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| 6 फ्लॉप के बाद बदल गई किस्मत! |
कुछ कलाकार फिल्मों में हीरो बनकर याद रह जाते हैं, कुछ खलनायक बनकर और कुछ ऐसे होते हैं जो हर किरदार में अपनी एक अलग छाप छोड़ जाते हैं। मोहनीश बहल इसी तीसरी श्रेणी के अभिनेता हैं।
14 अगस्त 1961 को मुंबई में जन्मे मोहनीश बहल ने जिस दौर में हिंदी सिनेमा में कदम रखा, उस समय उनके नाम के साथ एक बहुत बड़ा परिचय पहले से जुड़ा था—वह दिग्गज अभिनेत्री नूतन के बेटे थे। लेकिन फिल्मी परिवार से आने के बावजूद उनका करियर किसी सीधी रेखा की तरह आगे नहीं बढ़ा।
शुरुआती फिल्मों में बतौर लीड अभिनेता असफलताओं का सामना करने के बाद एक समय ऐसा आया जब मोहनीश बहल ने अभिनय छोड़कर पायलट बनने तक का फैसला कर लिया था। फिर एक दोस्त की सिफारिश और एक नकारात्मक किरदार ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी।
वह फिल्म थी ‘मैंने प्यार किया’ और दोस्त थे सलमान खान।
इसके बाद मोहनीश बहल ने ‘हम आपके हैं कौन..!’, ‘हम साथ-साथ हैं’, ‘राजा हिंदुस्तानी’, ‘विवाह’, ‘कहो ना... प्यार है’ और ‘कभी खुशी कभी गम’ जैसी फिल्मों में काम किया। टीवी पर ‘संजिवनी’ के डॉ. शशांक गुप्ता ने उनकी पहचान को एक नई पीढ़ी तक पहुंचाया।
आज मोहनीश बहल की कहानी सिर्फ एक स्टार-किड के सफल अभिनेता बनने की कहानी नहीं है। यह उस कलाकार की कहानी है जिसने असफलता देखी, दिशा बदली और आखिरकार ऐसा किरदार पा लिया जिसे दर्शकों ने दशकों तक याद रखा।
मोहनीश बहल का जन्म मुंबई में हुआ। उनकी मां हिंदी सिनेमा की महान अभिनेत्री नूतन थीं और पिता राजनिश बहल भारतीय नौसेना से जुड़े रहे थे। वह मुखर्जी-समर्थ परिवार का हिस्सा हैं, जिसका हिंदी सिनेमा से कई पीढ़ियों से गहरा रिश्ता रहा है।
नूतन जैसी अभिनेत्री की संतान होना निश्चित रूप से एक बड़ा फिल्मी विरासत था, लेकिन इसी विरासत के साथ एक दबाव भी जुड़ा था।
दर्शक उनसे स्वाभाविक रूप से बहुत उम्मीद करते थे। मगर कैमरे के सामने अपनी अलग पहचान बनाना किसी भी स्टार परिवार के बच्चे के लिए आसान नहीं होता।
मोहनीश बहल ने अभिनय की दुनिया में कदम रखा तो उनकी शुरुआती फिल्मों में उन्हें वैसी सफलता नहीं मिली जिसकी उम्मीद की जा रही थी।
यही शुरुआती असफलताएं आगे चलकर उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ बनीं।
मोहनीश बहल ने 1983 में ‘बेकरार’ से फिल्मों में कदम रखा। इसके बाद ‘तेरी बाहों में’, ‘मेरी अदालत’, ‘पुराना मंदिर’ और ‘इतिहास’ जैसी फिल्मों में दिखाई दिए। लेकिन इन फिल्मों से उन्हें वह स्टारडम नहीं मिला जिसकी तलाश एक युवा अभिनेता को थी।
उनकी शुरुआती कोशिशों में एक बात साफ थी—मोहनीश लीड हीरो के तौर पर अपनी जगह बनाना चाहते थे।
लेकिन लगातार असफलताओं ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि शायद अभिनय उनके लिए सही करियर नहीं है।
बाद में एक इंटरव्यू में उन्होंने खुद बताया था कि लगातार छह फ्लॉप फिल्मों के बाद उन्हें लगा कि उनका करियर खत्म हो गया है। उन्होंने कमर्शियल पायलट बनने के लिए एविएशन की ट्रेनिंग और लाइसेंस की दिशा में काम करना भी शुरू कर दिया था।
यानी जिस अभिनेता को आज लोग ‘मैंने प्यार किया’ के जीवन जैसे खलनायक और ‘संजिवनी’ के डॉ. शशांक के रूप में जानते हैं, वह कभी फिल्मों को छोड़कर विमान उड़ाने की तैयारी कर रहा था।
मोहनीश बहल और सलमान खान की दोस्ती फिल्म इंडस्ट्री में आने से पहले की बताई जाती है।
दोनों अपने-अपने तरीके से करियर बनाने की कोशिश कर रहे थे। बाद में यही दोस्ती मोहनीश बहल के करियर के सबसे बड़े मोड़ का कारण बनी।
जब सूरज बड़जात्या अपनी पहली फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ की तैयारी कर रहे थे, तब सलमान खान ने मोहनीश बहल का नाम विलेन के किरदार के लिए सुझाया।
मोहनीश के लिए यह फैसला आसान नहीं था।
वह पहले ही लीड हीरो के रूप में खुद को स्थापित करने की कोशिश कर चुके थे। ऐसे में नकारात्मक भूमिका स्वीकार करना उनके लिए अपने पुराने सपने को पीछे छोड़ने जैसा था।
लेकिन उन्होंने जोखिम उठाया।
और यही जोखिम उनके करियर का सबसे बड़ा फैसला साबित हुआ।
1989 में रिलीज हुई सूरज बड़जात्या की ‘मैंने प्यार किया’ ने हिंदी सिनेमा में तहलका मचा दिया।
सलमान खान और भाग्यश्री की प्रेम कहानी के बीच मोहनीश बहल ने जीवन नाम के किरदार को निभाया।
यह किरदार नकारात्मक था और फिल्म के नायक प्रेम के सामने खड़ा था।
मगर मोहनीश ने इसे सिर्फ एक साधारण विलेन की तरह नहीं निभाया। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस, संवाद अदायगी और किरदार की आक्रामकता ने दर्शकों का ध्यान खींचा।
दिलचस्प बात यह है कि नूतन शुरुआत में अपने बेटे को नकारात्मक किरदार में देखने को लेकर सहज नहीं थीं। ‘मैंने प्यार किया’ से जुड़ी रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि फिल्म के निर्माताओं को मोहनीश की भूमिका को लेकर आश्वस्त करना पड़ा।
लेकिन फिल्म रिलीज हुई तो कहानी बदल चुकी थी।
जिस भूमिका को कभी करियर के लिए जोखिम माना जा सकता था, वही भूमिका मोहनीश बहल के लिए नए जीवन की शुरुआत बन गई।
खुद मोहनीश ने बाद में माना कि ‘मैंने प्यार किया’ उनके लिए करियर का नया जीवन था और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह भूमिका उन्हें इतने लंबे समय तक प्रासंगिक बनाए रखेगी।
‘मैंने प्यार किया’ के बाद मोहनीश बहल के करियर में एक दिलचस्प बदलाव आया।
वह अब सिर्फ हीरो बनने की कोशिश करने वाले अभिनेता नहीं रहे।
उन्हें समझ आ गया कि हिंदी सिनेमा में अच्छे किरदार की अहमियत उसके पॉजिटिव या नेगेटिव होने से ज्यादा होती है।
इसके बाद उन्होंने अलग-अलग तरह की भूमिकाएं स्वीकार कीं।
‘बागी’, ‘हिना’, ‘दीनानाथ’, ‘फूल और अंगार’, ‘एक ही रास्ता’, ‘आशिक आवारा’ और ‘लाडला’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग शेड्स वाले किरदार निभाए।
धीरे-धीरे मोहनीश बहल एक ऐसे अभिनेता बन गए जिन्हें किसी एक तरह की भूमिका में बांधना मुश्किल था।
1994 में सूरज बड़जात्या की फिल्म ‘हम आपके हैं कौन..!’ रिलीज हुई।
फिल्म में सलमान खान और माधुरी दीक्षित मुख्य भूमिकाओं में थे। मोहनीश बहल ने राजेश का किरदार निभाया।
यह भूमिका उनके करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई।
फिल्म का पूरा माहौल परिवार, रिश्तों, प्रेम और भावनाओं पर आधारित था। ऐसे में मोहनीश का किरदार फिल्म के पारिवारिक संसार का अहम हिस्सा था।
उनके अभिनय को इतना पसंद किया गया कि उन्हें इस फिल्म के लिए Filmfare Award for Best Supporting Actor के लिए नामांकन मिला। यह वह दौर था जब मोहनीश बहल की छवि धीरे-धीरे बदल रही थी।
‘मैंने प्यार किया’ का खलनायक अब परिवार का भरोसेमंद चेहरा बन रहा था।
1999 में एक बार फिर सूरज बड़जात्या की फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ आई। इस फिल्म में मोहनीश बहल ने विवेक चतुर्वेदी की भूमिका निभाई।
फिल्म में उनके साथ सलमान खान, सैफ अली खान, तब्बू, करिश्मा कपूर, सोनाली बेंद्रे और आलोक नाथ जैसे कलाकार थे।
विवेक का किरदार परिवार और रिश्तों के बीच जिम्मेदारी निभाने वाले बड़े भाई का था।
इस फिल्म ने मोहनीश बहल की उस पहचान को और मजबूत किया जिसमें वह परिवार-केंद्रित कहानियों के भरोसेमंद कलाकार बन चुके थे।
इस भूमिका के लिए भी उन्हें Filmfare में Best Supporting Actor का नामांकन मिला। यह अपने आप में खास उपलब्धि थी। क्योंकि कुछ साल पहले तक वही अभिनेता नकारात्मक भूमिकाओं के लिए पहचाना जा रहा था।
अब वही चेहरा पारिवारिक फिल्मों में भावनात्मक और जिम्मेदार किरदारों के लिए पसंद किया जा रहा था।
मोहनीश बहल ने अपने करियर में केवल एक ही तरह की फिल्मों पर निर्भरता नहीं रखी।
उन्होंने ‘कहो ना... प्यार है’ में इंस्पेक्टर दिलीप कदम की भूमिका निभाई।
इसके बाद ‘एक रिश्ता: द बॉन्ड ऑफ लव’, ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘विवाह’, ‘फोर्स’, ‘देसी बॉयज’, ‘कृष 3’, ‘जय हो’ और कई अन्य फिल्मों में दिखाई दिए।
‘विवाह’ में उन्होंने शाहिद कपूर और अमृता राव के साथ काम किया। फिल्म का पारिवारिक वातावरण और रिश्तों पर आधारित कहानी उनके उस स्क्रीन इमेज से मेल खाती थी जिसे वह वर्षों में बना चुके थे।
वहीं ‘कृष 3’ में उनकी भूमिका छोटी लेकिन महत्वपूर्ण थी।
2019 में वह आशुतोष गोवारिकर की ऐतिहासिक फिल्म ‘पानीपत’ में दिखाई दिए, जिसमें उन्होंने नाना साहेब पेशवा की भूमिका निभाई। फिल्म में अर्जुन कपूर, संजय दत्त और कृति सेनन जैसे कलाकार थे।
‘पानीपत’ उनकी फिल्मोग्राफी में अब तक दर्ज अंतिम प्रमुख फिल्म रिलीज में से एक है; उपलब्ध फिल्मोग्राफी में इसकी रिलीज 6 दिसंबर 2019 दर्ज है।
मोहनीश बहल का फिल्मी सफर इतना लंबा रहा है कि उनकी फिल्मोग्राफी अपने आप में हिंदी सिनेमा की कई पीढ़ियों को जोड़ती है।
उन्होंने सलमान खान के साथ ‘मैंने प्यार किया’, ‘हम साथ-साथ हैं’, ‘कहो ना... प्यार है’ के दौर समेत कई फिल्मों में काम किया।
माधुरी दीक्षित के साथ ‘हम आपके हैं कौन..!’ में उनकी जोड़ी दर्शकों ने देखी।
शाहरुख खान के साथ ‘कभी खुशी कभी गम’ जैसे बड़े मल्टी-स्टारर प्रोजेक्ट का हिस्सा रहे।
आमिर खान के साथ ‘राजा हिंदुस्तानी’ में दिखाई दिए।
अक्षय कुमार के साथ ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’ और बाद की फिल्मों में काम किया।
शाहिद कपूर के साथ ‘विवाह’ और ऋतिक रोशन के साथ ‘कृष 3’ जैसी फिल्मों का हिस्सा बने।
इसके अलावा उन्होंने संजय दत्त, अजय देवगन, सैफ अली खान, करिश्मा कपूर, तब्बू, सोनाली बेंद्रे, काजोल और कई अन्य कलाकारों के साथ भी काम किया।
मोहनीश बहल की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यह है कि उन्होंने फिल्मों के बाद टेलीविजन को सिर्फ दूसरा विकल्प नहीं बनाया।
2002 में उन्होंने ‘संजिवनी’ से टीवी पर शुरुआत की।
इस मेडिकल ड्रामा में उन्होंने डॉ. शशांक गुप्ता का किरदार निभाया।
सख्त, अनुशासित लेकिन भीतर से बेहद संवेदनशील डॉक्टर के रूप में उनका किरदार दर्शकों को पसंद आया।
‘संजिवनी’ का प्रभाव इतना मजबूत था कि बाद में इसका सीक्वल ‘दिल मिल गए’ आया और मोहनीश ने उसमें भी डॉ. शशांक की भूमिका दोहराई।
टीवी पर उनका यह किरदार खास तौर पर नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच उनकी पहचान बन गया।
फिल्मों में जिन दर्शकों ने उन्हें ‘मैंने प्यार किया’ के विलेन के रूप में देखा था, वही दर्शक टीवी पर उन्हें एक अनुभवी और सम्मानित डॉक्टर के रूप में देखने लगे।
2002 की ‘संजिवनी’ उस समय आई जब टेलीविजन पर मेडिकल ड्रामा की यह शैली बहुत आम नहीं थी।
मोहनीश के साथ गुरदीप कोहली, मिहिर मिश्रा और संजीत बेदी जैसे कलाकार इसका हिस्सा थे। शो ने लगभग तीन साल तक दर्शकों का मनोरंजन किया।
मोहनीश के डॉ. शशांक का किरदार सिर्फ अस्पताल के सख्त वरिष्ठ अधिकारी तक सीमित नहीं था।
उनमें एक पिता की चिंता, एक शिक्षक की सख्ती और एक इंसान की भावनात्मक कमजोरी भी दिखाई गई।
यही संतुलन उनके किरदार को यादगार बनाता है।
2007 में ‘दिल मिल गए’ शुरू हुआ।
इस बार कहानी युवा डॉक्टरों की नई पीढ़ी के इर्द-गिर्द थी, लेकिन डॉ. शशांक के रूप में मोहनीश बहल पुराने और नए दौर के बीच एक कड़ी बने रहे।
वह इस शो में करण सिंह ग्रोवर, जेनिफर विंगेट, शिल्पा आनंद और दूसरे युवा कलाकारों के साथ नजर आए।
उनके सह-कलाकारों ने भी बाद में सेट पर उनके प्रोफेशनल रवैये और अनुभव की चर्चा की।
2011 में मोहनीश बहल ने ‘कुछ तो लोग कहेंगे’ में डॉ. आशुतोष माथुर का किरदार निभाया।
इस बार वह सिर्फ सख्त डॉक्टर नहीं बल्कि प्रेम, उम्र और रिश्तों के सवालों से जूझते एक पुरुष के रूप में दिखाई दिए।
उनके साथ कृतिका कामरा मुख्य भूमिका में थीं।
हालांकि उन्होंने कुछ महीनों बाद शो छोड़ दिया।
उस समय उनकी विदाई को स्वास्थ्य कारणों से जोड़ा गया था।
मोहनीश बहल की निजी जिंदगी बॉलीवुड की उन कहानियों में से है जो लंबे समय तक सुर्खियों से दूर रहीं।
उन्होंने अभिनेत्री एकता सोहिनी, जिन्हें कई स्रोतों में आरती बहल के नाम से भी दर्ज किया गया है, से 23 अप्रैल 1992 को शादी की। दोनों की दो बेटियां हैं—प्रनूतन बहल और कृषा बहल।
मोहनीश और एकता ने लंबे समय तक अपनी शादी को मीडिया की चकाचौंध से दूर रखा।
2026 में दोनों ने अपनी शादी की 34वीं सालगिरह भी मनाई। इस मौके पर एकता ने सोशल मीडिया पर अपने पति के लिए भावुक संदेश साझा किया।
यह रिश्ता इसलिए भी खास है क्योंकि दोनों ने इंडस्ट्री की चमक-दमक के बीच अपनी पारिवारिक जिंदगी को अपेक्षाकृत निजी रखा।
मोहनीश बहल की बड़ी बेटी प्रनूतन बहल ने भी अभिनय को अपना करियर चुना।
उन्होंने 2019 में सलमान खान द्वारा निर्मित फिल्म ‘नोटबुक’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया।
प्रनूतन सिर्फ मोहनीश की बेटी नहीं हैं, बल्कि वह नूतन की पोती भी हैं।
उनका फिल्मी परिवार मुखर्जी-समर्थ परिवार की कई पीढ़ियों से जुड़ा हुआ है।
प्रनूतन ने फिल्मों में आने से पहले कानून की पढ़ाई भी की और प्रोफेशनल लॉयर के तौर पर अपनी शिक्षा पूरी की।
यह बात मोहनीश बहल परिवार की उस सोच को भी दिखाती है जिसमें अभिनय के साथ शिक्षा और व्यक्तिगत पहचान को भी महत्व दिया गया।
मोहनीश बहल का करियर विवादों की वजह से नहीं बल्कि उनके काम की विविधता के कारण चर्चा में रहा है।
हालांकि ‘कुछ तो लोग कहेंगे’ छोड़ने के समय उनके स्वास्थ्य को लेकर खबरें आई थीं, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में स्वयं अभिनेता की तरफ से इसे शो छोड़ने का कारण बताया गया था। इसलिए इसके आगे किसी तरह की अटकल को तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
इसी तरह उनकी निजी जिंदगी को लेकर समय-समय पर तरह-तरह की अफवाहें सामने आती रही हैं, लेकिन हर रिपोर्ट को तथ्य मानना सही नहीं है।
मोहनीश बहल की सार्वजनिक रूप से पुष्ट निजी जिंदगी में उनकी पत्नी एकता सोहिनी और दो बेटियों के साथ उनका पारिवारिक जीवन प्रमुख रूप से सामने आता है।
मोहनीश बहल की कुल संपत्ति को लेकर इंटरनेट पर अलग-अलग आंकड़े दिखाई देते हैं।
लेकिन इन आंकड़ों की स्वतंत्र और विश्वसनीय पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
इसलिए किसी अनुमानित रकम को उनकी verified net worth बताना सही नहीं होगा।
एक पुराने इंटरव्यू में मोहनीश ने जरूर कहा था कि वह अपनी घरेलू जरूरतों के लिए अभिनय की कमाई पर आर्थिक रूप से निर्भर नहीं हैं। उन्होंने यह भी बताया था कि परिवार की प्रॉपर्टीज से जुड़े काम उन्हें व्यस्त रखते हैं और उन्होंने लोनावला में एक घर बनवाया था।
इससे उनकी आर्थिक स्थिति के बारे में एक संकेत जरूर मिलता है, लेकिन इससे कोई निश्चित नेट वर्थ तय नहीं की जा सकती।
मोहनीश और सलमान की दोस्ती का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि दोनों की जिंदगी के शुरुआती संघर्षों का दौर लगभग एक-दूसरे के सामने था।
एक पुराने इंटरव्यू में मोहनीश ने बताया कि जब सलमान ने अभिनेता बनने की इच्छा जताई थी तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में उसकी लंबाई को लेकर सवाल उठाया था।
उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही लड़का आगे चलकर हिंदी सिनेमा का सबसे बड़ा सुपरस्टार बनेगा।
बाद में सलमान ने ही ‘मैंने प्यार किया’ में मोहनीश के नाम की सिफारिश की।
मोहनीश ने 2022 में बॉलीवुड हंगामा से बातचीत में इस दोस्ती को पुराना रिश्ता बताया और कहा कि सलमान ने फिल्म में उनके लिए नाम सुझाया था।
कभी एक दोस्त दूसरे की क्षमता पर मजाक कर रहा था और कुछ साल बाद वही दोस्त उसके करियर के सबसे महत्वपूर्ण दरवाजे खोलने वालों में शामिल हो गया।
सिनेमा की दुनिया में इससे ज्यादा खूबसूरत संयोग शायद कम ही मिलते हैं।
मोहनीश बहल की कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है कि किसी कलाकार के करियर में कोई किरदार छोटा या बड़ा नहीं होता।
उन्होंने जिस समय ‘मैंने प्यार किया’ का विलेन स्वीकार किया, उस समय वह अपने करियर में हीरो के रूप में सफल नहीं हो पाए थे।
वह भूमिका उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं थी।
उसने उन्हें यह समझाया कि अभिनेता की असली ताकत उसकी भूमिका के नाम में नहीं, बल्कि उसे निभाने के तरीके में होती है।
इसके बाद उन्होंने नेगेटिव, पॉजिटिव, पारिवारिक, पुलिस अधिकारी, डॉक्टर और पिता जैसे अलग-अलग किरदार निभाए।
यही विविधता उनके लंबे करियर की सबसे बड़ी ताकत बनी।
मोहनीश बहल का नाम आते ही नूतन का नाम स्वाभाविक रूप से याद आता है।
आखिरकार वह उस अभिनेत्री के बेटे हैं जिन्होंने हिंदी सिनेमा में अभिनय की एक पूरी मिसाल कायम की।
लेकिन मोहनीश की उपलब्धि यह रही कि उन्होंने अपनी मां की लोकप्रियता की छाया में रहने के बजाय अपने लिए अलग पहचान बनाई।
उनका सफर बताता है कि फिल्मी परिवार से मिल सकता है, लेकिन लंबी पारी केवल प्रतिभा, धैर्य और लगातार काम से बनती है।
आज जब उनके करियर को पीछे मुड़कर देखा जाता है तो ‘नूतन के बेटे’ से कहीं ज्यादा मजबूत पहचान ‘मोहनीश बहल—एक चरित्र अभिनेता’ की दिखाई देती है।
मोहनीश बहल की उपलब्ध फिल्मोग्राफी में उनकी आखिरी प्रमुख फिल्म रिलीज ‘पानीपत’ (2019) दर्ज है। इसके बाद उनकी सक्रियता पहले की तुलना में कम दिखाई देती है।
टीवी पर भी उनका अंतिम बड़ा नियमित कार्य 2019-20 के ‘संजिवनी’ रिबूट से जुड़ा रहा, जिसमें उन्होंने एक बार फिर डॉ. शशांक गुप्ता की भूमिका निभाई थी। जनवरी 2020 में उन्होंने शो से अलग होने का फैसला किया और इसे सौहार्दपूर्ण निर्णय बताया।
हाल के वर्षों में उनका फोकस पहले की तुलना में ज्यादा चयनात्मक नजर आता है।
यह भी उनकी पुरानी सोच से मेल खाता है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वह सिर्फ लगातार काम करने के लिए काम नहीं करना चाहते और ऐसा काम पसंद करते हैं जो उन्हें एक अभिनेता के रूप में संतुष्ट करे।
यही वजह है कि मोहनीश बहल को आज सिर्फ फिल्मों की संख्या से नहीं, बल्कि उनके यादगार किरदारों से याद किया जाता है।
हर अभिनेता का करियर एक जैसा नहीं होता।
किसी को पहली फिल्म में सफलता मिल जाती है, किसी को वर्षों इंतजार करना पड़ता है।
मोहनीश बहल की कहानी उस दूसरे रास्ते की कहानी है।
उन्होंने फिल्मी परिवार में जन्म लिया, लेकिन शुरुआत में असफल हुए।
उन्होंने हीरो बनने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
उन्होंने अभिनय छोड़ने के बारे में सोचा और पायलट बनने की तैयारी शुरू कर दी।
फिर ‘मैंने प्यार किया’ में विलेन बने।
वह फिल्म हिट हुई और उनका करियर बच गया।
इसके बाद उन्होंने खुद को एक ही छवि में कैद नहीं किया। फिल्मों से टीवी तक और विलेन से पिता, भाई, डॉक्टर और जिम्मेदार पारिवारिक व्यक्ति तक उन्होंने कई रंग दिखाए।
शायद यही वजह है कि चार दशक के करीब फैले उनके सफर को सिर्फ स्टारडम की कहानी कहना अधूरा होगा।
यह दूसरा मौका मिलने पर उसे पहचान लेने वाले अभिनेता की कहानी है।
मोहनीश बहल की जिंदगी और करियर का सबसे खूबसूरत पहलू यही है कि उनकी सबसे बड़ी सफलता उस वक्त आई, जब उन्हें लगने लगा था कि शायद उनका फिल्मी करियर खत्म हो चुका है।
अगर वह उस समय ‘विलेन’ का किरदार ठुकरा देते, तो शायद हिंदी सिनेमा को वह मोहनीश बहल कभी नहीं मिलता जिसे दर्शक आज भी ‘जीवन’, ‘राजेश’, ‘विवेक’ और ‘डॉ. शशांक’ जैसे किरदारों से याद करते हैं।
उनकी कहानी यह याद दिलाती है कि करियर में असफलता हमेशा आखिरी अध्याय नहीं होती।
कभी-कभी वही मोड़, जिसे हम अंत समझ लेते हैं, असल में एक नई शुरुआत का दरवाजा होता है।
और मोहनीश बहल की कहानी शायद इसी वजह से आज भी इतनी खास है—उन्होंने हीरो बनने की कोशिश में शुरुआत की थी, लेकिन आखिरकार एक ऐसे अभिनेता बन गए जिन्हें उनके किरदारों ने स्टार बना दिया।
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