नाना पाटेकर की पूरी कहानी: ₹35 से शुरू हुआ सफर, National Award से Padma Shri तक
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| ‘तेरे नाम’ की निर्जरा की पूरी कहानी! |
कुछ चेहरे पर्दे पर आते हैं और सिर्फ किरदार निभाकर चले जाते हैं। लेकिन कुछ चेहरे ऐसे होते हैं, जो किसी एक फिल्म, एक किरदार या एक दौर की याद बन जाते हैं। भूमिका चावला भी उन्हीं अभिनेत्रियों में से एक हैं।
21 अगस्त 1978 को नई दिल्ली में जन्मीं भूमिका चावला ने अपने करियर की शुरुआत हिंदी फिल्मों से नहीं, बल्कि दक्षिण भारतीय सिनेमा से की थी। 2000 में तेलुगु फिल्म ‘Yuvakudu’ से उन्होंने बड़े पर्दे पर कदम रखा और कुछ ही वर्षों में ‘Kushi’, ‘Okkadu’, ‘Missamma’ जैसी फिल्मों के जरिए तेलुगु सिनेमा में अपनी मजबूत पहचान बना ली।
फिर साल 2003 आया।
सलमान खान के साथ ‘तेरे नाम’ में निर्जरा का किरदार भूमिका चावला के करियर का ऐसा मोड़ बना, जिसने उन्हें पूरे देश में पहचान दिलाई। फिल्म की कहानी जितनी दर्दनाक थी, भूमिका की मासूमियत और सादगी ने उनके किरदार को उतना ही यादगार बना दिया। ‘तेरे नाम’ उनका हिंदी फिल्म डेब्यू था।
लेकिन भूमिका चावला की कहानी सिर्फ ‘तेरे नाम’ तक सीमित नहीं है।
यह कहानी एक ऐसे कलाकार की है, जिसने हिंदी, तेलुगु, तमिल, मलयालम, कन्नड़ और दूसरी भारतीय भाषाओं के सिनेमा में काम किया, फिर मुख्यधारा की ग्लैमर रेस से थोड़ा पीछे हटकर अपने लिए अलग रास्ता चुना और समय के साथ फिल्मों में मां, पत्नी और गंभीर चरित्र भूमिकाओं की ओर भी बढ़ीं।
और सबसे दिलचस्प बात यह है कि 25 साल से ज्यादा लंबे करियर के बाद भी भूमिका चावला आज फिल्मों में सक्रिय हैं।
भूमिका चावला का जन्म नई दिल्ली में एक पंजाबी परिवार में हुआ। उनका जन्म नाम रचना चावला बताया जाता है। उनके पिता भारतीय सेना में अधिकारी रहे और सेना की नौकरी की वजह से परिवार को देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने का मौका मिला। उनके बड़े भाई भी सैन्य सेवा में रहे हैं।
भूमिका ने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली में पूरी की।
बचपन का यह माहौल उनके व्यक्तित्व पर भी असर डालता दिखाई देता है। फिल्मों की चमक-दमक से दूर अनुशासन और अलग-अलग शहरों को करीब से देखने का अनुभव उनके जीवन का हिस्सा रहा।
उन्होंने एक इंटरव्यू में अपने परिवार के बारे में बताते हुए कहा था कि पिता की पोस्टिंग के कारण परिवार को काफी यात्रा करनी पड़ती थी। वह तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं।
शायद यही वजह थी कि बाद में मुंबई जैसे बड़े शहर में जाकर अपने दम पर करियर शुरू करने का फैसला उनके लिए सिर्फ ग्लैमर की तलाश नहीं था, बल्कि एक नई जिंदगी की शुरुआत भी थी।
भूमिका चावला ने 1997 में मुंबई का रुख किया।
उस समय उनके पास कोई बड़ा फिल्मी बैकग्राउंड नहीं था। उन्होंने मॉडलिंग और विज्ञापन फिल्मों से शुरुआत की। अलग-अलग ब्रांड्स के विज्ञापनों में नजर आने के बाद धीरे-धीरे उनका चेहरा लोगों को पहचान में आने लगा।
उनके शुरुआती काम में विज्ञापनों के साथ म्यूजिक वीडियो भी शामिल थे।
एक पुराने इंटरव्यू में भूमिका ने बताया था कि उन्होंने कंप्यूटर ब्रांड के प्रिंट विज्ञापन से मॉडलिंग की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्हें कई टेलीविजन विज्ञापन मिले। वह कुमार सानू के म्यूजिक वीडियो ‘Masoom Tera Chehra’ में भी नजर आई थीं।
यानी फिल्मों तक पहुंचने से पहले भूमिका ने वह लंबा रास्ता तय किया, जिसे अक्सर दर्शक पर्दे के पीछे छोड़ देते हैं।
विज्ञापन से म्यूजिक वीडियो, म्यूजिक वीडियो से टेलीविजन और फिर फिल्मों तक पहुंचना उनकी यात्रा का शुरुआती अध्याय था।
फिल्मों में आने से पहले भूमिका चावला टेलीविजन पर भी दिखाई दीं।
वह Zee TV के लोकप्रिय युवा धारावाहिक ‘Hip Hip Hurray’ से जुड़ी थीं। इसके अलावा ‘Star Best Sellers – Fursat Mein’ में भी काम किया।
उस दौर में टेलीविजन कई कलाकारों के लिए फिल्मों तक पहुंचने का महत्वपूर्ण माध्यम था।
लेकिन भूमिका के लिए अगला कदम दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री बनने वाला था।
साल 2000 में भूमिका चावला ने तेलुगु फिल्म ‘Yuvakudu’ से अपना फिल्मी डेब्यू किया। फिल्म में उन्होंने सिंधु का किरदार निभाया।
यह शुरुआत महत्वपूर्ण थी क्योंकि भूमिका ने अपना फिल्मी करियर सीधे बॉलीवुड से नहीं, बल्कि तेलुगु सिनेमा से शुरू किया।
इसके बाद उन्होंने तेजी से दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम करना शुरू किया।
2001 में तमिल फिल्म ‘Badri’ और तेलुगु फिल्म ‘Kushi’ ने उनके करियर को नई गति दी। ‘Kushi’ में वह पवन कल्याण के साथ नजर आईं और फिल्म की सफलता ने उन्हें तेलुगु सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया।
‘Kushi’ सिर्फ एक और फिल्म नहीं थी।
इसने भूमिका को यह भरोसा दिया कि वह बड़े स्टार्स के साथ अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।
‘Kushi’ की सफलता के बाद भूमिका चावला के अभिनय को अवॉर्ड्स में भी पहचान मिली।
उन्हें 2002 के Filmfare Awards South में तेलुगु फिल्म के लिए Best Actress का सम्मान मिला।
यह उनके शुरुआती करियर का बड़ा पड़ाव था।
एक ऐसी अभिनेत्री, जिसने कुछ ही समय पहले फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था, अब अवॉर्ड जीत चुकी थी।
इसके बाद उनके पास फिल्मों की कमी नहीं रही।
2003 भूमिका चावला के करियर का शायद सबसे महत्वपूर्ण साल था।
उन्होंने महेश बाबू के साथ ‘Okkadu’, जूनियर एनटीआर के साथ ‘Simhadri’ और ‘Missamma’ जैसी फिल्मों में काम किया।
‘Okkadu’ में उन्होंने स्वप्ना रेड्डी का किरदार निभाया। फिल्म में उनके साथ महेश बाबू और प्रकाश राज जैसे कलाकार थे। फिल्म को बड़ी सफलता मिली और भूमिका का किरदार दर्शकों के बीच लोकप्रिय हुआ।
इसके बाद ‘Simhadri’ में जूनियर एनटीआर के साथ उनकी जोड़ी दिखाई दी।
इन फिल्मों ने भूमिका को सिर्फ खूबसूरत अभिनेत्री के रूप में नहीं, बल्कि दक्षिण भारतीय फिल्मों की प्रमुख अभिनेत्रियों में स्थापित किया।
फिर आई ‘Missamma’।
यह फिल्म भूमिका के अभिनय करियर के लिए विशेष महत्व रखती है।
फिल्म में उन्होंने मेघना का किरदार निभाया और उनके अभिनय को खूब सराहा गया। ‘Missamma’ ने चार Nandi Awards जीते, जिनमें भूमिका चावला का Best Actress पुरस्कार भी शामिल था।
इसके अलावा उन्हें ‘Missamma’ के लिए CineMAA Award भी मिला।
यानी एक ही दौर में भूमिका के खाते में लोकप्रिय फिल्में भी थीं और अभिनय के लिए सम्मान भी।
अगर साउथ सिनेमा ने भूमिका चावला को स्टार बनाया, तो ‘तेरे नाम’ ने उन्हें देशभर के दर्शकों तक पहुंचा दिया।
2003 में रिलीज हुई ‘तेरे नाम’ में उन्होंने सलमान खान के साथ निर्जरा भारद्वाज का किरदार निभाया।
यह भूमिका एक ऐसी लड़की की थी, जिसकी सादगी और संवेदनशीलता फिल्म की पूरी भावनात्मक दुनिया का केंद्र बन जाती है।
फिल्म का निर्देशन सतीश कौशिक ने किया था और यह तमिल फिल्म ‘Sethu’ का हिंदी रीमेक थी।
सलमान खान के राधे और भूमिका की निर्जरा की प्रेम कहानी ने उस समय दर्शकों को भावुक कर दिया।
खास बात यह थी कि भूमिका इस फिल्म में किसी स्थापित बॉलीवुड अभिनेत्री के रूप में नहीं आई थीं। वह दक्षिण भारतीय फिल्मों में पहचान बना चुकी थीं, लेकिन हिंदी दर्शकों के लिए उनका चेहरा नया था।
और फिर ‘तेरे नाम’ के बाद उन्हें पहचानने वालों की संख्या अचानक बहुत बढ़ गई।
उनके चेहरे की मासूमियत, संवाद बोलने का अंदाज और किरदार की सादगी ने उन्हें बाकी ग्लैमरस भूमिकाओं से अलग खड़ा कर दिया।
उन्हें ‘तेरे नाम’ के लिए Zee Cine Awards में Best Female Debut का सम्मान मिलने का भी उल्लेख मिलता है।
यह सवाल भूमिका चावला के करियर को समझने के लिए बेहद जरूरी है।
‘तेरे नाम’ जैसी चर्चित फिल्म के बाद आमतौर पर किसी अभिनेत्री से उम्मीद की जाती है कि वह लगातार बड़े हिंदी प्रोजेक्ट्स करे।
लेकिन भूमिका ने ऐसा नहीं किया।
उन्होंने बॉलीवुड के साथ-साथ दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम जारी रखा। 2004 में वह ‘Run’ में आर. माधवन के साथ दिखाई दीं। उसी साल ‘Dil Ne Jise Apna Kahaa’ में सलमान खान और प्रीति जिंटा के साथ भी नजर आईं।
इसके बाद ‘Silsiilay’, ‘Dil Jo Bhi Kahey...’ और दूसरी फिल्मों में भी उन्होंने काम किया।
लेकिन बॉलीवुड में उन्हें उस तरह के लगातार मुख्य भूमिकाओं वाले प्रोजेक्ट नहीं मिले, जैसी उम्मीद ‘तेरे नाम’ के बाद बन गई थी।
इसका एक कारण यह भी था कि वह सिर्फ हिंदी फिल्मों पर निर्भर नहीं थीं।
उन्होंने तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, पंजाबी और अन्य भारतीय भाषाओं की फिल्मों में काम जारी रखा।
अपने एक पुराने इंटरव्यू में भूमिका चावला ने बताया था कि ‘Okkadu’ के बाद उन्होंने फिल्मों को लेकर ज्यादा चयनात्मक होना शुरू किया।
उनके अनुसार, शुरुआत में वह मिलने वाले ज्यादातर ऑफर्स कर लेती थीं, लेकिन एक समय के बाद वह ऐसे प्रोजेक्ट चुनना चाहती थीं जो उन्हें व्यक्तिगत संतुष्टि दें।
यह भी महत्वपूर्ण है कि जब वह तेलुगु फिल्मों में कम दिखाई देती थीं, तब वह दूसरी भाषाओं की फिल्मों में काम कर रही थीं।
यानी बाहर से देखने पर भले ही उनका करियर कुछ समय के लिए धीमा दिखाई देता हो, लेकिन वास्तव में उन्होंने अपना रास्ता बदला था।
यह वही फैसला था जिसने आगे चलकर उनके करियर को सिर्फ एक भाषा या एक इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहने दिया।
2007 में आई ‘Gandhi, My Father’ भूमिका चावला के करियर की अलग तरह की फिल्म थी।
यह फिल्म महात्मा गांधी और उनके बेटे हरिलाल गांधी के जटिल रिश्ते पर आधारित थी। फिल्म में अक्षय खन्ना, दर्शन जरीवाला और शेफाली शाह जैसे कलाकार थे।
भूमिका ने हरिलाल की पत्नी का किरदार निभाया।
फिल्म की समीक्षा करते हुए Hindustan Times ने भूमिका के अभिनय में मानवीय संवेदना को रेखांकित किया था और उनके किरदार को फिल्म की भावनात्मक परतों में महत्वपूर्ण माना था।
यह भूमिका इस बात का प्रमाण थी कि भूमिका सिर्फ रोमांटिक फिल्मों की नायिका बनकर नहीं रहना चाहती थीं।
वह ऐसे किरदारों की तरफ भी बढ़ रही थीं, जहां अभिनय की चमक चेहरे से ज्यादा किरदार की भावनाओं में छिपी होती है।
भूमिका चावला की निजी जिंदगी भी काफी समय तक मीडिया की दिलचस्पी का विषय रही।
उन्होंने योग गुरु भारत ठाकुर से 21 अक्टूबर 2007 को शादी की। शादी नासिक के देवली कैंप स्थित गुरुद्वारे में हुई थी।
शादी से पहले दोनों लंबे समय तक एक-दूसरे को जानते थे।
एक इंटरव्यू में भूमिका ने बताया था कि उनकी मुलाकात 2004 में भारत ठाकुर से हुई थी और शादी से पहले वे लगभग तीन साल तक डेट कर चुके थे।
शादी के बाद भूमिका ने अपना नाम बदलने के बजाय भूमिका चावला के नाम से काम जारी रखा।
यह बात भी उल्लेखनीय है कि एक इंटरव्यू में भारत ठाकुर ने कहा था कि वह नहीं चाहते कि शादी के बाद भूमिका अपनी पेशेवर पहचान खो दें।
यह उस दौर के हिसाब से एक खास बात थी, जब शादी के बाद अभिनेत्रियों के नाम और करियर को लेकर कई तरह की सामाजिक अपेक्षाएं होती थीं।
भूमिका और भारत ठाकुर के एक बेटे हैं।
2014 में उनके बेटे का जन्म हुआ। 2016 के एक इंटरव्यू में भूमिका ने अपने बेटे यश के साथ मातृत्व के अनुभव को बेहद भावुक शब्दों में साझा किया था। उन्होंने कहा था कि मां बनना उनके लिए जिंदगी का बहुत खास अनुभव रहा।
उनके लिए परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाना जिंदगी का नया अध्याय था।
शादी और मातृत्व के बाद भी उन्होंने फिल्मों से पूरी तरह दूरी नहीं बनाई।
बल्कि उन्होंने धीरे-धीरे ऐसे किरदार स्वीकार करने शुरू किए, जो उनकी उम्र और अनुभव के साथ अधिक स्वाभाविक लगते थे।
भूमिका चावला ने तेलुगु सिनेमा में ‘Anasuya’ जैसी फिल्म में भी काम किया।
उनकी फिल्मोग्राफी में ‘Anasuya’, ‘Satyabhama’, ‘Swagatam’, ‘Mallepuvvu’, ‘Bhramaram’ जैसी अलग-अलग तरह की फिल्में शामिल हैं।
यह दौर बताता है कि भूमिका किसी एक तरह के किरदार में बंधना नहीं चाहती थीं।
कभी वह रोमांटिक हीरोइन थीं, कभी गंभीर ड्रामा का हिस्सा बनीं और कभी थ्रिलर में नजर आईं।
2016 की फिल्म ‘M.S. Dhoni: The Untold Story’ में भूमिका चावला ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत ने महेंद्र सिंह धोनी की भूमिका निभाई थी और भूमिका फिल्म के कलाकारों का हिस्सा थीं।
यह फिल्म भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित खिलाड़ियों में से एक महेंद्र सिंह धोनी के जीवन पर आधारित थी।
भूमिका के लिए यह फिल्म हिंदी दर्शकों के बीच उनकी वापसी के महत्वपूर्ण पड़ावों में गिनी जा सकती है।
2017 की तेलुगु फिल्म ‘MCA: Middle Class Abbayi’ में भूमिका चावला ने ज्योति का किरदार निभाया।
फिल्म में नानी और साई पल्लवी मुख्य भूमिकाओं में थे। भूमिका का किरदार कहानी में महत्वपूर्ण पारिवारिक भूमिका निभाता है।
यह फिल्म उनके करियर में एक और बदलाव का संकेत थी।
अब वह सिर्फ युवा अभिनेत्री नहीं थीं।
वह उन किरदारों में दिखाई दे रही थीं, जहां उम्र और अनुभव को कहानी का हिस्सा बनाया जा रहा था।
2022 की फिल्म ‘Sita Ramam’ में भूमिका चावला एक महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आईं।
फिल्म में दुलकर सलमान और मृणाल ठाकुर मुख्य भूमिकाओं में थे। भूमिका ने वैदेही शर्मा का किरदार निभाया।
फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
यह भूमिका चावला के लिए इसलिए भी खास थी क्योंकि इस फिल्म ने उन्हें एक नई पीढ़ी के दर्शकों तक पहुंचाया।
यानी ‘तेरे नाम’ से पहचान बनाने वाली अभिनेत्री दशकों बाद भी नए दर्शकों के बीच जगह बना रही थीं।
2023 में भूमिका चावला ‘Kisi Ka Bhai Kisi Ki Jaan’ में सलमान खान के साथ फिर दिखाई दीं।
यह उनके और सलमान खान के बीच दो दशक बाद एक तरह का पुनर्मिलन था, क्योंकि दोनों की जोड़ी ‘तेरे नाम’ में बेहद लोकप्रिय हुई थी।
हालांकि दोनों की भूमिकाएं ‘तेरे नाम’ जैसी प्रेम कहानी के केंद्र में नहीं थीं, लेकिन दर्शकों के लिए दोनों को एक ही फिल्म में देखना अपने आप में पुरानी यादों को वापस लाने वाला क्षण था।
भूमिका चावला का करियर कई भाषाओं में फैला हुआ है, इसलिए उनकी सह-कलाकारों की सूची भी काफी लंबी है।
हिंदी सिनेमा में उन्होंने सलमान खान, आर. माधवन, प्रीति जिंटा, अक्षय खन्ना, अनिल कपूर, सुशांत सिंह राजपूत जैसे कलाकारों के साथ काम किया।
दक्षिण भारतीय सिनेमा में उनकी जोड़ी पवन कल्याण, महेश बाबू, जूनियर एनटीआर, वेंकटेश, सूर्या, विजय और कई अन्य प्रमुख कलाकारों के साथ बनी।
‘Sillunu Oru Kaadhal’ में वह सूर्या और ज्योतिका के साथ थीं, जबकि ‘Okkadu’ में महेश बाबू और प्रकाश राज के साथ दिखाई दीं।
उनकी फिल्मोग्राफी की खासियत यही है कि उन्होंने अलग-अलग पीढ़ियों के कलाकारों के साथ काम किया।
भूमिका चावला उन अभिनेत्रियों में रही हैं जिनका करियर विवादों से ज्यादा काम के लिए चर्चा में रहा।
उनकी निजी जिंदगी को लेकर समय-समय पर मीडिया में खबरें जरूर आईं, लेकिन कोई बड़ा ऐसा विवाद नहीं रहा जिसने उनके पूरे करियर को परिभाषित किया हो।
इसलिए उनकी कहानी को सनसनीखेज विवादों से जोड़ने के बजाय उनके काम और करियर के उतार-चढ़ाव के संदर्भ में देखना ज्यादा उचित है।
उनकी सबसे बड़ी चुनौती शायद यही थी कि ‘तेरे नाम’ जैसी बड़ी हिंदी पहचान के बाद भी वह बॉलीवुड में उसी स्तर की लगातार मुख्य भूमिकाओं वाली स्टार नहीं बन पाईं।
लेकिन इसे सिर्फ असफलता कहना भी सही नहीं होगा।
क्योंकि उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में लगातार काम जारी रखा और अलग-अलग भाषाओं में अपनी जगह बनाए रखी।
भूमिका चावला की सटीक नेट वर्थ का कोई भरोसेमंद, आधिकारिक सार्वजनिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
इंटरनेट पर कई वेबसाइट्स उनकी संपत्ति और कमाई को लेकर अलग-अलग रकम बताती हैं, लेकिन इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती।
इसलिए किसी अनुमानित करोड़ों की रकम को तथ्य के रूप में लिखना सही नहीं होगा।
इतना जरूर कहा जा सकता है कि दो दशक से अधिक समय से फिल्मों में सक्रिय रहने और कई भाषाओं में काम करने के कारण उनका करियर आर्थिक रूप से भी लंबा और विविध रहा है।
लेकिन उनकी कुल संपत्ति का निश्चित आंकड़ा सार्वजनिक रूप से प्रमाणित नहीं है।
भूमिका चावला की सार्वजनिक छवि हमेशा से अपेक्षाकृत सादगीपूर्ण रही है।
उन्होंने लंबे समय तक बॉलीवुड की पार्टी संस्कृति या लगातार सुर्खियों में रहने के बजाय काम को प्राथमिकता दी।
शादी के बाद उनका जीवन मुंबई और भारत ठाकुर के काम के कारण विदेश यात्रा के बीच भी चलता रहा। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि भारत के काम की वजह से वह मुंबई और दुबई के बीच यात्रा करती थीं।
यही शायद उनकी सार्वजनिक छवि का सबसे खास हिस्सा है—एक ऐसी अभिनेत्री जिसने प्रसिद्धि हासिल की, लेकिन प्रसिद्धि को अपनी पूरी पहचान नहीं बनने दिया।
भूमिका के फिल्मी सफर की एक दिलचस्प बात यह है कि ‘तेरे नाम’ से पहले ही वह विज्ञापनों और म्यूजिक वीडियो के जरिए दर्शकों की नजर में आ चुकी थीं।
उनका Pond’s से जुड़ा विज्ञापन काफी पहचाना गया और विज्ञापनों के जरिए उनकी स्क्रीन प्रेजेंस ने फिल्म निर्माताओं का ध्यान खींचा। IMDb की प्रोफाइल भी उनके विज्ञापन और मॉडलिंग से फिल्मों तक पहुंचने के सफर का उल्लेख करती है।
यानी निर्जरा को पर्दे पर देखने से बहुत पहले कैमरा भूमिका चावला के चेहरे से परिचित हो चुका था।
भूमिका चावला के करियर को समझने का सबसे सही तरीका शायद यही है कि उन्हें सिर्फ ‘तेरे नाम की अभिनेत्री’ कहकर न देखा जाए।
उन्होंने तेलुगु, तमिल, हिंदी, मलयालम, कन्नड़ और दूसरी भारतीय भाषाओं में काम किया।
उनकी फिल्मोग्राफी में रोमांस, एक्शन, ड्रामा, थ्रिलर, बायोग्राफिकल फिल्म और सोशल ड्रामा—लगभग हर तरह का रंग दिखाई देता है।
यही विविधता उनके करियर को खास बनाती है।
आज भूमिका चावला फिल्मों से दूर नहीं हैं।
2025 में वह तमिल फिल्म ‘School’ में नजर आईं, जिसमें उनके साथ योगी बाबू और के. एस. रविकुमार जैसे कलाकार थे। फिल्म 23 मई 2025 को रिलीज हुई थी।
इसके बाद 2026 में वह निर्देशक गुणशेखर की तेलुगु फिल्म ‘Euphoria’ में नजर आईं।
6 फरवरी 2026 को रिलीज हुई इस फिल्म में भूमिका ने विंध्या वेमुलापल्ली का किरदार निभाया। यह एक सामाजिक ड्रामा है, जिसमें युवा अपराध, परिवार, जिम्मेदारी और नैतिक फैसलों जैसे गंभीर सवालों को उठाया गया।
‘Euphoria’ में भूमिका का किरदार एक मां और शिक्षा संस्थान से जुड़ी महिला के रूप में कहानी के महत्वपूर्ण नैतिक संघर्ष का हिस्सा है।
समीक्षकों ने उनके अभिनय को फिल्म के मजबूत पक्षों में शामिल किया। India Today ने उनके प्रदर्शन को संयमित और भावनात्मक रूप से प्रभावी बताया।
यह बात खास है कि 2003 में ‘तेरे नाम’ की युवा निर्जरा का किरदार निभाने वाली भूमिका चावला आज ऐसे परिपक्व किरदार निभा रही हैं, जिनमें उम्र से ज्यादा जीवन का अनुभव बोलता है।
भूमिका चावला की कहानी को अगर एक लाइन में समेटना हो, तो शायद यह कहा जा सकता है—
उन्होंने स्टारडम का पीछा करने के बजाय अपने करियर को समय के साथ बदलना चुना।
‘Yuvakudu’ से शुरुआत।
‘Kushi’ से पहचान।
‘Okkadu’ और ‘Missamma’ से अभिनय की ताकत।
‘तेरे नाम’ से देशव्यापी लोकप्रियता।
‘Gandhi, My Father’ से गंभीर अभिनय।
‘M.S. Dhoni: The Untold Story’ से हिंदी सिनेमा में वापसी।
‘Sita Ramam’ से नई पीढ़ी से जुड़ाव।
और फिर ‘Euphoria’ जैसी सामाजिक फिल्म में एक परिपक्व भूमिका।
यह सफर सीधी रेखा में नहीं चला।
कभी सफलता तेज रही, कभी रफ्तार धीमी हुई, कभी फिल्मों के बीच अंतर आया।
लेकिन भूमिका चावला ने काम करना नहीं छोड़ा।
भूमिका चावला का नाम सुनते ही बहुत से दर्शकों के मन में आज भी ‘तेरे नाम’ की निर्जरा की तस्वीर उभर आती है।
लेकिन भूमिका की असली कहानी उस एक किरदार से कहीं बड़ी है।
वह एक आर्मी परिवार से निकलीं, 1997 में मुंबई आईं, विज्ञापनों और म्यूजिक वीडियो से शुरुआत की, टीवी पर काम किया, 2000 में फिल्मों में कदम रखा और देखते ही देखते दक्षिण भारतीय सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं।
फिर बॉलीवुड ने उन्हें ‘तेरे नाम’ की निर्जरा के रूप में याद रखा।
लेकिन उन्होंने अपने करियर को वहीं रोकने के बजाय अलग-अलग भाषाओं और अलग-अलग तरह के किरदारों के साथ आगे बढ़ाया।
आज जब वह मां, शिक्षा जगत से जुड़ी महिला या गंभीर सामाजिक किरदार निभाती हैं, तो यह सिर्फ एक अभिनेत्री का बदलता चेहरा नहीं है।
यह समय के साथ खुद को बदलने की कला है।
शायद इसी वजह से भूमिका चावला का सफर हमें यह याद दिलाता है कि हर कलाकार की सफलता का मतलब लगातार सुर्खियों में रहना नहीं होता। कभी-कभी असली सफलता यह होती है कि इतने वर्षों बाद भी दर्शक आपका चेहरा देखते ही किसी किरदार को याद कर लें।
और भूमिका चावला के लिए वह किरदार आज भी निर्जरा है—लेकिन उनके करियर की कहानी सिर्फ निर्जरा पर खत्म नहीं होती।
वह कहानी अब भी जारी है।
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