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| CINTAA में घमासान! FWICE पर उठे सवाल |
फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में कलाकारों के अधिकारों और हितों की आवाज उठाने वाली संस्था CINTAA यानी Cine and TV Artistes' Association इन दिनों खुद एक बड़े विवाद के केंद्र में है।
मामला सिर्फ कुछ पदाधिकारियों के बीच मतभेद तक सीमित नहीं रह गया है। संगठन के बैंक खाते फ्रीज होने, कई Executive Committee सदस्यों के इस्तीफे, CAWT को लेकर मतभेद और चुनाव प्रक्रिया को लेकर कानूनी सवालों ने पूरे मामले को पेचीदा बना दिया है।
अब इस विवाद में एक और अहम सवाल सामने आया है—क्या CINTAA के आंतरिक मामलों और चुनाव प्रक्रिया में FWICE की भूमिका होनी चाहिए?
CINTAA की ओर से मामले को देख रहे वकील A.S. Peerzada ने FWICE के हस्तक्षेप के तरीके पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में जाता है, इस पर फिल्म और टीवी इंडस्ट्री की नजर बनी हुई है।
CINTAA लंबे समय से फिल्म और टेलीविजन कलाकारों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण संस्था रही है। लेकिन पिछले कुछ समय से इसके भीतर प्रशासन और निर्णय लेने के तरीके को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए हैं।
अगस्त में Executive Committee के कम से कम 11 सदस्यों ने इस्तीफा दिया। इनमें आठ निर्वाचित सदस्य बताए गए। इस्तीफों के पीछे संगठन के कामकाज और कथित तौर पर एकतरफा निर्णय लेने को लेकर चिंताएं बताई गईं।
इसके बाद विवाद और गहरा गया।
एक तरफ CINTAA नेतृत्व से जुड़े पदाधिकारियों का पक्ष सामने आया, वहीं दूसरी तरफ Upasana Singh और अन्य असंतुष्ट सदस्यों ने संगठन के संचालन को लेकर सवाल उठाए।
हालांकि Poonam Dhillon और Padmini Kolhapure ने उनके आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
यानी इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं और विवाद अभी सुलझा नहीं है।
इस विवाद का एक बड़ा हिस्सा CINTAA के बैंक खातों से भी जुड़ा है।
CINTAA की General Secretary Padmini Kolhapure ने दावा किया कि संगठन के बैंक खाते फ्रीज होने के कारण उसके रोजमर्रा के काम और कल्याणकारी गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
उनके मुताबिक, स्थिति का असर कर्मचारियों के वेतन तक पर पड़ा है। उन्होंने इस मामले में Upasana Singh और Deepak Parashar का नाम लेते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने बैंक जाकर खातों को फ्रीज कराया।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये Kolhapure की ओर से लगाए गए आरोप हैं, जिन्हें दूसरे पक्ष के नजरिए के साथ ही देखा जाना चाहिए।
वहीं CINTAA के Vice President C.P. Thakur ने विवाद को दूसरे तरीके से समझाया।
उन्होंने कहा कि मामला कथित तौर पर फंड के दुरुपयोग का नहीं था, बल्कि CAWT को CINTAA से जुड़े फंड देने और दूसरे प्रशासनिक मुद्दों को लेकर मतभेद पैदा हुए।
इस पूरे मामले में Cine Artists Welfare Trust यानी CAWT का नाम भी लगातार सामने आया है।
CINTAA President Poonam Dhillon ने बताया कि CINTAA और CAWT के बीच एक MOU को लेकर विचार किया गया था।
उनके अनुसार, इस पहल के पीछे कलाकारों की मेडिकल जरूरतों और कल्याण से जुड़ी चिंताएं थीं।
Dhillon ने यह भी बताया कि अतीत में CINTAA की ओर से CAWT के लिए फंड जुटाने में मदद की गई थी। उन्होंने Mithun Chakraborty और Johnny Lever द्वारा अलग-अलग मौकों पर फंड जुटाने से जुड़े प्रयासों का भी जिक्र किया।
लेकिन बाद में इसी दिशा में आगे बढ़ने को लेकर मतभेद सामने आए।
यहीं से सवाल उठा कि CINTAA के संसाधनों और सदस्यों से जुड़े फंड का इस्तेमाल किस तरीके से किया जाना चाहिए और ऐसे फैसलों के लिए किस स्तर की सहमति जरूरी है।
अब इस विवाद का सबसे अहम हिस्सा CINTAA का चुनाव है।
CINTAA से जुड़े पक्ष की ओर से बताया गया है कि अदालत से ऐसा आदेश मिला है जिसके तहत चुनाव कराने और परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।
लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं होती।
क्योंकि FWICE की भूमिका को लेकर कानूनी सवाल अभी बाकी है।
C.P. Thakur के अनुसार, 26 अक्टूबर 2026 को City Civil Court इस महत्वपूर्ण सवाल पर सुनवाई करेगी कि FWICE को CINTAA के चुनाव कराने का अधिकार है या नहीं।
यही फैसला आगे की पूरी स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
यहीं पर वकील A.S. Peerzada की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
CINTAA से जुड़े कानूनी विवाद में Peerzada ने FWICE के हस्तक्षेप के तरीके पर सवाल उठाया है।
उनका मूल सवाल संगठन के आंतरिक मामलों और बाहरी संस्था की भूमिका की सीमा से जुड़ा है।
यानी सवाल यह नहीं है कि कलाकारों की किसी बड़ी संस्था को किसी विवाद में कोई भूमिका नहीं हो सकती। असली कानूनी बहस यह है कि किस संस्था को CINTAA के आंतरिक चुनाव और प्रशासनिक फैसलों में किस सीमा तक हस्तक्षेप करने का अधिकार है।
यही वजह है कि FWICE और CINTAA के संबंध इस विवाद में बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं।
Peerzada का तर्क है कि CINTAA के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का तरीका उचित नहीं माना जा सकता और इसी आधार पर उन्होंने FWICE की भूमिका पर आपत्ति जताई है।
फिल्म इंडस्ट्री में अलग-अलग संगठनों की अपनी भूमिकाएं और जिम्मेदारियां होती हैं।
CINTAA मुख्य रूप से कलाकारों के संगठन के रूप में जाना जाता है, जबकि FWICE फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े विभिन्न कर्मचारी और तकनीकी संगठनों का बड़ा फेडरेशन है।
इसलिए जब किसी कलाकार संगठन के चुनाव या आंतरिक प्रशासन में किसी दूसरे बड़े संगठन की भूमिका सामने आती है, तो स्वाभाविक रूप से अधिकार और अधिकार-क्षेत्र का सवाल उठता है।
यही इस समय CINTAA विवाद का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी पहलू बन चुका है।
इसका अंतिम जवाब अभी अदालत की आगे की कार्यवाही से ही स्पष्ट होगा।
C.P. Thakur ने कहा था कि यदि 26 अक्टूबर को अदालत का फैसला मौजूदा व्यवस्था के पक्ष में नहीं आता है, तो वर्तमान पदाधिकारियों को अपनी सीटें खाली करनी पड़ सकती हैं।
इसका मतलब साफ है कि अभी संगठन की स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं मानी जा सकती।
एक तरफ चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से जुड़ा आदेश है, तो दूसरी तरफ FWICE की चुनाव कराने की भूमिका को लेकर अदालत में सवाल लंबित है।
CINTAA विवाद की शुरुआत केवल चुनाव से नहीं हुई।
Executive Committee के 11 सदस्यों के इस्तीफों ने पहले ही संगठन के भीतर गंभीर मतभेदों का संकेत दे दिया था।
इस्तीफा देने वाले सदस्यों में आठ निर्वाचित सदस्य बताए गए थे। उनके सामने आए कारणों में संगठन के काम करने के तरीके और नेतृत्व द्वारा कथित रूप से एकतरफा निर्णय लेने की चिंता शामिल थी।
दूसरी ओर, Upasana Singh सहित असंतुष्ट सदस्यों ने Poonam Dhillon और Padmini Kolhapure के नेतृत्व पर सवाल उठाए।
हालांकि दोनों पदाधिकारियों ने इन आरोपों से इनकार किया है।
इसलिए यह विवाद सिर्फ दो व्यक्तियों के बीच मतभेद की कहानी नहीं रह गया है। यह CINTAA के प्रशासनिक ढांचे और निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।
CINTAA नेतृत्व की ओर से सामने आए बयानों में बैंक खातों, कर्मचारियों के वेतन और कलाकारों के कल्याण से जुड़े काम प्रभावित होने की चिंता जताई गई है।
Padmini Kolhapure ने बैंक खातों के फ्रीज होने को लेकर आपत्ति जताई।
वहीं Poonam Dhillon ने CAWT के साथ प्रस्तावित MOU के पीछे कलाकारों के कल्याण और मेडिकल सहायता की जरूरतों का हवाला दिया।
इन बयानों से यह स्पष्ट है कि मौजूदा नेतृत्व इस विवाद को सिर्फ संगठनात्मक सत्ता की लड़ाई के रूप में नहीं देखता, बल्कि कलाकारों और कर्मचारियों के काम से भी जोड़ता है।
असंतुष्ट सदस्यों की ओर से नेतृत्व के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं।
Upasana Singh और अन्य dissenting members ने Poonam Dhillon और Padmini Kolhapure पर कथित रूप से लोकतांत्रिक तरीके से काम नहीं करने के आरोप लगाए हैं।
हालांकि इन आरोपों को संबंधित पदाधिकारियों ने खारिज किया है।
ऐसे मामलों में सबसे जरूरी बात यही होती है कि आरोपों और अदालत में साबित तथ्यों के बीच अंतर रखा जाए।
फिलहाल CINTAA विवाद में कई बातें कानूनी प्रक्रिया के अधीन हैं।
26 अक्टूबर 2026 की तारीख इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण बन गई है।
City Civil Court को FWICE की ओर से CINTAA चुनाव कराने के अधिकार से जुड़े सवाल पर निर्णय करना है।
अगर अदालत FWICE की भूमिका को सही ठहराती है तो चुनाव और संगठन की आगे की प्रक्रिया उसी दिशा में बढ़ सकती है।
अगर फैसला इसके विपरीत आता है, तो मौजूदा चुनावी व्यवस्था और पदाधिकारियों की स्थिति पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
यानी यह तारीख सिर्फ एक कानूनी सुनवाई नहीं, बल्कि CINTAA के भविष्य के प्रशासनिक ढांचे के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
CINTAA का काम केवल चुनाव या पदों तक सीमित नहीं है।
कलाकारों से जुड़ी संस्था होने के कारण संगठन के भीतर लंबे समय तक चलने वाला प्रशासनिक विवाद उसकी welfare activities और रोजमर्रा के काम को प्रभावित कर सकता है।
Padmini Kolhapure ने भी बैंक खातों के फ्रीज होने के संदर्भ में इसी तरह की चिंता जताई थी।
इसलिए इस विवाद का समाधान केवल यह तय करने के लिए जरूरी नहीं है कि संगठन का नेतृत्व कौन करेगा।
जरूरत इस बात की भी है कि कलाकारों से जुड़ी कल्याणकारी गतिविधियां और संगठन का नियमित काम बिना रुकावट जारी रहे।
अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी।
कई स्तरों पर विवाद मौजूद है—Executive Committee के इस्तीफे, नेतृत्व को लेकर आरोप-प्रत्यारोप, बैंक खातों का मुद्दा, CAWT से जुड़ा प्रस्ताव और चुनाव प्रक्रिया।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि FWICE की भूमिका को लेकर अदालत में मामला अभी निर्णायक स्थिति में नहीं पहुंचा है।
इसलिए किसी एक पक्ष की जीत या हार का निष्कर्ष अभी निकालना उचित नहीं होगा।
CINTAA विवाद अब बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री की एक बड़ी संगठनात्मक लड़ाई में बदल चुका है।
एक ओर Poonam Dhillon और Padmini Kolhapure के नेतृत्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं, दूसरी ओर संगठन की ओर से बैंक खातों, कलाकारों के कल्याण और CAWT से जुड़े फैसलों को लेकर अपना पक्ष रखा गया है।
इसके बीच FWICE की भूमिका सबसे बड़ा कानूनी सवाल बनती दिखाई दे रही है।
वकील A.S. Peerzada द्वारा FWICE के हस्तक्षेप के तरीके पर सवाल उठाए जाने के बाद यह विवाद और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
अब सबसे ज्यादा नजर 26 अक्टूबर 2026 को होने वाली City Civil Court की कार्यवाही पर है। अदालत का रुख यह तय करने में अहम हो सकता है कि CINTAA के चुनाव और संगठनात्मक व्यवस्था आगे किस रास्ते पर जाएगी।
फिलहाल इतना साफ है कि CINTAA की यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। असली तस्वीर आने वाले कानूनी फैसलों के बाद ही पूरी तरह सामने आएगी।
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