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| “मेगास्टार बनने की अनसुनी कहानी!” |
कुछ सितारे फिल्मों में आते हैं और कुछ सितारे एक पूरी फिल्म इंडस्ट्री की पहचान बन जाते हैं। तेलुगु सिनेमा में चिरंजीवी का नाम इसी दूसरी श्रेणी में आता है।
एक साधारण परिवार से निकलकर अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाले कोनिडेला शिवशंकर वरप्रसाद, जिन्हें दुनिया आज चिरंजीवी के नाम से जानती है, ने सिर्फ फिल्मों में सफलता हासिल नहीं की, बल्कि दक्षिण भारतीय सिनेमा में स्टारडम की परिभाषा बदल दी।
उनका सफर 1970 के दशक के अंत में शुरू हुआ। शुरुआत में छोटे और नकारात्मक किरदार मिले, फिर धीरे-धीरे वह मुख्यधारा के नायक बने। इसके बाद Khaidi, Swayam Krushi, Rudraveena, Jagadeka Veerudu Athiloka Sundari, Gharana Mogudu, Indra और Shankar Dada MBBS जैसी फिल्मों ने उन्हें तेलुगु सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में शामिल कर दिया।
लेकिन चिरंजीवी की कहानी केवल बॉक्स ऑफिस की कहानी नहीं है। इसमें संघर्ष है, प्रयोग है, राजनीति है, समाजसेवा है और एक ऐसे कलाकार की कहानी है जिसने अपने प्रशंसकों की ताकत को सामाजिक कार्यों से जोड़ने की कोशिश की।
आज वह भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित वरिष्ठ सितारों में शामिल हैं और भारत सरकार द्वारा उन्हें 2024 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा चुका है।
आइए जानते हैं चिरंजीवी की जिंदगी और करियर की वह कहानी, जिसने उन्हें सिर्फ 'मेगास्टार' नहीं, बल्कि एक संस्था बना दिया।
चिरंजीवी का जन्म 22 अगस्त 1955 को आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी क्षेत्र के मोगलथुर में हुआ। उनका जन्म नाम कोनिडेला शिवशंकर वरप्रसाद है।
उनके पिता कोनिडेला वेंकट राव पुलिस विभाग में काम करते थे और नौकरी के कारण उनका परिवार अलग-अलग जगहों पर रहा। बचपन का एक हिस्सा चिरंजीवी ने अपने नाना-नानी/दादा-दादी के साथ भी बिताया।
उनकी शिक्षा भी एक ही शहर तक सीमित नहीं रही। उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर पढ़ाई की और आगे चलकर कॉमर्स की पढ़ाई पूरी की।
युवा चिरंजीवी का झुकाव अभिनय की ओर बढ़ता गया। उन्होंने चेन्नई स्थित Madras Film Institute में अभिनय की ट्रेनिंग ली और इसी दौरान उनके अंदर अभिनेता बनने का सपना और मजबूत हुआ।
उनका अभिनय सफर किसी फिल्मी परिवार के स्थापित सुपरस्टार के रूप में शुरू नहीं हुआ था। उन्हें भी इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए लगातार काम करना पड़ा।
यही वजह है कि उनकी सफलता को अक्सर मेहनत और अनुशासन से जोड़ा जाता है।
चिरंजीवी ने 1978 में Punadhirallu से फिल्मी शुरुआत की। हालांकि Pranam Khareedu उनकी फिल्मों में पहले रिलीज हुई थी। शुरुआती दौर में उन्हें छोटे और अलग-अलग तरह के किरदार निभाने पड़े।
यह वह दौर था जब चिरंजीवी अभी स्टार नहीं बने थे।
उन्होंने शुरुआती वर्षों में ऐसे किरदार भी निभाए जिनमें नायक की पारंपरिक छवि से अलग शेड्स थे। I Love You और Idi Katha Kaadu जैसी फिल्मों में उनके काम ने यह दिखाया कि वह सिर्फ एक्शन हीरो बनने के लिए नहीं आए थे।
1982 में Intlo Ramayya Veedilo Krishnayya ने उन्हें मुख्य नायक के तौर पर मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसी दौर में Subhalekha जैसी फिल्म आई, जिसमें सामाजिक समस्या को कहानी का हिस्सा बनाया गया। फिल्म में दहेज जैसी सामाजिक बुराई पर सवाल उठाया गया और चिरंजीवी को अभिनय के लिए सम्मान भी मिला।
यहीं से उनके करियर में एक महत्वपूर्ण बात साफ होने लगी—चिरंजीवी केवल 'मास हीरो' नहीं थे।
वह जरूरत के अनुसार सामाजिक, भावनात्मक, गंभीर और मनोरंजक भूमिकाएं निभाने की क्षमता भी रखते थे।
हर सुपरस्टार के करियर में एक ऐसा मोड़ आता है, जब उसकी पहचान अचानक बड़े स्तर पर बदल जाती है।
चिरंजीवी के लिए वह मोड़ था 1983 की Khaidi।
फिल्म ने उनके एक्शन, स्क्रीन प्रेजेंस और डांसिंग स्टाइल को दर्शकों के बीच जबरदस्त लोकप्रिय बनाया। इसके बाद उनका स्टारडम तेजी से बढ़ा और वह तेलुगु सिनेमा के प्रमुख नायकों की कतार में पहुंच गए।
उनकी डांसिंग भी उनके स्टारडम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी।
जिस दौर में भारतीय फिल्मों में नायक के डांस को अक्सर सीमित शैली में देखा जाता था, उस समय चिरंजीवी ने तेज मूवमेंट, ऊर्जा और स्टाइल को अपने स्क्रीन व्यक्तित्व का हिस्सा बनाया।
उनका एक्शन और डांस बाद में उनकी पहचान बन गया।
लेकिन उनके करियर की खूबसूरती यह थी कि उन्होंने केवल एक ही तरह की फिल्मों पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग शैलियों में काम किया।
1980 का दशक चिरंजीवी के लिए लगातार मजबूत होता गया।
Pasivadi Pranam, Swayam Krushi, Jebu Donga, Rudraveena और दूसरी फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी।
विशेष रूप से K. Viswanath की Swayam Krushi ने यह साबित किया कि चिरंजीवी बड़े स्टार होने के बावजूद साधारण और जमीन से जुड़े किरदार निभा सकते हैं।
इसके बाद Rudraveena जैसी फिल्म उनके करियर की अलग पहचान बनी। यह व्यावसायिक रूप से उनकी बड़ी मसाला फिल्मों जैसी सफलता हासिल नहीं कर सकी, लेकिन फिल्म को आलोचनात्मक सम्मान मिला। Rudraveena ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में भी महत्वपूर्ण सम्मान हासिल किया।
चिरंजीवी के करियर में यही विरोधाभास बेहद दिलचस्प रहा।
एक तरफ वह बड़े पैमाने की मनोरंजक फिल्मों के सुपरस्टार थे, तो दूसरी तरफ सामाजिक विषयों और गंभीर किरदारों से भी जुड़े रहे।
1992 की Gharana Mogudu चिरंजीवी के करियर की सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक फिल्मों में गिनी जाती है।
K. Raghavendra Rao के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उनके साथ Nagma और Vani Viswanath नजर आईं। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ा रिकॉर्ड बनाया और 10 करोड़ रुपये से अधिक distributor share हासिल करने वाली पहली तेलुगु फिल्म के रूप में दर्ज हुई।
यह सिर्फ एक फिल्म की सफलता नहीं थी।
इस दौर तक चिरंजीवी का नाम इतना बड़ा हो चुका था कि उनकी फिल्मों का प्रदर्शन एक इंडस्ट्री इवेंट की तरह देखा जाने लगा था।
1990 के दशक की शुरुआत में उन्हें भारत के सबसे अधिक पारिश्रमिक पाने वाले अभिनेताओं में गिना जाने लगा। Aapadbandhavudu के लिए उनकी बताई गई फीस उस समय भारतीय सिनेमा में सबसे अधिक पारिश्रमिकों में शामिल थी।
यानी एक ऐसा अभिनेता जिसने कुछ साल पहले इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष किया था, अब भारतीय फिल्म स्टारडम के शीर्ष स्तर पर पहुंच चुका था।
चिरंजीवी की फिल्मोग्राफी बहुत लंबी है। उनके करियर में 150 से अधिक फिल्मों का उल्लेख मिलता है और भारत सरकार की 2024 की पद्म पुरस्कार citation में उनके 45 वर्ष के करियर के दौरान 155 फिल्मों में काम करने का उल्लेख है।
उनकी चर्चित फिल्मों में शामिल हैं:
इन फिल्मों के जरिए चिरंजीवी ने एक्शन, कॉमेडी, रोमांस, सामाजिक ड्रामा, पीरियड और कमर्शियल एंटरटेनमेंट जैसे कई रंगों में खुद को साबित किया।
चिरंजीवी ने अपने लंबे करियर में कई पीढ़ियों की अभिनेत्रियों के साथ काम किया।
उनकी चर्चित ऑन-स्क्रीन जोड़ियों में श्रीदेवी, विजयशांति, राधा, राधिका, भानुप्रिया, नयना तारा, त्रिशा कृष्णन, नीलांबरी और नयनतारा जैसी अभिनेत्रियां शामिल रही हैं।
श्रीदेवी के साथ उनकी जोड़ी विशेष रूप से याद की जाती है। दोनों ने Jagadeka Veerudu Athiloka Sundari, Ranuva Veeran, SP Parasuram और Mosagadu जैसी फिल्मों में साथ काम किया।
चिरंजीवी ने एक बातचीत में श्रीदेवी के साथ काम करने के अनुभव को बेहद खास बताया था और उनकी डांसिंग तथा सहज अभिनय की प्रशंसा की थी।
नई पीढ़ी में उन्होंने नयनतारा के साथ भी काम किया। दोनों की जोड़ी Sye Raa Narasimha Reddy, GodFather और बाद में Mana Shankara Vara Prasad Garu में दिखाई दी।
पुरुष सह-कलाकारों की बात करें तो उनके साथ वेंकटेश दग्गुबाती, नागार्जुन, रवि तेजा, राम चरण, सलमान खान और कई अन्य कलाकार अलग-अलग फिल्मों में नजर आए हैं।
Mana Shankara Vara Prasad Garu में चिरंजीवी और वेंकटेश की जोड़ी विशेष आकर्षण रही, जबकि नयनतारा भी फिल्म का महत्वपूर्ण हिस्सा थीं। फिल्म 12 जनवरी 2026 को रिलीज हुई।
चिरंजीवी ने 20 फरवरी 1980 को सुरेखा से शादी की। सुरेखा प्रसिद्ध तेलुगु अभिनेता और कॉमेडियन Allu Ramalingaiah की बेटी हैं।
दोनों के तीन बच्चे हैं—बेटियां सुष्मिता और श्रीजा, और बेटा राम चरण।
राम चरण ने आगे चलकर अपने पिता की तरह तेलुगु सिनेमा में बड़ा मुकाम बनाया और आज वह भारतीय सिनेमा के प्रमुख अभिनेताओं में गिने जाते हैं।
चिरंजीवी के छोटे भाई नागेंद्र बाबू भी अभिनेता और निर्माता रहे हैं, जबकि उनके दूसरे छोटे भाई पवन कल्याण अभिनेता से राजनेता बने और आंध्र प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
इस तरह चिरंजीवी का परिवार भारतीय सिनेमा के सबसे चर्चित फिल्म परिवारों में शामिल हो गया।
लगभग तीन दशक तक सिनेमा में सफलता हासिल करने के बाद चिरंजीवी ने 2008 में राजनीति में प्रवेश किया।
उन्होंने Praja Rajyam Party की स्थापना की और सामाजिक न्याय को अपने राजनीतिक एजेंडे का प्रमुख हिस्सा बताया।
2009 के आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने 18 सीटें जीतीं और चिरंजीवी खुद तिरुपति से विधायक बने।
हालांकि राजनीति में उनकी यात्रा फिल्मों जितनी सीधी नहीं रही।
2011 में Praja Rajyam Party का कांग्रेस में विलय हुआ। इसके बाद चिरंजीवी राज्यसभा पहुंचे और 2012 में उन्हें तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार में पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया।
राजनीतिक जीवन के दौरान उन्होंने पर्यटन को बढ़ावा देने से जुड़ी कई पहलों में भूमिका निभाई और 2013 में Cannes Film Festival में Incredible India से जुड़े कार्यक्रम में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया।
बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली और फिल्मों में वापसी की।
चिरंजीवी का राजनीतिक सफर आलोचनाओं से पूरी तरह मुक्त नहीं रहा।
Praja Rajyam Party के कांग्रेस में विलय को लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल उठे। आलोचकों ने इसे उनके शुरुआती राजनीतिक एजेंडे से अलग बदलाव के तौर पर देखा। उस समय उनके फैसले पर राजनीतिक बहस भी हुई।
लेकिन इस पूरे अध्याय को केवल विवाद के रूप में देखना भी उनके राजनीतिक सफर को अधूरा बनाता है।
उन्होंने एक लोकप्रिय अभिनेता से राजनेता बनने का कठिन बदलाव किया, चुनाव लड़ा, विधायक और राज्यसभा सदस्य बने और केंद्र सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली।
2018 में उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हुआ और इसके बाद वह मुख्य रूप से फिल्मों पर केंद्रित रहे।
राजनीति में सक्रिय रहने के कारण चिरंजीवी ने लगभग एक दशक तक फिल्मों से दूरी बनाए रखी।
फिर 2017 में Khaidi No. 150 के साथ उन्होंने बड़े पर्दे पर वापसी की।
उनकी वापसी अपने आप में एक सिनेमाई घटना बन गई। उम्र और लंबे अंतराल के बावजूद उनके प्रशंसकों का उत्साह कम नहीं हुआ।
इसके बाद Sye Raa Narasimha Reddy ने उन्हें एक ऐतिहासिक किरदार में दिखाया। फिर Acharya, GodFather, Waltair Veerayya और Bhola Shankar जैसी फिल्मों का दौर आया।
इन फिल्मों के परिणाम अलग-अलग रहे, लेकिन एक बात लगातार बनी रही—चिरंजीवी का स्टारडम।
2022 में उन्हें गोवा में आयोजित 53वें International Film Festival of India में Indian Film Personality of the Year सम्मान दिया गया।
2023 की Waltair Veerayya ने चिरंजीवी को एक बार फिर बड़े कमर्शियल एंटरटेनर के रूप में दर्शकों के बीच मजबूती से स्थापित किया।
फिल्म में उनके साथ रवि तेजा भी महत्वपूर्ण भूमिका में थे।
यह फिल्म उस बात का उदाहरण बनी कि उम्र बढ़ने के बावजूद चिरंजीवी अपनी स्क्रीन एनर्जी, कॉमेडी टाइमिंग और एक्शन इमेज को दर्शकों के सामने प्रभावी तरीके से पेश कर सकते हैं।
उनकी यही क्षमता उन्हें कई दशकों से बाकी सितारों से अलग करती रही है।
2026 में चिरंजीवी ने Mana Shankara Vara Prasad Garu के साथ एक बार फिर दर्शकों के सामने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
अनिल रविपुडी द्वारा निर्देशित इस फिल्म में चिरंजीवी के साथ वेंकटेश दग्गुबाती और नयनतारा नजर आए। फिल्म 12 जनवरी 2026 को रिलीज हुई।
इसके बाद भी चिरंजीवी का काम रुका नहीं है।
उनकी आने वाली परियोजनाओं में Vishwambhara और Bobby Kolli के निर्देशन में बन रही फिल्म Kaaka प्रमुख हैं। अगस्त 2026 में Kaaka का शीर्षक और झलक उनके जन्मदिन के मौके पर सामने आई और फिल्म की रिलीज संक्रांति 2027 के लिए बताई गई है।
Vishwambhara एक फैंटेसी-एक्शन फिल्म है, जिसमें चिरंजीवी के साथ त्रिशा कृष्णन और कुणाल कपूर जैसे कलाकार जुड़े हैं।
यानी 70 की उम्र पार करने के बाद भी चिरंजीवी का फिल्मी सफर थमा नहीं है।
चिरंजीवी की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष शायद उनका सामाजिक कार्य है।
उन्होंने Chiranjeevi Charitable Trust की स्थापना 1998 में की। भारत सरकार की पद्म विभूषण citation के अनुसार, ट्रस्ट के माध्यम से 25 वर्षों में 10 लाख से अधिक यूनिट रक्त संग्रह और जरूरतमंदों तक रक्तदान में मदद की गई। इसी citation में 10 हजार से अधिक लोगों की कॉर्नियल ट्रांसप्लांट के जरिए दृष्टि बहाल करने में सहायता का उल्लेख है।
COVID-19 महामारी के दौरान उनके प्रयास भी चर्चा में रहे।
सरकारी citation के अनुसार, चिरंजीवी से जुड़े प्रयासों के तहत तेलुगु राज्यों में 42 free oxygen banks स्थापित किए गए, जिनसे जरूरतमंद लोगों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में मदद मिली।
यही वह जगह है जहां उनके स्टारडम का एक अलग अर्थ दिखाई देता है।
उन्होंने अपने प्रशंसकों को केवल फिल्मों के लिए संगठित करने के बजाय रक्तदान और सामाजिक सेवा जैसे कामों से जोड़ने की कोशिश की।
चिरंजीवी के नाम कई बड़े सम्मान दर्ज हैं।
उन्हें 2006 में Padma Bhushan से सम्मानित किया गया।
इसके बाद 2024 में भारत सरकार ने उन्हें Padma Vibhushan, देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान, से सम्मानित किया।
उनके अन्य प्रमुख सम्मानों में शामिल हैं:
2024 में उन्हें Guinness World Record से भी सम्मानित किया गया, जिसमें भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में सबसे prolific actor-dancer के रूप में उनकी उपलब्धि दर्ज हुई।
चिरंजीवी की संपत्ति को लेकर इंटरनेट पर अलग-अलग आंकड़े मिलते हैं।
लेकिन यहां सावधानी जरूरी है।
उनकी वर्तमान नेट वर्थ का कोई एक आधिकारिक और स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए करोड़ों रुपये की किसी निश्चित राशि को तथ्य के रूप में लिखना सही नहीं होगा।
इतना जरूर स्पष्ट है कि उनका करियर सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं रहा। वह अभिनेता, निर्माता और विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं।
उनका लंबा फिल्मी करियर, पारिश्रमिक, प्रोडक्शन और अन्य व्यावसायिक हित उनकी आर्थिक स्थिति का हिस्सा रहे हैं। लेकिन बिना विश्वसनीय वित्तीय दस्तावेज के किसी निश्चित नेट वर्थ का दावा करना उचित नहीं है।
चिरंजीवी की सार्वजनिक छवि में भव्य स्टार लाइफस्टाइल जरूर दिखाई देती है, लेकिन उनके जीवन का एक बड़ा हिस्सा परिवार के इर्द-गिर्द भी रहा है।
उनका परिवार आज भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सबसे प्रभावशाली फिल्म परिवारों में गिना जाता है।
बेटे राम चरण से लेकर भाई पवन कल्याण और भतीजे-भतीजियों तक, परिवार की कई हस्तियां सिनेमा और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं।
हालांकि चिरंजीवी की सबसे बड़ी संपत्ति शायद उनका स्टारडम नहीं, बल्कि वह दर्शक-समर्थन है जो उन्हें कई पीढ़ियों से मिला है।
उनका जन्म नाम शिवशंकर वरप्रसाद था, लेकिन दुनिया उन्हें चिरंजीवी के नाम से जानती है।
चिरंजीवी की डांसिंग ने 1980 और 1990 के दशक में उनके स्टार व्यक्तित्व को अलग पहचान दी। सरकारी पद्म citation में भी उनके डांस और स्क्रीन उपस्थिति का विशेष उल्लेख है।
Swayam Krushi और Rudraveena जैसी फिल्मों ने यह साबित किया कि वह केवल कमर्शियल एक्शन स्टार नहीं थे।
यह फिल्म 10 करोड़ रुपये से अधिक distributor share पार करने वाली पहली तेलुगु फिल्म बनी थी।
राम चरण, पवन कल्याण, नागेंद्र बाबू, अल्लू अर्जुन और परिवार की दूसरी फिल्मी हस्तियों के कारण कोनिडेला-अल्लू परिवार तेलुगु सिनेमा के सबसे चर्चित परिवारों में शामिल है।
लगभग दस साल के फिल्मी अंतराल के बाद जब वह Khaidi No. 150 से लौटे, तब भी उनका स्टारडम कमजोर नहीं हुआ। भारत सरकार की पद्म citation ने भी उनकी वापसी के बाद बनी लोकप्रियता को रेखांकित किया है।
आज चिरंजीवी सक्रिय रूप से फिल्मों में काम कर रहे हैं।
2026 में Mana Shankara Vara Prasad Garu के जरिए वह बड़े पर्दे पर दिखाई दिए और आगे Vishwambhara तथा Kaaka जैसी परियोजनाओं से जुड़े हुए हैं। Kaaka को Bobby Kolli निर्देशित कर रहे हैं और इसकी संक्रांति 2027 रिलीज की घोषणा की गई है।
राजनीतिक रूप से वह पहले की तरह सक्रिय नहीं हैं। उनका वर्तमान सार्वजनिक फोकस मुख्य रूप से सिनेमा, सामाजिक कार्य और परिवार पर दिखाई देता है।
और शायद यही उनके करियर का सबसे दिलचस्प अध्याय है।
जिस अभिनेता ने 1978 में छोटे कदम से शुरुआत की थी, वह आज भी नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच प्रासंगिक है।
चिरंजीवी की कहानी उस सपने की कहानी है जिसमें एक साधारण शुरुआत से निकला इंसान अपने हुनर, अनुशासन और लगातार मेहनत से लाखों लोगों का सितारा बन जाता है।
उन्होंने एक्शन किया, डांस किया, कॉमेडी की, गंभीर किरदार निभाए, सामाजिक मुद्दों वाली फिल्में कीं, राजनीति में उतरे और फिर वापस सिनेमा में लौट आए।
लेकिन इन सबके बीच एक चीज लगातार कायम रही—दर्शकों का भरोसा।
एक कलाकार के लिए इससे बड़ा सम्मान शायद ही कोई हो।
2006 में पद्म भूषण से लेकर 2024 में पद्म विभूषण तक का सफर बताता है कि चिरंजीवी की पहचान सिर्फ एक सफल अभिनेता तक सीमित नहीं है।
उनकी सबसे बड़ी विरासत शायद उनकी फिल्मों की संख्या या बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड नहीं, बल्कि वह प्रभाव है जो उन्होंने अपने पीछे छोड़ा है।
एक ऐसी पीढ़ी, जिसने उन्हें पर्दे पर देखकर सपने देखना सीखा।
और आज, जब वह नई फिल्मों के साथ फिर पर्दे पर दिखाई देते हैं, तो कहानी वही पुरानी है—
उम्र बदल गई, सिनेमा बदल गया, दर्शकों की पसंद बदल गई… लेकिन 'मेगास्टार' चिरंजीवी का जादू अब भी कायम है।
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