'राम खुद अपने लोगों को चुनते हैं...' रामायण ट्रेलर लॉन्च में अरुण गोविल ने सुनाया अपना रिजेक्शन वाला किस्सा, दशरथ बनकर लौटने पर भी कही बड़ी बात
नई दिल्ली: नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायण' के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में उस समय पूरा ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा, जब टीवी के सबसे लोकप्रिय 'राम' अरुण गोविल मंच पर पहुंचे। मंच संचालक ने उनका परिचय सिर्फ एक अभिनेता के रूप में नहीं, बल्कि उस चेहरे के रूप में कराया जिसे करोड़ों भारतीय दशकों से भगवान राम के स्वरूप के रूप में देखते आए हैं।
लेकिन सबसे भावुक पल तब आया, जब अरुण गोविल ने खुद अपनी जिंदगी का वह किस्सा सुनाया, जब रामानंद सागर ने उन्हें भगवान राम के किरदार के लिए पहले ही ऑडिशन में रिजेक्ट कर दिया था।
"राम अपने काम के लिए खुद चुनते हैं"
अपने संबोधन की शुरुआत अरुण गोविल ने "जय श्री राम" के उद्घोष के साथ की। उन्होंने कहा कि राम केवल एक धार्मिक नाम नहीं, बल्कि भारतीय जीवन का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा,
"हम जीवन के किसी भी मोड़ पर हों, किसी भी भावना को व्यक्त करें, कहीं न कहीं 'राम' शब्द जरूर आता है। हाय राम, अरे राम, राम-राम... सब कुछ राममय है।"
इसके बाद उन्होंने अपनी जिंदगी का सबसे अहम अनुभव साझा किया।
जब रामानंद सागर ने कर दिया था रिजेक्ट
अरुण गोविल ने बताया कि जब उन्हें पता चला कि रामानंद सागर 'रामायण' बना रहे हैं, तब उन्होंने खुद जाकर भगवान राम का किरदार निभाने की इच्छा जताई थी।
उन्होंने कहा,
"उन्होंने मेरा ऑडिशन लिया और मुझे सीधे रिजेक्ट कर दिया।"
इतना ही नहीं, उन्हें बार-बार भरत या लक्ष्मण का किरदार निभाने का प्रस्ताव दिया गया, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया।
उनके शब्दों में,
"मैंने कहा कि मुझे सिर्फ श्रीराम का चरित्र करना है। अगर मैं योग्य नहीं हूं तो राम जी जाने।"
करीब तीन-चार महीने बाद अचानक रामानंद सागर का फोन आया।
उन्होंने मुस्कुराते हुए बताया,
"उन्होंने पंजाबी में कहा- 'सारी सिलेक्शन कमेटी ने फैसला किया है कि तेरे जैसा राम नहीं मिलना।'"
यही वह पल था जिसने भारतीय टेलीविजन इतिहास की सबसे यादगार कास्टिंग को जन्म दिया।
1987 की 'रामायण' से लेकर आज तक...
अरुण गोविल ने कहा कि 1987 में प्रसारित हुई रामायण आज भी लोगों के दिलों में उसी श्रद्धा के साथ जीवित है।
उन्होंने कहा,
"आज भी राम... राम... और सिर्फ राम ही है।"
उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया भर में रामायण के सैकड़ों संस्करण मौजूद हैं, लेकिन हर संस्करण का मूल संदेश एक ही है।
"कहानी का दृष्टिकोण बदल सकता है, लेकिन रामायण के मूल्य, भारतीय संस्कृति और रामत्व कभी नहीं बदलते।"
नितेश तिवारी की 'रामायण' में दशरथ बनकर लौटे अरुण गोविल, बोले- 'राम मेरे सामने हों या न हों, मैं खुद को ही देखता था'
इवेंट के दौरान अरुण गोविल ने पहली बार खुलासा किया कि नितेश तिवारी की 'रामायण' में वह भगवान राम नहीं, बल्कि महाराज दशरथ का किरदार निभा रहे हैं। इस घोषणा के बाद पूरे ऑडिटोरियम में तालियों की गूंज सुनाई दी।
उन्होंने बताया कि इस भूमिका को निभाना उनके लिए सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव था।
"पहले भी रामायण में काम करके अच्छा लगा था और अब एक दूसरे पात्र का अभिनय किया है। जब भी मैं सेट पर होता था, राम मेरे सामने हों या न हों, लेकिन मुझे अपने सामने हमेशा वही राम दिखाई देते थे जिन्हें मैंने वर्षों पहले निभाया था।"
'रामायण' के सेट पर नहीं थी अफरातफरी, हर कोई जिम्मेदारी समझकर काम कर रहा था
अरुण गोविल ने फिल्म की शूटिंग का अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने अपने लंबे करियर में बहुत कम ऐसे फिल्म सेट देखे हैं, जहां इतनी शांति और अनुशासन हो।
उनके मुताबिक, आमतौर पर बड़े फिल्म सेट्स पर भागदौड़ और ऊंची आवाजें सुनाई देती हैं, लेकिन 'रामायण' के सेट पर माहौल बिल्कुल अलग था।
उन्होंने कहा,
"मैंने पूरे शूट के दौरान कभी अफरातफरी नहीं देखी। हर कलाकार और हर टेक्नीशियन एक ही भावना के साथ काम कर रहा था। हम सबके भीतर रामायण के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का भाव था।"
उन्होंने इसका श्रेय निर्देशक नितेश तिवारी को देते हुए कहा कि जब निर्देशक शांत और संतुलित होता है, तो पूरी टीम उसी माहौल में काम करती है।
फिल्म की कहानी पर भी जताया भरोसा
आज के दौर में पौराणिक कथाओं पर बनने वाली फिल्मों में अक्सर बदलाव को लेकर चर्चा होती है। ऐसे में अरुण गोविल ने स्पष्ट कहा कि दर्शकों को इस फिल्म में कहानी के मूल स्वरूप को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा,
"मुझे नहीं लगता कि दर्शकों को कहीं भी ऐसा महसूस होगा कि कहानी का दृष्टिकोण बदल दिया गया है। इसकी कथा बिल्कुल पानी की तरह सहज और स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ती है। कहीं भी कोई झटका महसूस नहीं होगा।"
यह बयान उन दर्शकों के लिए अहम माना जा रहा है जो फिल्म की कहानी को लेकर उत्सुक और साथ ही सतर्क भी हैं।
नमित मल्होत्रा और नितेश तिवारी की जमकर की तारीफ
अरुण गोविल ने फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा की दूरदृष्टि की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने एक छोटे से ऑफिस से शुरुआत कर आज भारतीय सिनेमा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि यह फिल्म भारतीय फिल्म उद्योग को तकनीक और विजुअल क्वालिटी के मामले में हॉलीवुड के बराबर खड़ा करने की क्षमता रखती है।
वहीं निर्देशक नितेश तिवारी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा,
"इनके साथ काम करके बहुत मजा आया। ये ज्यादा बोलते नहीं हैं, लेकिन अपनी खामोशी से सब कुछ समझा देते हैं।"
उन्होंने पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी पर भगवान राम की कृपा बनी रहे और यह फिल्म दर्शकों के दिलों तक पहुंचे।
'कोई भी दर्शक अपने आंसू नहीं रोक पाएगा...' अरुण गोविल की एक्टिंग देखकर भावुक हुए कुमार विश्वास
अरुण गोविल के संबोधन के बाद कवि कुमार विश्वास ने भी मंच से एक ऐसा खुलासा किया, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों का ध्यान खींच लिया। उन्होंने बताया कि फिल्म की एडिटिंग और रफ कट देखते समय कई बार उन्हें पूरी फिल्म अकेले देखनी पड़ी ताकि वह हर दृश्य पर विस्तार से नोट्स तैयार कर सकें।
इसी दौरान एक खास सीन ने उन्हें सबसे ज्यादा भावुक कर दिया।
दशरथ और राम के वनवास वाला दृश्य होगा फिल्म का सबसे इमोशनल पल
कुमार विश्वास ने बिना ज्यादा खुलासा किए बताया कि फिल्म में वह दृश्य, जब भगवान राम वनवास के लिए जाते हैं और महाराज दशरथ अपने वचन का पालन करते हुए भीतर के दर्द को दबाते हैं, दर्शकों के लिए बेहद भावुक अनुभव साबित होगा।
उन्होंने कहा,
"मैं ज्यादा रिवील नहीं करूंगा, लेकिन मैं दावा कर सकता हूं कि कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं होगा जो उस दृश्य को देखकर रोए बिना रह सके।"
उनके मुताबिक, उस दृश्य में अरुण गोविल ने ऐसा अभिनय किया है जो लंबे समय तक दर्शकों के दिलों में रहेगा।
ये वीडियो देखें :
'रामायण' के ट्रेलर लॉन्च में दिखा पूरी टीम का आत्मविश्वास
इवेंट के दौरान निर्माता नमित मल्होत्रा, निर्देशक नितेश तिवारी और पूरी टीम ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि फिल्म का उद्देश्य केवल भव्य विजुअल्स दिखाना नहीं, बल्कि रामायण के मूल मूल्यों और भारतीय संस्कृति को पूरी गरिमा के साथ बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करना है।
अरुण गोविल के बयान ने भी इसी विश्वास को मजबूत किया। उन्होंने साफ कहा कि फिल्म की कहानी अपने मूल स्वरूप से भटकी हुई नहीं लगेगी और दर्शकों को रामायण का वही भाव महसूस होगा, जिसके साथ वे वर्षों से जुड़े हुए हैं।
क्यों खास है अरुण गोविल की वापसी?
1987 में रामानंद सागर की 'रामायण' में भगवान राम का किरदार निभाकर अरुण गोविल भारतीय टेलीविजन इतिहास का अमिट चेहरा बन गए थे। करोड़ों लोगों ने उन्हें सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि भगवान राम के स्वरूप के रूप में अपनाया।
अब लगभग चार दशक बाद, उसी महाकाव्य की नई सिनेमाई प्रस्तुति में उनका महाराज दशरथ के रूप में लौटना इस फिल्म को एक भावनात्मक और पीढ़ियों को जोड़ने वाला आयाम देता है।
जहां एक दौर में उन्होंने राम का किरदार निभाया था, वहीं अब वह राम के पिता की भूमिका में दिखाई देंगे। यही बदलाव इस फिल्म को पुराने और नए दर्शकों के बीच एक खास पुल बनाता है।
निष्कर्ष
'रामायण' के ट्रेलर लॉन्च में अरुण गोविल का भाषण सिर्फ एक फिल्मी इवेंट का हिस्सा नहीं था, बल्कि उनके अभिनय सफर, आस्था और रामायण से जुड़े गहरे भावनात्मक रिश्ते की झलक भी था। रामानंद सागर की रामायण में रिजेक्ट होने से लेकर भगवान राम बनने तक का उनका किस्सा और अब महाराज दशरथ के रूप में वापसी, इस पूरे आयोजन की सबसे चर्चित बातों में शामिल रही।
वहीं निर्देशक नितेश तिवारी का यह दावा कि फिल्म के कुछ दृश्य दर्शकों को भावुक कर देंगे, रिलीज से पहले ही फिल्म को लेकर उत्सुकता और उम्मीदें दोनों बढ़ा देता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि बड़े पर्दे पर यह नई 'रामायण' दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।
