि अक्षय ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह राजेश खन्ना की बेटी से शादी करेंगे। शुरुआती दिनों में वह काम की तलाश में राजेश खन्ना से मिलने जाया करते थे।
आज अक्षय और ट्विंकल की शादी को 25 साल पूरे हो चुके हैं।
जनवरी 2026 में दोनों ने अपनी 25वीं शादी की सालगिरह मनाई।
अक्षय ने कई मौकों पर अपनी पत्नी के योगदान की बात भी की है और बताया है कि ट्विंकल ने उनके जीवन को व्यवस्थित करने में मदद की।
अक्षय कुमार की निजी जिंदगी का सबसे चर्चित विवाद उनकी नागरिकता को लेकर रहा है।
एक समय उनके पास कनाडा की नागरिकता थी। इसे लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक बहस में उन्हें लगातार सवालों का सामना करना पड़ा।
2022 में अक्षय ने इस मुद्दे पर बात करते हुए कहा था कि फिल्मों के खराब प्रदर्शन के दौर में उन्होंने कनाडा जाने के बारे में सोचा था और कनाडाई पासपोर्ट उनके पास था।
बाद में उन्होंने भारतीय नागरिकता के लिए प्रक्रिया पूरी की। 15 अगस्त 2023 को अक्षय कुमार ने आधिकारिक दस्तावेज साझा करते हुए पुष्टि की कि वह भारतीय नागरिक बन चुके हैं।
इस तरह नागरिकता को लेकर वर्षों से चल रही बहस का उन्होंने खुद अंत कर दिया।
2022 में अक्षय कुमार एक विमल इलायची विज्ञापन में नजर आए।
विज्ञापन में उनके साथ अजय देवगन और शाहरुख खान भी थे।
इस विज्ञापन के बाद अक्षय को सोशल मीडिया पर भारी आलोचना का सामना करना पड़ा। आलोचना मुख्य रूप से इस बात को लेकर थी कि ब्रांड का संबंध पान मसाला और तंबाकू उत्पादों से भी जुड़ा है।
अक्षय ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और कहा कि वह इस एसोसिएशन से पीछे हट रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि विज्ञापन की फीस एक योग्य कारण के लिए दान करने का निर्णय लिया है।
हालांकि बाद में उनके दोबारा इसी ब्रांड के विज्ञापन में नजर आने को लेकर फिर सवाल उठे।
यह विवाद दिखाता है कि बड़े सितारे जब किसी ब्रांड का चेहरा बनते हैं तो उनके हर व्यावसायिक फैसले पर भी सार्वजनिक नजर रहती है।
अक्षय कुमार की पहचान सिर्फ अभिनय से नहीं, बल्कि उनकी फिटनेस से भी जुड़ी है।
वह लंबे समय से अनुशासित जीवनशैली, मार्शल आर्ट्स और फिटनेस को लेकर चर्चा में रहे हैं।
यही वजह है कि उम्र बढ़ने के बावजूद उन्होंने लंबे समय तक एक्शन फिल्मों में सक्रिय भूमिका निभाई।
उनकी फिटनेस का एक महत्वपूर्ण पहलू नियमित दिनचर्या और अनुशासन माना जाता है।
अक्षय की सार्वजनिक छवि देर रात तक पार्टियों के बजाय समय पर काम करने और जल्दी दिन शुरू करने वाले अभिनेता की रही है।
अक्षय कुमार की वास्तविक और वर्तमान नेट वर्थ का कोई आधिकारिक, ऑडिटेड आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
इसलिए इंटरनेट पर दिखाई देने वाली किसी एक संख्या को निश्चित संपत्ति मानना सही नहीं होगा।
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और सेलिब्रिटी-वेल्थ वेबसाइटों ने अलग-अलग अनुमान दिए हैं।
उदाहरण के लिए, Indian Express ने दिसंबर 2024 की एक रिपोर्ट में Wealthy Gorilla के हवाले से उनकी अनुमानित नेट वर्थ लगभग 240 मिलियन डॉलर बताई थी, जबकि उसी रिपोर्ट में अलग-अलग वर्षों के लिए अलग-अलग अनुमान दिए गए। रिपोर्ट ने उनकी आय के स्रोतों में फिल्में, प्रोडक्शन, स्पोर्ट्स और एंडोर्समेंट्स का उल्लेख किया।
वहीं Forbes ने 2020 में अक्षय कुमार की उस वर्ष की सेलिब्रिटी कमाई 48.5 मिलियन डॉलर आंकी थी। Forbes के अनुसार उस समय वह भारत के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले सितारों में थे।
इसलिए उनकी नेट वर्थ को लेकर बेहतर तरीका यही है कि उपलब्ध आंकड़ों को मीडिया अनुमान माना जाए, न कि आधिकारिक संपत्ति विवरण।
अक्षय ने खुद बताया था कि उनका पहला फिल्मी शॉट ‘सौगंध’ के लिए ऊटी में शूट हुआ था और वह एक एक्शन सीक्वेंस था।
अब्बास-मस्तान को अक्षय में एक ऐसा अभिनेता नजर आया जो एक्शन के साथ डांस, कॉमेडी और अभिनय भी कर सकता था। यही कारण था कि ‘खिलाड़ी’ में उन्हें मौका मिला।
अक्षय कुमार ने आमिर खान की ‘जो जीता वही सिकंदर’ में दीपक तिजोरी द्वारा निभाए गए किरदार के लिए ऑडिशन दिया था, लेकिन उन्हें वह भूमिका नहीं मिली।
कभी-कभी किसी फिल्म में मिली असफलता ही आगे की बड़ी सफलता का रास्ता खोल देती है।
अक्षय ने बताया कि शुरुआत में वह खुद को मुख्य रूप से एक्शन अभिनेता के रूप में देखते थे। बाद में प्रियदर्शन, राजकुमार संतोषी और नीरज वोरा जैसे लोगों ने उनकी कॉमेडी क्षमता को पहचानने में मदद की।
‘खिलाड़ी’ के बाद अक्षय के नाम के साथ यह शब्द इतनी मजबूती से जुड़ गया कि आगे कई फिल्मों के नाम में ‘खिलाड़ी’ शामिल किया गया।
अक्षय कुमार को भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए कई सम्मान मिले हैं।
उन्हें 2009 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
सरकारी पद्म पुरस्कार पोर्टल पद्म श्री को भारत के प्रमुख नागरिक सम्मानों में शामिल करता है।
इसके अलावा ‘रुस्तम’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान मिला।
फिल्मफेयर सहित कई अन्य पुरस्कारों में भी उनका नाम दर्ज है।
सितंबर 2026 तक अक्षय कुमार लगातार फिल्मों में सक्रिय हैं।
2025 में ‘स्काई फोर्स’, ‘केसरी चैप्टर 2’, ‘हाउसफुल 5’, ‘कन्नप्पा’ और ‘जॉली एलएलबी 3’ जैसी फिल्मों में उनकी मौजूदगी रही।
2026 में उनकी फिल्म ‘भूत बंगला’ रिलीज हो चुकी है, जबकि ‘वेलकम टू द जंगल’ भी रिलीज सूची में शामिल है।
उनकी आगामी फिल्मों में ‘हैवान’, ‘हेरा फेरी 4’, ‘गोलमाल 5’ और कुछ अन्य प्रोजेक्ट शामिल हैं। उपलब्ध फिल्मोग्राफी के अनुसार ‘हैवान’ की रिलीज 11 सितंबर 2026 और अनीस बज्मी के साथ उनकी अगली फिल्म की रिलीज 4 दिसंबर 2026 बताई गई है।
खास बात यह है कि अब अक्षय सिर्फ पारंपरिक हीरो की छवि तक सीमित नहीं रहना चाहते।
सितंबर 2026 की रिपोर्टों के अनुसार ‘हैवान’ में वह नकारात्मक/डार्क किरदार की दिशा में भी कदम बढ़ा रहे हैं, जबकि ‘गोलमाल 5’ में भी उनकी भूमिका को लेकर अलग तरह की उम्मीदें हैं।
यह बदलाव बताता है कि इतने लंबे करियर के बाद भी अक्षय कुमार अपने लिए नई चुनौतियां तलाश रहे हैं।
अक्षय कुमार की जिंदगी को अगर सिर्फ सफल फिल्मों और करोड़ों की कमाई से देखा जाए तो उनकी कहानी अधूरी रह जाएगी।
उनकी असली कहानी उन दिनों में छिपी है जब वह इंडस्ट्री में नए थे।
जब उन्हें हर फिल्म में सफलता नहीं मिलती थी।
जब उनकी पहचान सिर्फ एक्शन हीरो तक सीमित थी।
जब उन्हें कॉमेडी में खुद को साबित करना पड़ा।
और जब कई बार आलोचनाओं के बावजूद उन्होंने अपना रास्ता बदलने की कोशिश की।
एक अभिनेता के तौर पर उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि शायद यही है कि उन्होंने अपनी पुरानी पहचान को तोड़ने से डर नहीं दिखाया।
उन्होंने एक्शन से शुरुआत की।
कॉमेडी को अपनाया।
गंभीर किरदार किए।
सामाजिक मुद्दों वाली फिल्में कीं।
और अब अपने करियर के इस पड़ाव पर नेगेटिव और ज्यादा चुनौतीपूर्ण किरदारों की तरफ भी बढ़ रहे हैं।
अक्षय कुमार की कहानी किसी एक फिल्म की कहानी नहीं है।
यह उस अभिनेता की कहानी है जिसने लगभग तीन दशक से ज्यादा समय तक हिंदी सिनेमा में अपनी जगह बनाए रखी।
उन्होंने उतार देखे, आलोचना सुनी, फिल्में फ्लॉप हुईं, लेकिन हर बार एक नया रास्ता खोजने की कोशिश की।
शायद यही कारण है कि अक्षय कुमार को सिर्फ ‘खिलाड़ी कुमार’ कहना उनकी पूरी यात्रा को परिभाषित नहीं करता।
वह एक अभिनेता हैं जिन्होंने अपने करियर में कई बार खुद को बदला।
और शायद उनकी सबसे बड़ी सीख भी यही है—
सफलता का मतलब कभी न गिरना नहीं है। असली सफलता हर गिरावट के बाद फिर खड़े होकर खुद को पहले से बेहतर बनाने में है।
चांदनी चौक से शुरू हुई राजीव भाटिया की कहानी आज भी जारी है।
नाम बदल गया।
पहचान बदल गई।
सिनेमा बदल गया।
लेकिन आगे बढ़ते रहने की जिद अब भी वही है।
और शायद इसी वजह से बॉलीवुड के इतिहास में अक्षय कुमार की कहानी आने वाले लंबे समय तक एक ऐसे अभिनेता की कहानी के रूप में याद की जाएगी, जिसने खुद को किसी एक दौर में कैद नहीं होने दिया।
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