ईशा कोप्पिकर की पूरी कहानी: ‘खल्लास गर्ल’ का संघर्ष, करियर, शादी, तलाक और नई शुरुआत
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| अक्षय-सैफ की जोड़ी हुई पास? |
कभी-कभी किसी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत उसकी कहानी नहीं, बल्कि उसके पीछे खड़े नाम होते हैं। ‘Haiwaan’ के साथ भी कुछ ऐसा ही है। एक तरफ अक्षय कुमार, दूसरी तरफ सैफ अली खान और निर्देशन की कमान प्रियदर्शन के हाथों में। ऊपर से करीब 17 साल बाद अक्षय और सैफ को एक साथ पर्दे पर देखने का मौका।
ऐसे में फिल्म को लेकर दर्शकों की उम्मीदें स्वाभाविक रूप से काफी ज्यादा थीं। 11 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई यह फिल्म एक अपराध-रोमांचक कहानी के जरिए एक नेत्रहीन व्यक्ति और एक खतरनाक अपराधी के बीच संघर्ष को सामने रखती है।
लेकिन बड़ा सवाल यही है—क्या ‘Haiwaan’ सिर्फ अपने सितारों के नाम पर चलती है या वाकई एक मजबूत रोमांचक फिल्म बन पाती है?
शुरुआती समीक्षाओं को देखें तो जवाब पूरी तरह हां या ना में नहीं है। फिल्म में कुछ प्रभावशाली क्षण हैं, कलाकारों ने मेहनत की है, लेकिन पटकथा और रफ्तार कई जगह फिल्म को पीछे खींचती दिखाई देती है।
फिल्म की कहानी श्याम राणे के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका किरदार सैफ अली खान ने निभाया है। श्याम नेत्रहीन है और मुंबई की एक सोसाइटी में काम करता है।
उसकी आंखें भले ही दुनिया को नहीं देख सकतीं, लेकिन उसकी बाकी इंद्रियां बेहद तेज हैं। यही खूबी उसे उस समय एक असाधारण स्थिति में पहुंचा देती है, जब उसका सामना एक खतरनाक अपराधी से होता है।
दूसरी तरफ है परशुराम, जिसे अक्षय कुमार ने निभाया है। वह ऐसा किरदार है जिसके भीतर गुस्सा, बदले की भावना और हिंसा लगातार बढ़ती दिखाई देती है।
कहानी धीरे-धीरे एक बिल्ली-चूहे के खेल में बदल जाती है, जहां एक तरफ ऐसा इंसान है जो देख नहीं सकता और दूसरी तरफ ऐसा दुश्मन है जिसे रोकना बेहद मुश्किल है।
फिल्म का मूल आधार प्रियदर्शन की अपनी 2016 की मलयालम फिल्म ‘Oppam’ से लिया गया है। नई फिल्म में कहानी को हिंदी दर्शकों और मुंबई की पृष्ठभूमि के अनुरूप पेश करने की कोशिश की गई है।
कहानी का विचार दिलचस्प है। समस्या यह है कि फिल्म कई जगह अपने मूल रोमांच को छोड़कर दूसरे ट्रैक पर चली जाती है।
‘Haiwaan’ में सबसे ज्यादा चर्चा सैफ अली खान के काम को लेकर हुई है।
श्याम का किरदार आसान नहीं था। एक ऐसे व्यक्ति को निभाना जो देख नहीं सकता, लेकिन आसपास की छोटी-छोटी आवाजों और संकेतों से परिस्थितियों को समझता है, अभिनेता के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सैफ कई दृश्यों में इस किरदार की बेचैनी और असुरक्षा को पकड़ते हैं। हालांकि कुछ समीक्षकों ने उनके नेत्रहीन किरदार के प्रस्तुतीकरण को पूरी तरह विश्वसनीय नहीं माना, फिर भी कुल मिलाकर उनकी परफॉर्मेंस को फिल्म की मजबूत बातों में गिना गया है।
अक्षय कुमार इस बार अपने सामान्य नायक वाले अंदाज से काफी अलग नजर आते हैं।
परशुराम का किरदार कहानी में खतरे का माहौल पैदा करने के लिए है। अक्षय के स्क्रीन प्रेजेंस में वह डर पूरी तरह हर जगह नहीं बन पाता, लेकिन उनके और सैफ के आमने-सामने वाले दृश्य फिल्म को कुछ जरूरी ऊर्जा जरूर देते हैं।
कुछ समीक्षाओं में दोनों कलाकारों के टकराव को फिल्म के बेहतर हिस्सों में शामिल किया गया है।
बोमन ईरानी, श्रिया पिलगांवकर, सैयामी खेर, राजपाल यादव और असरानी जैसे कलाकार फिल्म को सहारा देते हैं।
खास तौर पर बोमन ईरानी कहानी में भावनात्मक और कथानक से जुड़ा महत्वपूर्ण पक्ष संभालते हैं।
फिल्म में मोहनलाल की मौजूदगी भी दर्शकों के लिए एक खास आकर्षण बनी है और शुरुआती सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं में उनके कैमियो की चर्चा देखने को मिली है।
प्रियदर्शन थ्रिल और कॉमेडी दोनों को संभालने के लिए जाने जाते हैं। ‘Haiwaan’ में उन्होंने अपराध, रहस्य, एक्शन और हास्य को एक साथ रखने की कोशिश की है।
फिल्म के कुछ हिस्सों में वातावरण अच्छा बनता है। खासकर अंतिम हिस्से में तनाव और रोमांच बढ़ता है।
लेकिन यही फिल्म की सबसे बड़ी समस्या भी है।
कहानी कई जगह जरूरत से ज्यादा चीजें एक साथ दिखाने लगती है। अलग-अलग उपकथाएं मुख्य कहानी की गति को प्रभावित करती हैं। कुछ समीक्षकों ने पटकथा को बिखरी हुई और जरूरत से ज्यादा लंबी माना है।
फिल्म के रोमांच को बढ़ाने में बैकग्राउंड म्यूजिक की भूमिका महत्वपूर्ण है।
हालांकि गानों को लेकर प्रतिक्रिया बहुत मजबूत नहीं रही है। कुछ समीक्षाओं ने फिल्म में गानों की संख्या और उनके इस्तेमाल को कहानी की गति के लिए बाधा माना है।
मुंबई की पृष्ठभूमि और अंधेरे माहौल का इस्तेमाल फिल्म के थ्रिलर पक्ष को मजबूत करने की कोशिश करता है।
कई दृश्यों में कैमरा दर्शक को श्याम की सीमित दृष्टि वाली दुनिया के करीब ले जाने की कोशिश करता है।
यहीं फिल्म सबसे ज्यादा संघर्ष करती है।
करीब 2 घंटे 44 मिनट की अवधि वाली फिल्म कुछ दर्शकों को लंबी महसूस हो सकती है।
जहां कहानी को तेजी से आगे बढ़ना चाहिए, वहां कई बार दूसरे ट्रैक और अतिरिक्त दृश्य आ जाते हैं।
अगर संपादन थोड़ा और कसा हुआ होता तो फिल्म का रोमांच कहीं ज्यादा प्रभावी हो सकता था।
‘Haiwaan’ को लेकर शुरुआती दर्शक प्रतिक्रिया पूरी तरह एक जैसी नहीं है।
सोशल मीडिया पर कुछ दर्शकों ने सैफ अली खान की परफॉर्मेंस, अक्षय कुमार के अलग अंदाज और मोहनलाल की मौजूदगी की तारीफ की है। शुरुआती शो के बाद कुछ प्रतिक्रियाओं में फिल्म को मनोरंजक थ्रिलर बताया गया।
लेकिन दूसरी तरफ कुछ दर्शकों और समीक्षकों को फिल्म का पहला हिस्सा धीमा लगा।
यानी शुरुआती प्रतिक्रिया को मिली-जुली प्रतिक्रिया कहना ज्यादा सही होगा।
फिल्म का एक वर्ग इसके अंधेरे माहौल और कलाकारों की वजह से प्रभावित हुआ है, जबकि दूसरे वर्ग को कहानी का बिखराव और लंबा रनटाइम खटक रहा है।
इसलिए अभी ‘Haiwaan’ को पूरी तरह हिट या फ्लॉप बताना जल्दबाजी होगी।
फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर सबसे बड़ा फायदा इसके कलाकारों के नाम से मिल सकता है।
अक्षय कुमार + सैफ अली खान + प्रियदर्शन की तिकड़ी दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने के लिए पर्याप्त है।
पहले दिन खासकर मल्टीप्लेक्स और बड़े शहरों में फिल्म को उत्सुकता का फायदा मिल सकता है। वहीं अक्षय कुमार की लोकप्रियता के कारण मास ऑडियंस भी फिल्म की तरफ आकर्षित हो सकती है।
लेकिन लंबे समय तक बॉक्स ऑफिस पर टिके रहने के लिए सिर्फ स्टार पावर काफी नहीं होगी।
फिल्म की असली परीक्षा दर्शकों की जुबान और सप्ताहांत के बाद होने वाली कमाई में होगी।
अभी फिल्म के रिलीज हुए बहुत कम समय हुआ है, इसलिए किसी निश्चित बॉक्स ऑफिस आंकड़े या कलेक्शन का दावा करना सही नहीं होगा। फिलहाल इसे शुरुआती प्रतिक्रिया के आधार पर एक मध्यम संभावना वाली थ्रिलर कहना ज्यादा उचित है।
अगर आपको अपराध-रोमांचक फिल्में पसंद हैं और आप अक्षय कुमार या सैफ अली खान के प्रशंसक हैं, तो ‘Haiwaan’ को एक मौका दिया जा सकता है।
फिल्म का मूल विचार दिलचस्प है और सैफ का किरदार कहानी में कुछ अलग करने की कोशिश करता है।
लेकिन अगर आप बहुत कसी हुई, तेज रफ्तार और पूरी तरह तार्किक थ्रिलर की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो फिल्म आपको कुछ जगह निराश कर सकती है।
सबसे बड़ी कमी यह है कि फिल्म में एक अच्छी थ्रिलर बनने की क्षमता थी, लेकिन पटकथा उसे पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पाती।
फिल्म का अंतिम हिस्सा कुछ हद तक इसकी कमियों की भरपाई करता है, लेकिन वहां तक पहुंचने का सफर थोड़ा लंबा है।
‘Haiwaan’ ऐसी फिल्म है जिसमें अच्छा आइडिया, बड़े सितारे और अनुभवी निर्देशक मौजूद हैं, लेकिन इन तीनों का मेल हर जगह उम्मीद के मुताबिक असर पैदा नहीं कर पाता।
सैफ अली खान फिल्म में ज्यादा प्रभाव छोड़ते हैं। अक्षय कुमार का किरदार अलग है, लेकिन उसे वह गहराई नहीं मिल पाती जिसकी उम्मीद थी।
प्रियदर्शन कुछ दृश्यों में अपना अनुभव दिखाते हैं, लेकिन कमजोर और बिखरी हुई पटकथा फिल्म के रोमांच को लगातार कम करती रहती है।
अगर आप इसे सिर्फ एक मनोरंजक वन-टाइम थ्रिलर की तरह देखते हैं, तो फिल्म में कुछ अच्छे पल मिल सकते हैं।
लेकिन अगर उम्मीद है कि अक्षय-सैफ की जोड़ी एक यादगार थ्रिलर लेकर आएगी, तो ‘Haiwaan’ शायद उस स्तर तक नहीं पहुंचती।
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