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नाना पाटेकर की पूरी कहानी: ₹35 से शुरू हुआ सफर, National Award से Padma Shri तक

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 नाना पाटेकर: भूख से निकली वह आवाज, जिसने भारतीय सिनेमा को हमेशा के लिए बदल दिया “₹35 से स्टार बनने तक…” कुछ कलाकार पर्दे पर किरदार निभाते हैं, कुछ कलाकार किरदार में इस तरह उतर जाते हैं कि दर्शक उन्हें भूल ही नहीं पाता। नाना पाटेकर दूसरी श्रेणी के कलाकार थे। उनकी आंखों में गुस्सा दिखाई देता था, आवाज में एक अलग तरह की खुरदुराहट थी और संवाद बोलने का अंदाज ऐसा कि साधारण-सा वाक्य भी दिल के भीतर उतर जाता था। उन्होंने जब पुलिसवाले का किरदार निभाया तो वह पुलिसवाला सिर्फ पर्दे पर नहीं रहा, जब उन्होंने खलनायक का किरदार निभाया तो वह सिर्फ विलेन नहीं लगे और जब उन्होंने टूटे हुए इंसान की भूमिका की तो दर्शकों को उसमें अपना दर्द दिखाई दिया। लेकिन नाना पाटेकर की असली कहानी कैमरे के सामने शुरू नहीं हुई थी। वह कहानी बहुत पहले शुरू हो चुकी थी—उस समय, जब एक बच्चे को अपने परिवार की मदद करने के लिए स्कूल के बाद मुंबई की सड़कों पर फिल्म पोस्टर पेंट करने पड़ते थे। नाना ने खुद बताया था कि 13 साल की उम्र में वह पोस्टर पेंट करते थे, करीब आठ किलोमीटर पैदल जाते थे और बदले में उन्हें एक वक्त का खाना तथा महीन...

प्रेम क़ैदी का मासूम हीरो हरीश आज कहां है? 90 के दशक के स्टार की वो कहानी, जो बहुत कम लोग जानते हैं

 प्रेम क़ैदी का मासूम हीरो हरीश आज कहां है? 90 के दशक के स्टार की वो कहानी, जो बहुत कम लोग जानते हैं

Prem Qaidi actor Harish Kumar rare photo and career story
प्रेम क़ैदी के हीरो हरीश आज कहां हैं?

90 के दशक की फिल्मों के शौकीनों को अगर एक मासूम चेहरा याद होगा, तो उसमें फिल्म प्रेम क़ैदी के हीरो हरीश का नाम जरूर शामिल होगा। एक ऐसा लड़का जिसने अपनी पहली बड़ी हिंदी फिल्म में लाखों दिल जीत लिए थे। लेकिन फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि जिस अभिनेता को बॉलीवुड का अगला रोमांटिक स्टार माना जा रहा था, वह धीरे-धीरे पर्दे से गायब हो गया?

आज की पीढ़ी शायद उन्हें पहचान भी न पाए, लेकिन एक दौर था जब उनकी फिल्में सिनेमाघरों में दर्शकों को खींच लाती थीं।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि हरीश सिर्फ बॉलीवुड के अभिनेता नहीं थे। वह उन गिने-चुने कलाकारों में शामिल रहे जिन्होंने बचपन से लेकर हीरो और फिर चरित्र अभिनेता तक का सफर तय किया। लेकिन उनकी जिंदगी की असली कहानी पर्दे पर दिखी कहानी से कहीं ज्यादा दिलचस्प है।

जब एक तेलुगु फिल्म ने बदल दी किस्मत

हरीश कुमार का जन्म हैदराबाद में हुआ था। उन्होंने बहुत कम उम्र में फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। बाल कलाकार के रूप में उन्होंने कई भाषाओं की फिल्मों में अभिनय किया और अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उनके काम को इतना पसंद किया गया कि उन्हें आंध्र प्रदेश सरकार का प्रतिष्ठित नंदी अवॉर्ड भी मिला।

लेकिन उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साल 1990 में आया।

निर्माता डी. रामानायडू ने उन्हें तेलुगु फिल्म प्रेमा खैदी में बतौर हीरो लॉन्च किया। यह फिल्म बड़ी हिट साबित हुई और देखते ही देखते हरीश युवा दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो गए।

फिल्म की सफलता के बाद इसका हिंदी रीमेक बनाने का फैसला हुआ और यहीं से शुरू हुई बॉलीवुड की एक नई कहानी।

करिश्मा कपूर की पहली फिल्म और हरीश का बड़ा मौका

1991 में प्रेम क़ैदी रिलीज हुई। यह फिल्म कई कारणों से खास थी।

एक तरफ यह हरीश की हिंदी फिल्मों में बड़ी पहचान बन रही थी, तो दूसरी तरफ इसी फिल्म से कपूर खानदान की बेटी करिश्मा कपूर ने बॉलीवुड में कदम रखा था।

फिल्म में हरीश और करिश्मा की जोड़ी को दर्शकों ने पसंद किया। उस समय दोनों की उम्र बेहद कम थी। रिपोर्ट्स के अनुसार करिश्मा लगभग 16 साल की थीं जबकि हरीश भी किशोर अवस्था में थे।

फिल्म के गाने, मासूम प्रेम कहानी और भावनात्मक ड्रामा ने दर्शकों का दिल जीत लिया।

कई ट्रेड एक्सपर्ट्स को लगा कि बॉलीवुड को नया रोमांटिक स्टार मिल गया है।

लेकिन किस्मत शायद कुछ और ही लिख चुकी थी।

पर्दे पर हीरो, असल जिंदगी में करिश्मा बनीं रक्षक

प्रेम क़ैदी से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सालों बाद सामने आया।

फिल्म में एक दृश्य था जिसमें हरीश को करिश्मा कपूर को पानी में डूबने से बचाना था। लेकिन असल घटना बिल्कुल उलटी निकली।

एक इंटरव्यू में हरीश ने खुलासा किया कि शूटिंग के दौरान उन्हें तैरना नहीं आता था और वह खुद पानी में डूबने लगे। पहले लोगों को लगा कि वह मजाक कर रहे हैं, लेकिन करिश्मा कपूर ने स्थिति समझ ली और उन्हें बचा लिया।

यह behind the scenes कहानी आज भी फैंस के बीच चर्चा का विषय बनी रहती है।

बॉलीवुड में मिली पहचान, लेकिन सुपरस्टारडम नहीं

प्रेम क़ैदी के बाद हरीश को कई फिल्मों में मौके मिले।

उन्होंने तिरंगा, कुली नं. 1, क्रांति क्षेत्र, रावण राज और कई अन्य फिल्मों में काम किया।

हालांकि यहां एक बड़ा अंतर था।

जहां उनके साथ काम करने वाले कई कलाकार आगे चलकर सुपरस्टार बन गए, वहीं हरीश को लगातार वैसी बड़ी सफलताएं नहीं मिल सकीं जो किसी अभिनेता को स्टारडम के अगले स्तर तक पहुंचाती हैं।

धीरे-धीरे उन्हें मुख्य हीरो के बजाय सपोर्टिंग और सेकेंड लीड भूमिकाओं में देखा जाने लगा।

यहीं से उनके करियर का ग्राफ बदलने लगा।

कम लोग जानते हैं: हरीश ने 280 से ज्यादा फिल्मों में किया काम

अगर आपको लगता है कि हरीश सिर्फ कुछ हिंदी फिल्मों तक सीमित रहे, तो यह जानकर हैरानी होगी कि उन्होंने अपने करियर में करीब 280 फिल्मों में काम किया।

उन्होंने हिंदी, तेलुगु, तमिल, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में अभिनय किया।

यह उपलब्धि अपने आप में बड़ी है, क्योंकि बहुत कम अभिनेता इतने अलग-अलग फिल्म उद्योगों में सक्रिय रहे हैं।

लेकिन बॉलीवुड की चमक इतनी तेज होती है कि अक्सर दर्शकों को वही कलाकार याद रहते हैं जो लगातार बड़ी हिट देते रहें।

फिर अचानक कहां गायब हो गए हरीश?

यह सवाल आज भी इंटरनेट पर सबसे ज्यादा पूछा जाता है।

90 के दशक में लगातार फिल्मों में दिखने वाले हरीश अचानक नजर आना कम हो गए।

कई लोगों को लगा कि उन्होंने स्वेच्छा से फिल्में छोड़ दीं, लेकिन असल सच कुछ और था।

एक इंटरव्यू में हरीश ने बताया था कि गंभीर पीठ (Back) की चोट की वजह से उन्हें लंबे समय तक परेशानी झेलनी पड़ी। स्थिति ऐसी हो गई थी कि वह काफी समय तक बिस्तर पर रहे और फिल्मी दुनिया से दूरी बन गई।

जब कोई अभिनेता अपने करियर के महत्वपूर्ण दौर में लंबे समय के लिए दूर हो जाता है, तो इंडस्ट्री बहुत तेजी से आगे बढ़ जाती है।

हरीश के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।

स्टारडम से संघर्ष तक का सफर

फिल्म इंडस्ट्री में सफलता जितनी तेजी से मिलती है, उतनी ही तेजी से छिन भी सकती है।

हरीश की कहानी इसी सच को दिखाती है।

एक समय वह बड़े बैनर की फिल्मों में नजर आ रहे थे।

उनके साथ करिश्मा कपूर जैसी अभिनेत्री डेब्यू कर रही थीं।

उनके पास युवा स्टार की पहचान थी।

लेकिन बदलते दौर, नई पीढ़ी के सितारों की एंट्री और स्वास्थ्य समस्याओं ने उनके करियर की दिशा बदल दी।

यही वजह है कि आज उनकी कहानी एक ऐसी बॉलीवुड स्ट्रगल स्टोरी बन चुकी है, जिसके बारे में नई पीढ़ी बहुत कम जानती है।

आज हरीश क्या कर रहे हैं?

हाल के वर्षों में हरीश कभी-कभार इंटरव्यू और सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखाई दिए हैं।

सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें वायरल होती रहती हैं, जहां लोग अक्सर यही सवाल पूछते हैं कि "क्या ये वही प्रेम क़ैदी वाले हरीश हैं?"

समय के साथ उनका लुक काफी बदल चुका है, लेकिन उनके प्रशंसकों के लिए वह आज भी 90 के दशक के वही मासूम रोमांटिक हीरो हैं।

क्यों याद रखी जाएगी हरीश की कहानी?

हर अभिनेता की कहानी सिर्फ सफलता की कहानी नहीं होती।

कुछ कहानियां हमें यह भी सिखाती हैं कि शोहरत हमेशा स्थायी नहीं होती।

हरीश ने बाल कलाकार के रूप में शुरुआत की, युवा हीरो बने, कई भाषाओं में काम किया और सैकड़ों फिल्मों का हिस्सा रहे।

भले ही वह बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार नहीं बन पाए, लेकिन 90 के दशक की फिल्मी यादों में उनका नाम हमेशा दर्ज रहेगा।

और शायद यही किसी कलाकार की सबसे बड़ी जीत होती है।

आखिर में एक सवाल...

अगर आपने प्रेम क़ैदी देखी है, तो क्या आपको हरीश और करिश्मा कपूर की जोड़ी याद है? और क्या आपको लगता है कि अगर चोट और परिस्थितियां उनके खिलाफ न जातीं, तो हरीश बॉलीवुड के बड़े सितारों में शामिल हो सकते थे?

अपनी राय जरूर बताइए।


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