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| 3 साल संघर्ष… फिर चमका सितारा! |
हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जिनका नाम सुनते ही किसी एक फिल्म का चेहरा आंखों के सामने आ जाता है। दीपक तिजोरी भी ऐसे ही कलाकार हैं। वह न तो हमेशा फिल्म के हीरो रहे और न ही उनकी पहचान किसी एक तरह के किरदार तक सीमित रही। लेकिन 1990 के दशक में उन्होंने जिस तरह सहायक भूमिकाओं में अपनी जगह बनाई, उसने उन्हें बॉलीवुड के यादगार चरित्र अभिनेताओं की कतार में खड़ा कर दिया।
‘आशिकी’, ‘खिलाड़ी’, ‘जो जीता वही सिकंदर’, ‘कभी हां कभी ना’, ‘अंजाम’, ‘गुलाम’ और ‘बादशाह’ जैसी फिल्मों में नजर आए दीपक तिजोरी ने दर्शकों के बीच एक अलग पहचान बनाई। खास बात यह है कि उन्होंने केवल अभिनेता बनकर संतुष्ट रहने के बजाय निर्देशन की दुनिया में भी कदम रखा।
लेकिन दीपक तिजोरी की कहानी सिर्फ फिल्मों की सूची नहीं है।
यह कहानी उस कलाकार की है जिसने कभी निर्माताओं के दफ्तरों के बाहर घंटों इंतजार किया, छोटे-छोटे रोल किए, अजीबोगरीब नौकरियां कीं और फिर धीरे-धीरे उस मुकाम तक पहुंचा जहां बड़े सितारों वाली फिल्मों में भी उनकी मौजूदगी याद रखी गई।
आज, 28 अगस्त 2026 को दीपक तिजोरी अपना 65वां जन्मदिन मना रहे हैं।
और दिलचस्प बात यह है कि इतने वर्षों बाद भी उनका सफर खत्म नहीं हुआ है। 2026 में वह गुजराती फिल्म ‘Get Set Go’ के जरिए एक बार फिर बड़े पर्दे पर सक्रिय नजर आए हैं।
दीपक तिजोरी का जन्म 28 अगस्त 1961 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने मुंबई के Narsee Monjee College में पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों में ही उनका झुकाव अभिनय की तरफ बढ़ने लगा और उन्होंने थिएटर से जुड़ना शुरू किया।
यही थिएटर उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
उनके थिएटर ग्रुप में उस दौर के कई ऐसे युवा कलाकार और फिल्मकार थे, जो आगे चलकर हिंदी सिनेमा में बड़े नाम बने। इनमें आमिर खान, परेश रावल, आशुतोष गोवारिकर और विपुल शाह जैसे नाम शामिल थे।
दीपक तिजोरी की मां के बारे में उपलब्ध प्रोफाइल में बताया गया है कि वह पारसी समुदाय से थीं और डांसर तथा रेडियो आर्टिस्ट के रूप में काम कर चुकी थीं। दीपक ने उन्हें अपनी प्रेरणा भी बताया है।
यानी कला उनके लिए पूरी तरह अनजानी दुनिया नहीं थी। लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाना फिर भी आसान नहीं था।
आज किसी कलाकार को बड़े सितारों के साथ काम करते देखकर यह अनुमान लगाना आसान होता है कि शायद उसका फिल्मी सफर शुरुआत से ही आरामदायक रहा होगा।
दीपक तिजोरी की कहानी इसके बिल्कुल उलट थी।
उन्होंने खुद अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया था कि करीब तीन साल तक वह निर्माताओं के दफ्तरों के बाहर चक्कर लगाते रहे। इस दौरान उन्हें बेहद छोटे और मामूली किरदार मिले।
उनका संघर्ष सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं था।
फिल्मों में काम मिलने से पहले उन्होंने अलग-अलग तरह के काम भी किए। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने Cine Blitz magazine में स्पेस सेलर के तौर पर काम किया और Hotel Searock में फ्रंट ऑफिस मैनेजर की नौकरी भी की।
यह वह दौर था जब उनके पास कोई बड़ा फिल्मी ‘गॉडफादर’ नहीं था।
उनके सामने दो रास्ते थे—या तो संघर्ष से थककर वापस लौट जाएं या फिर लगातार कोशिश करते रहें।
उन्होंने दूसरा रास्ता चुना।
दीपक तिजोरी ने 1990 के आसपास फिल्मों में अपनी शुरुआत की। उनकी शुरुआती फिल्मों में ‘क्रोध’ का नाम आता है। इस फिल्म में उनका रोल इतना छोटा था कि खुद दीपक ने बाद में याद किया कि वह मुख्य खलनायक के पीछे खड़े कई लोगों में से एक थे और उनके हिस्से में केवल एक लाइन आई थी।
किसी नए अभिनेता के लिए ऐसा रोल निराशाजनक हो सकता था।
लेकिन दीपक ने उसे शुरुआत माना।
इसके बाद उन्हें लगातार फिल्मों में छोटे-बड़े किरदार मिलने लगे। वह ऐसे कलाकार बनते गए जिनकी स्क्रीन प्रेजेंस सीमित समय में भी दर्शकों का ध्यान खींच लेती थी।
1990 में ही उन्हें ‘आशिकी’ जैसी फिल्म का हिस्सा बनने का मौका मिला।
और यही फिल्म उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई।
1990 की ‘आशिकी’ हिंदी सिनेमा की उन फिल्मों में गिनी जाती है जिनके संगीत ने पूरी पीढ़ी पर असर डाला।
राहुल रॉय और अनु अग्रवाल की इस प्रेम कहानी में दीपक तिजोरी भी नजर आए। उनका किरदार मुख्य भूमिका में नहीं था, लेकिन फिल्म की लोकप्रियता ने उन्हें दर्शकों के बीच पहचान दिलाई।
यह वह समय था जब दीपक धीरे-धीरे ‘मुख्य अभिनेता’ नहीं बल्कि ‘याद रहने वाले सहायक अभिनेता’ के रूप में अपनी जगह बना रहे थे।
उनकी खासियत थी कि वह फिल्म की कहानी में मौजूद रहते हुए भी अपने किरदार को अलग रंग दे देते थे।
1992 में दीपक तिजोरी ‘खिलाड़ी’ में नजर आए। अक्षय कुमार की इस फिल्म ने एक्शन और थ्रिलर शैली में अपनी पहचान बनाई और दीपक भी इसके कलाकारों का हिस्सा थे।
लेकिन उसी साल उनकी जिंदगी की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक आई—
‘जो जीता वही सिकंदर’।
यह फिल्म उनके करियर की पहचान बन गई।
मंसूर खान निर्देशित ‘जो जीता वही सिकंदर’ 1992 में रिलीज हुई थी। फिल्म में आमिर खान, आयशा जुल्का, दीपक तिजोरी, मामिक सिंह और पूजा बेदी प्रमुख भूमिकाओं में थे।
दीपक ने फिल्म में शेखर मल्होत्रा का किरदार निभाया।
शेखर एक अमीर, आत्मविश्वासी और प्रतिस्पर्धी युवक था। वह फिल्म के नायक संजयलाल शर्मा यानी आमिर खान के किरदार के बिल्कुल विपरीत नजर आता है।
फिल्म में दोनों के बीच की प्रतिद्वंद्विता कहानी का अहम हिस्सा थी।
और यही वजह है कि दीपक का किरदार सिर्फ ‘हीरो का दोस्त’ या ‘सहायक कलाकार’ बनकर नहीं रह गया।
शेखर के रूप में दीपक ने एक ऐसा किरदार निभाया जो दर्शकों को कभी पसंद आया, कभी खलनायक जैसा लगा और कभी उसकी प्रतिभा की वजह से प्रभावित भी किया।
आज भी ‘जो जीता वही सिकंदर’ को हिंदी सिनेमा की यादगार coming-of-age फिल्मों में गिना जाता है और समय के साथ इसे cult following मिली है।
अगस्त 2026 में दिए एक इंटरव्यू में दीपक तिजोरी ने इस फिल्म से जुड़ा एक अहम किस्सा साझा किया। उनके अनुसार फिल्म का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा शूट होने के बाद मिलिंद सोमन को फिल्म से हटाया गया और इसके बाद उन्हें शेखर के रोल में लिया गया।
यानी जिस किरदार को आज दर्शक दीपक तिजोरी से जोड़ते हैं, उसके पीछे भी एक अप्रत्याशित casting बदलाव की कहानी थी।
सहायक अभिनेता के रूप में पहचान बनने के बाद दीपक को लीड रोल भी मिला।
1993 में आई ‘पहला नशा’ में वह मुख्य भूमिका में नजर आए। फिल्म का निर्देशन आशुतोष गोवारिकर ने किया था और इसमें पूजा भट्ट तथा रवीना टंडन भी थीं।
फिल्म की खासियत आज इसके कलाकारों से जुड़ी एक दुर्लभ बात के कारण भी याद की जाती है।
‘पहला नशा’ में आमिर खान, शाहरुख खान और सैफ अली खान एक ही फिल्मी फ्रेम/सीक्वेंस से जुड़े नजर आए थे। इसके अलावा राहुल रॉय और सुदेश बेरी की भी मौजूदगी थी।
हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही।
यह दीपक तिजोरी के करियर का एक महत्वपूर्ण सबक था—मुख्य भूमिका मिल जाना और स्टार बन जाना दो अलग बातें हैं।
1994 में दीपक तिजोरी ‘कभी हां कभी ना’ में शाहरुख खान के साथ नजर आए।
फिल्म में शाहरुख खान ने सुनील का किरदार निभाया था और दीपक तिजोरी भी कहानी के अहम हिस्से में मौजूद थे।
बाद में दीपक ने शाहरुख खान के साथ ‘अंजाम’ और ‘बादशाह’ जैसी फिल्मों में भी काम किया।
यह उनके करियर की एक खास बात रही कि उन्होंने अलग-अलग दौर में कई बड़े सितारों के साथ स्क्रीन शेयर की।
दीपक तिजोरी की फिल्मोग्राफी को देखें तो उनके सह-कलाकारों की सूची काफी लंबी है।
उन्होंने आमिर खान के साथ ‘जो जीता वही सिकंदर’ और ‘पहला नशा’ जैसी फिल्मों में काम किया।
शाहरुख खान के साथ ‘कभी हां कभी ना’, ‘अंजाम’ और ‘बादशाह’ जैसी फिल्मों में नजर आए।
अक्षय कुमार के साथ ‘खिलाड़ी’ में काम किया।
‘आशिकी’ में राहुल रॉय और अनु अग्रवाल के साथ दिखाई दिए।
‘पहला नशा’ में पूजा भट्ट और रवीना टंडन के साथ स्क्रीन शेयर की।
इसके अलावा ‘गुलाम’ में आमिर खान के साथ और ‘बादशाह’ में शाहरुख खान के साथ उनकी मौजूदगी ने उनके करियर को और मजबूत किया।
यही वजह है कि दीपक तिजोरी की पहचान सिर्फ किसी एक स्टार या एक दशक तक सीमित नहीं रही।
1998 की ‘गुलाम’ और 1999 की ‘बादशाह’ उनके चर्चित कामों में शामिल हैं।
‘गुलाम’ में आमिर खान के साथ उनकी मौजूदगी ने 90 के दशक के लोकप्रिय सिनेमा में उनकी जगह मजबूत की।
इसके अगले ही साल ‘बादशाह’ में शाहरुख खान के साथ वह नजर आए।
यह वह दौर था जब दीपक तिजोरी लगातार बड़े बैनर और बड़े सितारों वाली फिल्मों का हिस्सा बन रहे थे।
उनका करियर शायद किसी पारंपरिक ‘सुपरस्टार’ की तरह नहीं चला, लेकिन उनकी निरंतरता अपने आप में उल्लेखनीय थी।
दीपक तिजोरी की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा शायद यह है कि उन्होंने कैमरे के सामने सफलता मिलने के बाद कैमरे के पीछे जाने का फैसला किया।
2003 में उन्होंने ‘Oops!’ से निर्देशन की शुरुआत की। फिल्म का विषय काफी बोल्ड था और इसमें पुरुष स्ट्रिप क्लब की दुनिया को कहानी का आधार बनाया गया था।
इसके बाद उन्होंने निर्देशन में कई अलग-अलग तरह की फिल्में कीं।
इनमें ‘Fareb’, ‘Khamoshh... Khauff Ki Raat’, ‘Tom, Dick and Harry’ और ‘Fox’ जैसी फिल्में शामिल हैं।
‘Fareb’ खास तौर पर चर्चा में रही क्योंकि इसमें शिल्पा शेट्टी और शमिता शेट्टी बहनों ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं।
इस तरह दीपक ने यह साबित किया कि वह केवल अभिनेता बनकर इंडस्ट्री में टिके रहने वाले कलाकार नहीं थे।
वह कहानी, निर्देशन और फिल्म निर्माण के दूसरे पहलुओं को भी समझना चाहते थे।
दीपक तिजोरी छोटे पर्दे के चर्चित रियलिटी शो ‘Bigg Boss’ के पहले सीजन का भी हिस्सा रहे।
उन्हें शो में सलिल अंकोला की जगह शामिल किया गया था।
यह उनके लिए एक अलग तरह का अनुभव था क्योंकि यहां उन्हें scripted फिल्मी किरदार की जगह अपनी वास्तविक personality के साथ दर्शकों के सामने रहना था।
दीपक तिजोरी की निजी जिंदगी लंबे समय तक मीडिया की नजरों में भी रही है।
उनका नाम शिवानी तिजोरी के साथ जुड़ा रहा और दोनों की एक बेटी समारा तिजोरी है।
समारा ने भी अभिनय की दुनिया में कदम रखा है और दीपक ने एक इंटरव्यू में अपनी बेटी के बॉलीवुड डेब्यू को लेकर बात की थी।
लेकिन दीपक तिजोरी की निजी जिंदगी का एक अध्याय विवादों से भी जुड़ा रहा।
2017 में उनकी और शिवानी के बीच रिश्ते को लेकर मीडिया में कई रिपोर्टें सामने आईं। इनमें अलग रहने, तलाक और कानूनी विवाद से संबंधित दावे किए गए थे।
सबसे ज्यादा चर्चा उस रिपोर्ट की हुई जिसमें उनके विवाह की कानूनी स्थिति को लेकर सवाल उठाया गया था।
हालांकि यह मामला विवादित था और शिवानी की बहन कुनिका ने उस समय मीडिया में सामने आए दावों पर आपत्ति जताते हुए उन्हें गलत बताया था। उन्होंने कहा था कि मामला अदालत में है और बिना फैसले के ऐसी बातों को तथ्य की तरह नहीं लिखा जाना चाहिए।
इसलिए इस पूरे प्रकरण को किसी अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं बल्कि उस समय रिपोर्ट हुए वैवाहिक और कानूनी विवाद के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
इंटरनेट पर दीपक तिजोरी की नेट वर्थ को लेकर कई तरह के आंकड़े दिखाई देते हैं।
लेकिन इन आंकड़ों के समर्थन में कोई पर्याप्त और विश्वसनीय सार्वजनिक वित्तीय दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।
इसलिए उनकी संपत्ति या कुल नेट वर्थ की कोई निश्चित रकम बताना सही नहीं होगा।
एक अभिनेता, निर्देशक और निर्माता के रूप में उन्होंने तीन दशक से अधिक समय तक काम किया है, लेकिन उनकी वास्तविक व्यक्तिगत संपत्ति, निवेश और आय का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं है।
यही वजह है कि ‘दीपक तिजोरी की नेट वर्थ’ को लेकर इंटरनेट पर मौजूद अनुमानित रकम को तथ्य मानने से बचना चाहिए।
दीपक तिजोरी के करियर की एक खास बात यह है कि कई दशक के बाद भी उन्होंने खुद को नए माध्यमों और कहानियों के लिए खुला रखा।
‘Echoes of Us’ नाम की शॉर्ट फिल्म में उनके अभिनय को 2025 में कई अंतरराष्ट्रीय शॉर्ट फिल्म समारोहों में पुरस्कार मिले।
उपलब्ध अवॉर्ड रिकॉर्ड के अनुसार उन्हें South Asian International Film Festival, Independent Shorts Awards, Indie Short Fest, Barcelona International Film Festival और अन्य आयोजनों में अभिनय के लिए सम्मान मिला।
यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनके करियर के उस हिस्से को सामने लाती है जो 90 के दशक के लोकप्रिय बॉलीवुड किरदारों से कहीं आगे जाता है।
दीपक तिजोरी की कहानी का सबसे खूबसूरत हिस्सा शायद यही है कि उन्होंने खुद को किसी एक दौर में कैद नहीं किया।
7 अगस्त 2026 को रिलीज हुई गुजराती फिल्म ‘Get Set Go’ में उन्होंने अरुण गोहिल का किरदार निभाया। फिल्म का निर्देशन अर्नव कुमार ने किया है और इसमें दीपक तिजोरी के साथ भौमिक संपत, झिनल बेलानी, रौनक कामदार, ओम भट्ट, भाव्या गांधी और अन्य कलाकार नजर आए।
फिल्म की कहानी साइकिलिंग, एक्शन, कॉमेडी और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के इर्द-गिर्द घूमती है।
दीपक यहां अरुण गोहिल नाम के ऐसे किरदार में हैं जो अपनी टीम के साथ भ्रष्ट लोगों से लूटे गए पैसे को जरूरतमंदों तक पहुंचाने की कोशिश करता है।
यह गुजराती सिनेमा में उनकी लगभग 25 साल बाद वापसी भी बताई गई है।
फिल्म की रिलीज के बाद दीपक तिजोरी ने क्षेत्रीय फिल्मों को मिलने वाले थिएटर सपोर्ट को लेकर चिंता जताई।
रिपोर्ट के अनुसार फिल्म ने गुजरात में शुरुआत में 700 से ज्यादा स्क्रीन्स पर रिलीज हासिल की, लेकिन दूसरे सप्ताह में स्क्रीन संख्या घटकर सिर्फ 24 के आसपास रह गई।
दीपक ने क्षेत्रीय सिनेमा के लिए बेहतर स्क्रीन सपोर्ट की जरूरत पर सवाल उठाया।
यह बात उनके मौजूदा दौर की सोच को भी दिखाती है।
आज वह सिर्फ अपनी फिल्म के अभिनेता नहीं हैं, बल्कि क्षेत्रीय सिनेमा की चुनौतियों पर भी खुलकर बोल रहे हैं।
28 अगस्त 2026 तक दीपक तिजोरी फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं।
उनका सफर अब सिर्फ बॉलीवुड फिल्मों तक सीमित नहीं है। वह अभिनय के साथ निर्देशन और कहानी कहने की दिशा में भी काम करते रहे हैं।
2024 की ‘Tipppsy’ में उनकी मौजूदगी के बाद 2026 में ‘Get Set Go’ ने उन्हें फिर से चर्चा में ला दिया है।
हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि बतौर अभिनेता अभी भी उनके भीतर बहुत कुछ ऐसा है जिसे दर्शकों ने नहीं देखा है। उन्होंने ऐसे फिल्मकारों और किरदारों के साथ काम करने की इच्छा जताई जो उन्हें चुनौती दें।
शायद यही दीपक तिजोरी के सफर का सबसे सटीक सार है।
वह अभी भी खुद को पूरा हुआ कलाकार नहीं मानते।
फिल्म इंडस्ट्री में आने से पहले दीपक तिजोरी और आमिर खान एक थिएटर ग्रुप से जुड़े थे। उस दौर में दोनों अभिनय को लेकर गंभीरता से काम कर रहे थे।
दीपक ने खुद अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया था कि उन्होंने करीब तीन साल तक प्रोड्यूसर्स से मिलने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाए।
‘क्रोध’ में उनका किरदार इतना छोटा था कि उनके हिस्से में सिर्फ एक लाइन आई थी। लेकिन वही छोटे मौके आगे चलकर बड़ी पहचान की शुरुआत बने।
दीपक के मुताबिक फिल्म की शूटिंग काफी आगे बढ़ने के बाद उन्हें शेखर के किरदार के लिए लिया गया था।
फिल्म में आमिर खान, शाहरुख खान और सैफ अली खान की मौजूदगी इसे भारतीय सिनेमा की दुर्लभ फिल्मों में से एक बनाती है।
जब कई कलाकार एक सफल सहायक अभिनेता की पहचान के साथ ही संतुष्ट हो जाते हैं, दीपक ने निर्देशन की तरफ कदम बढ़ाया और ‘Oops!’ से अपना नया अध्याय शुरू किया।
2025 में ‘Echoes of Us’ के लिए उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय समारोहों में Best Actor सहित अलग-अलग सम्मान मिले।
दीपक तिजोरी की कहानी को अगर सिर्फ ‘90 के दशक के एक सहायक अभिनेता’ की कहानी कहा जाए तो यह उनके साथ नाइंसाफी होगी।
उन्होंने संघर्ष देखा। छोटे रोल किए। निर्माताओं के दफ्तरों के बाहर इंतजार किया। नौकरियां कीं। थिएटर किया। बड़े सितारों के साथ काम किया। लीड रोल किया। निर्देशन किया। टेलीविजन रियलिटी शो का हिस्सा बने। और फिर कई दशक बाद भी नई भाषा और नए सिनेमा के साथ खुद को जोड़ते रहे।
सिनेमा में हर कलाकार की कहानी सुपरस्टार बनने की नहीं होती। कुछ कलाकार फिल्मों को उस तरह पूरा करते हैं जैसे किसी खूबसूरत तस्वीर को अंतिम रंग पूरा करता है। दीपक तिजोरी उन्हीं कलाकारों में से एक हैं।
‘जो जीता वही सिकंदर’ का शेखर आज भी याद किया जाता है। ‘आशिकी’ का दौर आज भी लोगों के दिल में है। ‘कभी हां कभी ना’, ‘गुलाम’ और ‘बादशाह’ जैसी फिल्मों में उनकी मौजूदगी आज भी 90 के दशक के सिनेमा की याद दिलाती है।
लेकिन उनकी असली उपलब्धि शायद यह है कि उन्होंने अपने करियर को किसी एक पहचान के भरोसे नहीं छोड़ा। आज 65 साल की उम्र में भी वह नए किरदार की तलाश में हैं। और शायद एक कलाकार के लिए इससे बड़ी जीत कुछ नहीं होती—
जब उम्र बढ़ती रहे, लेकिन कहानी कहने की भूख कम न हो।
दीपक तिजोरी का सफर इसी बात की याद दिलाता है कि फिल्म इंडस्ट्री में जगह बनाने के लिए सिर्फ चेहरा नहीं, बल्कि धैर्य भी चाहिए। कभी-कभी जिंदगी आपको पहली पंक्ति में जगह नहीं देती। लेकिन अगर आप मंच छोड़कर नहीं जाते, तो एक दिन वही छोटा सा किरदार आपकी पूरी कहानी का सबसे यादगार हिस्सा बन सकता है।
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