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| ‘इलू इलू’ वाला हीरो अब कहाँ है? |
एक वक्त था जब बॉलीवुड में किसी नए अभिनेता की पहली फिल्म ही उसे रातोंरात पहचान दिला दे, तो इसे किसी सपने से कम नहीं माना जाता था। विवेक मुशरान के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
साल 1991 में जब सुभाष घई की फिल्म ‘सौदागर’ रिलीज हुई, तो विवेक मुशरान की मासूमियत, स्क्रीन प्रेजेंस और चॉकलेटी लुक ने दर्शकों का ध्यान खींच लिया। फिल्म में उनके साथ मनीषा कोइराला ने भी डेब्यू किया था, जबकि दूसरी तरफ दिलीप कुमार और राज कुमार जैसे दिग्गज मौजूद थे।
‘सौदागर’ की कामयाबी ने विवेक को ऐसा लॉन्च दिया, जिसका सपना उस दौर में हर नया अभिनेता देखता था। फिल्म का गाना ‘इलू इलू’ भी जबरदस्त लोकप्रिय हुआ और विवेक की पहचान उससे जुड़ गई।
लेकिन बॉलीवुड की कहानी अक्सर पहली फिल्म की सफलता से कहीं ज्यादा कठिन होती है।
विवेक मुशरान के साथ भी यही हुआ। जिस अभिनेता को शुरुआत में अगला बड़ा रोमांटिक स्टार माना जा रहा था, उसे जल्द ही यह एहसास होने लगा कि एक हिट फिल्म और लंबे करियर के बीच बहुत बड़ा अंतर होता है।
फिर उन्होंने फिल्में कीं, टेलीविजन का रुख किया, अलग-अलग तरह के किरदार निभाए और आखिरकार उस दौर में पहुंचे जहां उन्हें सिर्फ ‘इलू इलू’ वाले हीरो के तौर पर नहीं, बल्कि एक सक्षम कैरेक्टर एक्टर के रूप में देखा जाने लगा।
आज विवेक मुशरान की कहानी सिर्फ एक 90s स्टार की कहानी नहीं है। यह उस अभिनेता की कहानी है जिसने स्टारडम की चमक से आगे बढ़कर अपने लिए दूसरी पारी बनाई।
विवेक मुशरान हिंदी फिल्मों और टेलीविजन के जाने-पहचाने अभिनेता हैं। उनका जन्म 9 अगस्त 1969 को रेणुकूट, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उपलब्ध बायोग्राफिकल रिकॉर्ड्स के अनुसार उन्होंने 1991 में ‘सौदागर’ से फिल्मी करियर की शुरुआत की।
उनका करियर तीन अलग-अलग दौर में देखा जा सकता है।
पहला दौर था 90 के दशक का, जब वे रोमांटिक और युवा भूमिकाओं में नजर आए।
दूसरा दौर टेलीविजन का था, जहां ‘सोन परी’, ‘भास्कर भारती’, ‘परवरिश’ और ‘निशा और उसके कजिन्स’ जैसे धारावाहिकों ने उन्हें घर-घर तक पहुंचाया।
और तीसरा दौर फिल्मों, वेब सीरीज और OTT का है, जहां उन्होंने अपनी उम्र और व्यक्तित्व के मुताबिक अलग-अलग चरित्र निभाए।
यही बदलाव विवेक मुशरान के करियर की सबसे दिलचस्प बात है।
विवेक मुशरान का जन्म रेणुकूट में हुआ। उनके परिवार और शुरुआती जीवन के बारे में इंटरनेट पर कई तरह की जानकारियां मिलती हैं, लेकिन हर जानकारी समान रूप से विश्वसनीय नहीं है।
उपलब्ध बायोग्राफिकल रिकॉर्ड्स में उनकी मां का नाम अनसूया मुशरान दर्ज है और भाइयों के रूप में मिलन तथा सुनील मुशरान के नाम का उल्लेख मिलता है।
उनकी शिक्षा को लेकर कई प्रोफाइल्स में रेणुकूट के बाद नैनीताल के शेरवुड कॉलेज और मुंबई के सिडेनहम कॉलेज का उल्लेख मिलता है। हालांकि इन शैक्षणिक विवरणों की स्वतंत्र प्राथमिक पुष्टि सीमित है, इसलिए इन्हें सावधानी से देखना चाहिए।
विवेक का फिल्मी सफर किसी एक दिन अचानक शुरू नहीं हुआ था। अभिनय की दुनिया में कदम रखने के बाद उन्हें एक ऐसी फिल्म मिली, जिसने उनका नाम पूरे देश में पहुंचा दिया।
और वह फिल्म थी—‘सौदागर’।
1991 का साल विवेक मुशरान के लिए जिंदगी बदल देने वाला साबित हुआ।
सुभाष घई की ‘सौदागर’ में उन्हें काम करने का मौका मिला। फिल्म में दिलीप कुमार और राज कुमार जैसे दो महान कलाकार आमने-सामने थे। वहीं मनीषा कोइराला ने भी इसी फिल्म से हिंदी सिनेमा में कदम रखा।
ऐसे कलाकारों के बीच एक नए अभिनेता के लिए अपनी पहचान बनाना आसान नहीं था।
लेकिन विवेक ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
फिल्म में उनके किरदार का नाम वासु था और उनकी जोड़ी मनीषा कोइराला के साथ नजर आई। ‘इलू इलू’ की लोकप्रियता ने उनकी पहचान को और मजबूत कर दिया।
‘सौदागर’ सिर्फ एक फिल्म नहीं थी। यह विवेक मुशरान के लिए ऐसा लॉन्चपैड था जिसने उन्हें रातोंरात बॉलीवुड के नए चेहरों की कतार में खड़ा कर दिया।
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में विवेक ने वर्षों बाद ‘सौदागर’ के सेट की यादें साझा करते हुए बताया था कि दिलीप कुमार उनके साथ काफी सहज रहते थे। मनाली में शूटिंग के दौरान दिलीप कुमार उन्हें अपने साथ टहलने ले जाते थे और सेट पर अपने जीवन और करियर की बातें भी करते थे।
विवेक के लिए यह किसी अभिनय स्कूल से कम अनुभव नहीं था।
एक तरफ उनके सामने भारतीय सिनेमा के दिग्गज कलाकार थे और दूसरी तरफ उनका अपना करियर अभी शुरू ही हुआ था।
किसी कलाकार के लिए लोकप्रियता सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक होती है।
लेकिन कभी-कभी वही लोकप्रियता एक सीमा भी बन जाती है।
विवेक मुशरान ने बाद के वर्षों में खुद स्वीकार किया कि दर्शकों के बीच उनकी ‘इलू इलू’ वाली छवि इतनी मजबूत हो गई थी कि उन्हें दूसरे तरह के किरदारों में देखने की आदत लोगों को नहीं थी।
2018 में हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने इस बात पर खुलकर चर्चा की थी। उन्होंने कहा था कि लोग उन्हें ‘सौदागर’ की उस छवि में याद करते रहे, जबकि वह अलग-अलग भूमिकाएं करना चाहते थे।
यह किसी अभिनेता के लिए बहुत बड़ी चुनौती होती है।
क्योंकि अगर पहली फिल्म में आपकी छवि दर्शकों के दिल में बहुत गहराई से बैठ जाए, तो अगली फिल्मों में उससे अलग दिखना मुश्किल हो जाता है।
विवेक के सामने भी यही समस्या आई।
वह सिर्फ रोमांटिक हीरो बनकर नहीं रहना चाहते थे।
वह अलग किरदार निभाना चाहते थे।
लेकिन इंडस्ट्री में एक अभिनेता की छवि बदलना उतना आसान नहीं होता जितना पर्दे पर किरदार बदलना।
‘सौदागर’ के बाद विवेक मुशरान ने लगातार कई फिल्मों में काम किया।
उनकी शुरुआती फिल्मों में ‘First Love Letter’, ‘Prem Deewane’, ‘Saatwan Aasman’, ‘Bewaffa Se Waffa’, ‘Dil Hai Betaab’ और ‘Insaniyat Ke Devta’ जैसी फिल्में शामिल थीं।
1992 में ‘Saatwan Aasman’ में वह पूजा भट्ट के साथ नजर आए। फिल्म का निर्देशन महेश भट्ट ने किया था और विवेक ने सूरज नाथ की भूमिका निभाई।
‘Dil Hai Betaab’ में उनके साथ अजय देवगन और प्रतिभा सिन्हा थे। फिल्म में विवेक ने राजा का किरदार निभाया।
यानी शुरुआती वर्षों में काम की कमी नहीं थी।
समस्या कुछ और थी।
जिस ऊंचाई से उनका करियर शुरू हुआ था, उस ऊंचाई को लगातार बनाए रखना कठिन था।
1995 में विवेक मुशरान ने ‘राम जाने’ में काम किया।
फिल्म में मुख्य भूमिका शाहरुख खान की थी और जूही चावला भी प्रमुख भूमिका में थीं। विवेक ने इसमें मुरली का किरदार निभाया।
उस समय शाहरुख खान तेजी से बड़े स्टार बन रहे थे।
‘राम जाने’ ने विवेक को एक बार फिर एक बड़े स्टार के साथ स्क्रीन शेयर करने का अवसर दिया।
लेकिन यहां भी उनका करियर उस तरह आगे नहीं बढ़ पाया, जिसकी उम्मीद ‘सौदागर’ के बाद की गई थी।
इसके बावजूद ‘राम जाने’ आज भी 90s सिनेमा को पसंद करने वाले दर्शकों के बीच याद की जाती है और विवेक का मुरली वाला किरदार उनकी फिल्मोग्राफी का हिस्सा बना हुआ है।
बॉलीवुड में डेब्यू करना एक चुनौती है।
लेकिन डेब्यू के बाद टिके रहना उससे भी बड़ी चुनौती है।
विवेक मुशरान का करियर इस बात का उदाहरण है।
‘सौदागर’ के बाद उन्हें लगातार काम मिला, लेकिन फिल्मों की सफलता और भूमिकाओं का स्वरूप वैसा नहीं रहा जैसा उनकी पहली फिल्म से उम्मीद पैदा हुई थी।
कई फिल्में रिलीज नहीं हो सकीं या अपेक्षित पहचान नहीं बना सकीं।
उपलब्ध रिकॉर्ड्स के मुताबिक 1992 में उन्होंने रवीना टंडन के साथ एक रामसे फिल्म साइन की थी, जो बाद में shelve हो गई। 1994 में Venus Films की एक फिल्म भी आगे नहीं बढ़ सकी।
फिल्म इंडस्ट्री में किसी प्रोजेक्ट का बंद हो जाना सिर्फ एक फिल्म का नुकसान नहीं होता।
उसके साथ महीनों की उम्मीद, समय और करियर की संभावनाएं भी रुक जाती हैं।
विवेक के करियर में भी ऐसे दौर आए।
लेकिन उन्होंने काम करना नहीं छोड़ा।
90 के दशक के अंत और 2000 के दशक में भारतीय टेलीविजन तेजी से बदल रहा था।
फिल्मों के कई कलाकार छोटे पर्दे की ओर जा रहे थे।
विवेक मुशरान ने भी टेलीविजन में अपनी जगह बनाई।
उनके करियर का सबसे लोकप्रिय टीवी किरदार ‘सोन परी’ से जुड़ा रहा। स्टार प्लस के इस फैंटेसी शो ने उन्हें एक नई पीढ़ी के दर्शकों से जोड़ा।
यह दिलचस्प बदलाव था।
90s के रोमांटिक हीरो को अब बच्चे और परिवार टीवी स्क्रीन पर एक अलग भूमिका में देख रहे थे।
यहीं से विवेक के करियर में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन शुरू हुआ।
वह सिर्फ फिल्म अभिनेता नहीं रहे।
वह टीवी के भरोसेमंद कलाकार बन गए।
2009 में आया ‘भास्कर भारती’ विवेक मुशरान के करियर के महत्वपूर्ण टीवी प्रोजेक्ट्स में गिना जाता है।
इस शो ने उन्हें कॉमेडी और अलग तरह के टेलीविजन किरदारों में खुद को साबित करने का अवसर दिया।
उनकी टीवी यात्रा में ‘किट्टी पार्टी’, ‘भास्कर भारती’, ‘बात हमारी पक्की है’, ‘परवरिश – कुछ खट्टी कुछ मीठी’ और ‘निशा और उसके कजिन्स’ जैसे शो शामिल रहे।
‘परवरिश’ में उन्होंने परिवार-केंद्रित कहानी का हिस्सा बनकर एक अलग तरह का किरदार निभाया।
‘निशा और उसके कजिन्स’ में उन्होंने रamesh Gangwal की भूमिका निभाई, जो मुख्य परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
टीवी ने विवेक को वह स्थायित्व दिया जो फिल्म करियर के उतार-चढ़ाव के बीच बेहद महत्वपूर्ण था।
कई सालों के बाद 2015 में विवेक मुशरान इम्तियाज अली की ‘तमाशा’ में नजर आए।
फिल्म में रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण मुख्य भूमिकाओं में थे।
विवेक ने फिल्म में वेद के बॉस की भूमिका निभाई।
यह भूमिका छोटी थी, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह थी कि विवेक अब उस दौर में पहुंच चुके थे जहां उनका चेहरा किसी पुराने रोमांटिक हीरो के रूप में नहीं, बल्कि एक अनुभवी अभिनेता के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।
खुद विवेक ने 2018 में कहा था कि ‘तमाशा’ ने उनकी पुरानी छवि को कुछ हद तक तोड़ने में मदद की।
यह उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ था।
2017 में विवेक मुशरान ‘बेगम जान’ में नजर आए।
विद्या बालन स्टारर इस फिल्म में उन्होंने ‘मास्टर’ का किरदार निभाया।
इसके अगले साल 2018 में उन्होंने ‘वीरे दी वेडिंग’ में काम किया।
इस फिल्म में करीना कपूर खान, सोनम कपूर, स्वरा भास्कर और शिखा तलसानिया मुख्य भूमिकाओं में थीं। विवेक ने किट्टी उर्फ कूकी पुरी का किरदार निभाया।
‘वीरे दी वेडिंग’ में उनका किरदार उनकी पुरानी रोमांटिक-हीरो छवि से बिल्कुल अलग था।
यही वह दौर था जब विवेक अपनी पहचान को नए तरीके से स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के आने से भारतीय कलाकारों के लिए अभिनय की दुनिया काफी बदल गई।
अब किसी अभिनेता को सिर्फ मुख्य हीरो या हीरोइन होने की जरूरत नहीं थी।
अच्छा किरदार हो तो छोटा रोल भी दर्शकों की नजर में आ सकता था।
विवेक मुशरान ने इस बदलाव का फायदा उठाया।
उन्होंने ‘Banned’, ‘Never Kiss Your Best Friend’, ‘Marzi’, ‘Mai’ और अन्य डिजिटल प्रोजेक्ट्स में काम किया। IMDb के रिकॉर्ड में ‘Banned’ में उनका किरदार Gupta Ji और ‘Marzi’ में Subodh के रूप में दर्ज है।
2022 की वेब सीरीज ‘Mai’ में भी वह नजर आए।
यह वही दौर था जब विवेक की दूसरी पारी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी।
2024 में विवेक मुशरान ने नेटफ्लिक्स फिल्म ‘दो पत्ती’ में काम किया।
फिल्म में काजोल और कृति सेनन प्रमुख भूमिकाओं में थीं। विवेक ने दीपक पुंडीर यानी चाचा का किरदार निभाया।
यह भूमिका इस बात का उदाहरण है कि विवेक अब फिल्मों में एक अनुभवी कैरेक्टर एक्टर के रूप में अपनी जगह बना चुके हैं।
एक अभिनेता जिसने अपने करियर की शुरुआत रोमांटिक हीरो के रूप में की थी, अब कहानी के भावनात्मक और पारिवारिक हिस्सों को मजबूत करने वाले किरदार निभा रहा था।
2024 में विवेक मुशरान ‘मामला लीगल है’ में भी नजर आए।
नेटफ्लिक्स की इस कॉमेडी-लीगल सीरीज में उन्होंने KM Jaitley की भूमिका निभाई।
इस तरह देखा जाए तो विवेक ने फिल्मों, टीवी और OTT—तीनों माध्यमों में लगातार काम किया है।
यही शायद उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।
2025 में विवेक मुशरान ‘Zyada Mat Udd’ नाम के शो में दिखाई दिए।
इस शो में उन्होंने Satish Khurana का किरदार निभाया। IMDb के रिकॉर्ड में उन्हें 27 एपिसोड के लिए इस भूमिका से जोड़ा गया है।
Bollywood Hungama की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक यह शो Colors TV और JioHotstar पर 8 मार्च 2025 से उपलब्ध हुआ था और इसमें विवेक मुशरान भी कलाकारों का हिस्सा थे।
इससे एक बात साफ होती है—
विवेक मुशरान का सफर खत्म नहीं हुआ है।
वह आज भी अभिनय की दुनिया में सक्रिय हैं।
विवेक मुशरान की निजी जिंदगी को लेकर इंटरनेट पर कई दावे मौजूद हैं।
कुछ वेबसाइट्स उनकी शादी और परिवार के बारे में जानकारी देती हैं, लेकिन पत्नी का नाम और निजी जीवन से जुड़े कई विवरण विश्वसनीय प्राथमिक स्रोतों से स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं हैं।
इसी वजह से इन दावों को तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
इसी तरह उनके शुरुआती दौर में मनीषा कोइराला के साथ कथित रिश्ते की बातें भी मनोरंजन मीडिया और इंटरनेट पर दिखाई देती रही हैं, लेकिन इनके बारे में पर्याप्त विश्वसनीय प्राथमिक स्रोत उपलब्ध नहीं हैं।
इसलिए विवेक मुशरान की निजी जिंदगी पर सनसनीखेज दावा करने के बजाय इतना कहना अधिक जिम्मेदार होगा कि अभिनेता ने अपने निजी जीवन को काफी हद तक सार्वजनिक चर्चा से अलग रखा है।
उनका सार्वजनिक करियर उनकी फिल्मों, टीवी शो और OTT प्रोजेक्ट्स के जरिए ही सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
विवेक मुशरान का करियर विवादों के कारण नहीं, बल्कि उनके लंबे और बदलते अभिनय सफर के कारण चर्चा में रहा है।
उनके नाम से जुड़े कई इंटरनेट दावे मिलते हैं, लेकिन हर दावा विश्वसनीय स्रोतों से पुष्ट नहीं है।
इसलिए उनके बारे में ‘बड़ा विवाद’ बताकर अपुष्ट कहानियां जोड़ना सही नहीं होगा।
उनकी सबसे बड़ी चुनौती वास्तव में इंडस्ट्री की वह धारणा रही, जिसमें उन्हें ‘इलू इलू’ वाले चॉकलेटी हीरो की छवि में देखा जाता था।
और इस छवि से बाहर निकलने की कोशिश उन्होंने खुद भी कई इंटरव्यू में स्वीकार की है।
विवेक मुशरान की सटीक नेट वर्थ का कोई विश्वसनीय और आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
इंटरनेट पर कुछ वेबसाइट्स अनुमानित संपत्ति के आंकड़े देती हैं, लेकिन वे आमतौर पर किसी आधिकारिक आय विवरण, टैक्स रिकॉर्ड या अभिनेता की पुष्टि पर आधारित नहीं होते।
इसलिए उन्हें तथ्य मानना उचित नहीं है।
उनकी वास्तविक संपत्ति, फीस, निवेश और निजी आय के बारे में सार्वजनिक रूप से पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध न होने के कारण इस लेख में कोई काल्पनिक राशि नहीं दी जा रही है।
एक सेलिब्रिटी की नेट वर्थ को लेकर गलत आंकड़ा देने से बेहतर है कि साफ कहा जाए—सटीक जानकारी सार्वजनिक नहीं है।
विवेक मुशरान ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में फिटनेस को अपनी जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था।
Deccan Herald से बातचीत में उन्होंने कहा था कि फिल्म इंडस्ट्री में फिटनेस और ट्रेनिंग जरूरी हिस्सा है और वह जिम मिस करने की कल्पना नहीं करते। उन्होंने रनिंग और टेनिस खेलने जैसी गतिविधियों का भी जिक्र किया था।
दिलचस्प बात यह भी है कि उन्होंने खुद को सिर्फ डाइट तक सीमित रखने के बजाय खाने और पोषण के संतुलन पर बात की थी।
उनकी पसंदीदा चीजों में मसाला डोसा का भी जिक्र मिलता है।
यानी पर्दे पर फिट दिखने वाले इस अभिनेता के लिए फिटनेस सिर्फ दिखावे की चीज नहीं, बल्कि लंबे समय से उनकी दिनचर्या का हिस्सा रही है।
‘सौदागर’ विवेक की पहली फिल्म थी और उसी फिल्म में उन्हें दिलीप कुमार तथा राज कुमार जैसे दिग्गजों के साथ काम करने का मौका मिला।
ऐसा डेब्यू किसी भी नए कलाकार के लिए असाधारण अवसर था।
‘सौदागर’ की शूटिंग के दौरान दिलीप कुमार और विवेक के बीच सहज रिश्ता बन गया था।
विवेक ने बताया था कि दिलीप कुमार शूटिंग के बीच टहलने निकलते और उन्हें भी अपने साथ ले जाते थे।
विवेक ने ‘सौदागर’ के सेट पर राज कुमार की अलग तरह की शख्सियत और अंदाज को भी याद किया था।
उनके मुताबिक राज कुमार अपेक्षाकृत रिजर्व थे, लेकिन उनका व्यक्तित्व बेहद प्रभावशाली था।
उनके करियर में कुछ ऐसे प्रोजेक्ट भी रहे जो साइन होने के बाद आगे नहीं बढ़ सके।
1992 की रवीना टंडन वाली एक फिल्म और 1994 की Venus Films की फिल्म के shelve होने का उल्लेख उपलब्ध रिकॉर्ड्स में मिलता है।
विवेक मुशरान ने अभिनय के अलावा गायन में भी रुचि दिखाई और ‘Kahin Kho Gaya’ नाम से एक एल्बम से जुड़े होने का उल्लेख मिलता है।
90s की पीढ़ी उन्हें ‘सौदागर’ और ‘इलू इलू’ से याद करती है।
वहीं 2000s की पीढ़ी के लिए वह ‘सोन परी’ जैसे टीवी शो का हिस्सा रहे।
और OTT देखने वाली नई पीढ़ी उन्हें ‘दो पत्ती’, ‘माई’, ‘मामला लीगल है’ जैसे प्रोजेक्ट्स में पहचान सकती है।
यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है—वह समय के साथ माध्यम बदलते रहे।
आज विवेक मुशरान को ‘गुमनाम’ कहना सही नहीं होगा।
हां, वह 90s की तरह फिल्मों के मुख्य हीरो नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अपने करियर को कैरेक्टर रोल्स, टीवी और OTT के जरिए लगातार आगे बढ़ाया है।
2024 में ‘दो पत्ती’ और ‘मामला लीगल है’ जैसे प्रोजेक्ट्स में नजर आने के बाद 2025 में ‘Zyada Mat Udd’ में भी उनकी मौजूदगी रही।
यानी वह आज भी अभिनय कर रहे हैं।
फर्क सिर्फ इतना है कि अब उनकी पहचान किसी एक गाने या एक फिल्म तक सीमित नहीं है।
विवेक मुशरान की कहानी बॉलीवुड की चमकदार दुनिया का वह हिस्सा दिखाती है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
पहली फिल्म हिट होना सफलता है।
लेकिन उसके बाद 30 से ज्यादा साल तक काम करते रहना उससे कहीं बड़ी उपलब्धि है।
विवेक को शुरुआत में स्टारडम मिला।
फिर वही स्टारडम एक छवि में बदल गया।
उस छवि से बाहर निकलने के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ा।
फिल्मों के साथ टीवी किया।
टीवी के बाद OTT अपनाया।
और धीरे-धीरे उन्होंने साबित किया कि अभिनेता की पहचान सिर्फ उसकी पहली फिल्म से तय नहीं होती।
जब 1991 में ‘सौदागर’ रिलीज हुई थी, तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि फिल्म का वह युवा चेहरा तीन दशक से भी ज्यादा समय बाद भी कैमरे के सामने नजर आएगा।
विवेक मुशरान का सफर सीधी रेखा में चलने वाला करियर नहीं रहा।
इसमें सफलता भी थी, ठहराव भी।
लोकप्रियता भी थी और पहचान से बाहर निकलने की बेचैनी भी।
एक दौर में लोग उन्हें सिर्फ ‘इलू इलू’ वाले हीरो के रूप में याद करते थे।
लेकिन समय के साथ उन्होंने यह साबित किया कि एक अभिनेता की असली परीक्षा उसकी पहली फिल्म नहीं, बल्कि उसका पूरा सफर होता है।
आज विवेक मुशरान की पहचान एक ऐसे कलाकार के रूप में की जा सकती है जिसने बदलते बॉलीवुड के साथ खुद को बदला।
90s के रोमांटिक हीरो से लेकर टीवी के लोकप्रिय चेहरों तक और फिर OTT के कैरेक्टर आर्टिस्ट तक—उनकी कहानी बताती है कि करियर में एक मोड़ खत्म नहीं होता, बल्कि अक्सर दूसरी पारी की शुरुआत होता है।
और शायद यही विवेक मुशरान की सबसे खूबसूरत कहानी है—
वह स्टारडम से दूर हुए, लेकिन अभिनय से कभी दूर नहीं हुए।
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