खतरों के खिलाड़ी सीजन 1 से 15 तक कौन-कौन रहे विनर? देखें पूरी Winners List और हर सीजन की कहानी
![]() |
| Khalifa Movie Review में पृथ्वीराज सुकुमारन और मोहनलाल |
मलयालम सिनेमा की बहुप्रतीक्षित एक्शन-क्राइम थ्रिलर 'Khalifa' आज यानी 20 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। पृथ्वीराज सुकुमारन की मुख्य भूमिका, मोहनलाल की मौजूदगी और निर्देशक वैसाख की पिछली फिल्मों की मास अपील ने रिलीज से पहले ही फिल्म को लेकर जबरदस्त उत्सुकता पैदा कर दी थी। फिल्म को यूए 16+ प्रमाणपत्र मिला है और इसकी अवधि करीब 2 घंटे 39 मिनट है।
फिल्म की कहानी सोने की तस्करी, अपराध की दुनिया, विरासत, बदले और सत्ता के इर्द-गिर्द घूमती है। ट्रेलर ने जिस बड़े पैमाने के एक्शन और स्टाइलिश दुनिया का वादा किया था, फिल्म काफी हद तक उस उम्मीद को पूरा करती है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ शानदार एक्शन और पृथ्वीराज का स्वैग फिल्म को बेहतरीन बना देता है?
जवाब थोड़ा मिला-जुला है।
फिल्म के केंद्र में आमिर अली है, जिसका जीवन शुरुआत में काफी सामान्य दिखाई देता है। वह अपने परिवार के साथ रहता है और स्थानीय स्तर पर अपना काम करता है। लेकिन उसके परिवार की विरासत और अतीत धीरे-धीरे उसकी जिंदगी को ऐसे अपराध-जगत में धकेल देते हैं, जहां से वापस लौटना आसान नहीं है।
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के उपलब्ध विवरण के अनुसार, कहानी कोडुवल्ली की पृष्ठभूमि में आमिर अली, उसके पिता यूनुस अली और मां नूरजहां से शुरू होती है। आमिर की निजी जिंदगी और पारिवारिक रिश्तों के बाद कहानी अपराध और बदले की दिशा में आगे बढ़ती है।
यहीं से 'Khalifa' एक पारिवारिक कहानी से निकलकर सोने की तस्करी और अपराध की बड़ी दुनिया में प्रवेश करती है।
फिल्म का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि आमिर सिर्फ एक साधारण नायक नहीं है। उसके सामने अतीत, परिवार और अपराध की दुनिया—तीनों की चुनौतियां एक साथ खड़ी होती हैं।
हालांकि, कहानी का मूल ढांचा कुछ जगहों पर जाना-पहचाना महसूस होता है। शुरुआती समीक्षाओं में भी फिल्म की पटकथा को लेकर यही बात सामने आई है कि इसकी प्रस्तुति भव्य है, लेकिन कहानी में बहुत अधिक नवीनता नहीं है।
अगर 'Khalifa' की सबसे बड़ी ताकत चुननी हो, तो पृथ्वीराज सुकुमारन का नाम सबसे ऊपर आएगा।
आमिर अली के किरदार में पृथ्वीराज ने शांत चेहरे और आक्रामक अंदाज का अच्छा संतुलन बनाया है। उनका लुक, बॉडी लैंग्वेज और एक्शन दृश्यों में मौजूदगी फिल्म को मास अपील देती है।
खासकर आमिर की एंट्री और एक्शन वाले हिस्सों में अभिनेता का स्क्रीन प्रेजेंस काफी प्रभावशाली है। शुरुआती दर्शक प्रतिक्रियाओं में भी पृथ्वीराज की एंट्री और उनके अभिनय की खूब चर्चा देखने को मिली है।
फिल्म में मोहनलाल की मौजूदगी निश्चित रूप से दर्शकों के लिए बड़ा आकर्षण है। वह आमिर के दादा मम्बरक्कल अहमद अली की भूमिका में दिखाई देते हैं।
उनका स्क्रीन टाइम भले ही पृथ्वीराज जितना नहीं है, लेकिन उनकी मौजूदगी फिल्म के भावनात्मक और स्टार वैल्यू वाले हिस्से को मजबूत करती है।
नील नितिन मुकेश फिल्म में हरीस मोहम्मद की भूमिका में नजर आते हैं और खलनायक के रूप में उनका प्रदर्शन प्रभाव छोड़ता है। शुरुआती समीक्षाओं में भी उनके अभिनय को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
मालविका शर्मा, संजू शिवराम, मोहिनी और बाकी सहायक कलाकार कहानी को सपोर्ट करते हैं।
निर्देशक वैसाख ने 'Khalifa' को एक बड़े पर्दे की एक्शन फिल्म की तरह पेश किया है।
फिल्म में बड़े सेट, स्टाइलिश फ्रेम, पीछा करने वाले दृश्य और एक्शन को प्रमुखता दी गई है। लेकिन कुछ जगहों पर ऐसा महसूस होता है कि कहानी की स्वाभाविक गति से ज्यादा जोर 'मास' क्षणों को बनाने पर दिया गया है। यही बात शुरुआती समीक्षाओं में फिल्म की एक कमजोरी के तौर पर सामने आई है।
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर इसके सबसे मजबूत तकनीकी पक्षों में से एक है।
जेक्स बिजॉय ने एक्शन दृश्यों को वह ऊर्जा देने की कोशिश की है जिसकी ऐसी फिल्म से उम्मीद होती है। शुरुआती सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं में भी उनके बीजीएम की खास तौर पर तारीफ हुई है।
जोमोन टी. जॉन की सिनेमैटोग्राफी फिल्म को बड़े पर्दे पर देखने लायक बनाती है। सोने की तस्करी की दुनिया, लोकेशन और एक्शन को विजुअली प्रभावशाली तरीके से पेश किया गया है।
चमन चाको की एडिटिंग फिल्म के एक्शन हिस्सों को गति देने में मदद करती है। एक्शन कोरियोग्राफी भी फिल्म के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है।
फिर भी कुछ दृश्यों में फिल्म की लंबाई थोड़ी महसूस हो सकती है। यानी तकनीकी रूप से फिल्म मजबूत है, लेकिन पटकथा को और कसाव मिलता तो अनुभव और बेहतर हो सकता था।
रिलीज के शुरुआती घंटों में 'Khalifa' को लेकर प्रतिक्रिया पूरी तरह एकतरफा नहीं है।
एक तरफ पृथ्वीराज की एंट्री, एक्शन, मोहनलाल की मौजूदगी और जेक्स बिजॉय के बैकग्राउंड स्कोर की तारीफ हो रही है। कुछ दर्शक इसे ओणम सीजन की मजबूत मास फिल्म मान रहे हैं।
दूसरी तरफ कुछ प्रतिक्रियाओं में कहानी और नैरेशन को अनुमानित बताया गया है। यानी फिल्म का मेकिंग और स्टार पावर पसंद आ रहा है, लेकिन पटकथा को लेकर हर दर्शक समान रूप से उत्साहित नहीं है।
इसलिए फिलहाल इसे मिश्रित लेकिन सकारात्मक शुरुआती प्रतिक्रिया कहना ज्यादा सही होगा।
फिल्म की रिलीज से पहले ही एडवांस बुकिंग ने अच्छी शुरुआत दिखाई थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म ने रिलीज से पहले करीब 1.54 लाख टिकट बेचकर लगभग ₹2.83 करोड़ की ग्रॉस एडवांस बुकिंग दर्ज की थी।
हालांकि, इसे अंतिम बॉक्स ऑफिस कमाई नहीं माना जाना चाहिए।
ओणम के मौके पर रिलीज, पृथ्वीराज की स्टार पावर, मोहनलाल की मौजूदगी और एक्शन शैली फिल्म के पक्ष में जाती है। मलयालम बाजार में फिल्म को मजबूत शुरुआत मिलने की उम्मीद है।
अगर शुरुआती वर्ड ऑफ माउथ अच्छा बना रहता है, तो फिल्म का वीकेंड प्रदर्शन बेहतर हो सकता है। वहीं कहानी को लेकर नकारात्मक प्रतिक्रिया बढ़ी तो फिल्म की लंबी दौड़ प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल शुरुआती आंकड़ों के बिना किसी निश्चित कलेक्शन का दावा करना जल्दबाजी होगी।
अगर आपको मास एक्शन, गैंगस्टर ड्रामा, स्टाइलिश सिनेमैटोग्राफी और दमदार बैकग्राउंड स्कोर पसंद है, तो 'Khalifa' आपके लिए सिनेमाघर में देखने लायक फिल्म हो सकती है।
पृथ्वीराज का स्क्रीन प्रेजेंस और फिल्म का तकनीकी स्तर इसे बड़े पर्दे पर ज्यादा प्रभावी बनाता है।
लेकिन अगर आप ऐसी क्राइम थ्रिलर की उम्मीद कर रहे हैं जिसकी कहानी हर मोड़ पर चौंकाए, तो आपको फिल्म की पटकथा कुछ हद तक अनुमानित लग सकती है।
'Khalifa' परफेक्ट फिल्म नहीं है, लेकिन यह अपने स्टार, एक्शन और विजुअल ट्रीट की वजह से ध्यान खींचती है।
'Khalifa' की असली ताकत इसकी कहानी से ज्यादा उसका प्रस्तुतिकरण है।
पृथ्वीराज सुकुमारन आमिर अली के किरदार में प्रभावशाली हैं, मोहनलाल की मौजूदगी अलग आकर्षण पैदा करती है और जेक्स बिजॉय का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म को कई जगह अतिरिक्त ऊर्जा देता है।
कमजोरी इसकी पटकथा और कुछ जगहों पर जरूरत से ज्यादा 'मास' अंदाज है।
अगर आप दिमाग को थोड़ा आराम देकर एक बड़े पर्दे वाली एक्शन फिल्म देखना चाहते हैं, तो 'Khalifa' आपको निराश नहीं करेगी। लेकिन कहानी में नई चीज की तलाश करने वाले दर्शकों के लिए यह अनुभव उतना खास नहीं हो सकता।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें